अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ यानी EU पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ जानबूझकर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को गलत तरीके से अपना निशाना बना रहा है। उनका यह आरोप संघ द्वारा इन कंपनियों पर लगाए गए भारी एंटी-ट्रस्ट जुर्माने की हालिया कार्रवाइयों के बाद आया है। राष्ट्रपति का यह सख्त रुख व्यापार और तकनीक के मोर्चे पर एक नए वैश्विक विवाद की शुरुआत का संकेत दे रहा है। वे अमेरिकी व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अब सीधे तौर पर यूरोपीय संघ से टकराव की स्थिति में आ गए हैं।
टैरिफ और जांच की खुली धमकी: अपने इन आरोपों के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने EU को बहुत ही सख्त और सीधी चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपना गुस्सा जाहिर किया। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यूरोपीय संघ पर भारी टैरिफ लगाने और उनके खिलाफ कड़ी जांच शुरू करने की धमकी दी। यह धमकी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनका प्रशासन इन वित्तीय जुर्मानों को कतई हल्के में नहीं ले रहा है। भविष्य में इस विवाद के कारण दोनों पक्षों के बीच बड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध भी देखने को मिल सकते हैं।
गूगल पर भारी-भरकम जुर्माना: राष्ट्रपति ने विशेष रूप से बड़ी अमेरिकी कंपनियों पर लगाए गए जुर्मानों के भारी-भरकम आंकड़ों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ अब तक अकेले Google पर ही 18 अरब डॉलर से ज़्यादा का जुर्माना लगा चुका है। इस विशाल राशि में वह 1 अरब डॉलर का नया जुर्माना भी शामिल है जो हाल ही में इस कंपनी पर लगाया गया था। इतनी बड़ी आर्थिक कार्रवाई को उन्होंने अमेरिकी कंपनियों के साथ किया जा रहा एक बहुत बड़ा और खुला अन्याय बताया। उनके अनुसार ऐसे जुर्माने मुक्त व्यापार के नियमों का सीधा उल्लंघन हैं और तकनीकी विकास में बड़ी बाधा पैदा करते हैं।
अन्य कंपनियों पर भी वित्तीय प्रहार: Google के अलावा अन्य प्रमुख अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गजों को भी यूरोपीय संघ के भारी जुर्मानों का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रपति के अनुसार दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Apple पर भी संघ द्वारा 15 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। इसी कड़ी में सोशल मीडिया दिग्गज Meta पर भी कार्रवाई करते हुए 3 अरब डॉलर का भारी जुर्माना थोपा गया है। वहीं ई-कॉमर्स की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी Amazon को भी 2.5 अरब डॉलर का विशाल जुर्माना भरना पड़ा है। इन सभी कंपनियों पर की गई इस सामूहिक कार्रवाई ने अमेरिकी प्रशासन की चिंताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।
भेदभावपूर्ण रवैया और जवाबी कार्रवाई: राष्ट्रपति Donald Trump ने ट्रुथ सोशल की अपनी पोस्ट में EU की इस पूरी कार्रवाई को पूरी तरह से भेदभावपूर्ण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ बार-बार सिर्फ और सिर्फ अमेरिका की ही बड़ी टेक कंपनियों को अपना निशाना बना रहा है। इस पक्षपातपूर्ण रवैये का कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि उनका प्रशासन इसका बहुत जल्द माकूल जवाब देगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई करते हुए यूरोपीय उत्पादों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। इस बयान ने दोनों महाद्वीपों के बीच चल रहे ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों में भारी तनाव पैदा कर दिया है।
यूरोप के लिए पिग्गी बैंक नहीं अमेरिका: इस व्यापारिक विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने NATO सदस्य देशों को भी एक बहुत ही तीखी और कड़ी धमकी दे डाली। उन्होंने यूरोपीय देशों की आर्थिक निर्भरता पर सीधा कटाक्ष करते हुए बहुत ही सख्त और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर यूरोप के लिए उनका कोई पिग्गी बैंक बिल्कुल नहीं है। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए यह भी जोड़ा कि हम भविष्य में भी अमेरिका को उनका पिग्गी बैंक नहीं बनने देंगे। उनका यह बयान यूरोपीय सहयोगियों से वित्तीय जिम्मेदारी उठाने की उनकी पुरानी मांग को ही एक बार फिर दोहराता है।


























































