अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म कराने के लिए तैयार किए गए प्रारंभिक समझौता ढांचे में परमाणु कार्यक्रम और समुद्री मार्गों को लेकर अहम प्रस्ताव रखे गए हैं। मसौदे के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश को हस्तांतरित किया जा सकता है या उसके संवर्धन का स्तर घटाया जा सकता है। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच प्रारंभिक सहमति बन जाने के 7 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोलने का प्रस्ताव भी शामिल है। इस व्यवस्था में चीन को संभावित गारंटर के रूप में नामित किया गया है, ताकि समझौते को लागू कराने और उसकी स्थिरता बनाए रखने में भूमिका निभाई जा सके। मसौदे में चीन की ओर से एक बैठक आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रस्तावित ढांचा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के साथ-साथ परमाणु गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रतिबद्धताएं तय करने की कोशिश है।
इस्तांबुल के बजाय दोहा में बातचीत और स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था: प्रारंभिक योजना के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता तुर्किये के इस्तांबुल में नहीं, बल्कि कतर की राजधानी दोहा में आयोजित होगी। प्रस्तावित समझौते में ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों, नाकेबंदी और अन्य आर्थिक पाबंदियों में ढील देने पर सहमत हो सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को बिना पुष्टि के बड़ी रियायत देने से बचाने के लिए स्वतंत्र सत्यापन व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत समझौते के हर चरण को लागू करने से पहले यह जांच की जाएगी कि संबंधित पक्ष ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी की हैं या नहीं। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना है, ताकि एक पक्ष की ओर से उठाए गए कदम के बदले दूसरे पक्ष की जिम्मेदारी भी सत्यापित हो सके। मसौदे में इस बात पर जोर है कि किसी भी महत्वपूर्ण रियायत से पहले संबंधित प्रतिबद्धताओं का आकलन किया जाए।
कतर का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पत्र सौंपा: युद्धविराम को दोबारा बहाल कराने के लिए कतर ने शुक्रवार को अपनी मध्यस्थता की कोशिशों को आगे बढ़ाया। कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचा। इस दल का नेतृत्व कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के एक वरिष्ठ सलाहकार ने किया। प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ता निकालने की कोशिश में जुटा है। इसी दौरान कतर के दूतों ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की ओर से भेजा गया पत्र ईरानी सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई को सौंपा। बताया गया है कि ईरान ने इस पत्र का स्वागत किया है, क्योंकि इसमें अमेरिकी सैन्य हमलों को रोकने के लिए एक नया कूटनीतिक रास्ता सुझाया गया है। कतर की इस सक्रियता को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने तथा युद्धविराम बहाल करने की कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप ने कहा, ईरान बातचीत चाहता है लेकिन अमेरिका के पास समय: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि तेहरान बातचीत करने में रुचि रखता है और लगातार संपर्क बनाए हुए है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति को बेहद खराब बताते हुए दावा किया कि वहां सैनिकों और कानून व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारियों को वेतन देने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और ईरान बात करना चाहता है, लेकिन अमेरिका के पास इंतजार करने का समय है। ट्रंप ने इस संघर्ष को सामान्य युद्ध मानने से भी इनकार किया और कहा कि इस अभियान को शुरू हुए 7 महीने हो चुके हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब संभावित समझौते का प्रारंभिक ढांचा तैयार होने और कतर के प्रतिनिधिमंडल के तेहरान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इससे स्पष्ट है कि कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति फिलहाल संघर्ष समाप्त करने को लेकर तत्काल दबाव में आने का संकेत नहीं दे रहे हैं।
अभियान की लागत कम होने और दूसरे लाभों से भरपाई का दावा: ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर होने वाले खर्च को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के कारण अमेरिका पर आर्थिक बोझ काफी कम पड़ा है। उनके अनुसार, अन्य जगहों से मिले फायदों ने सैन्य अभियान पर हुए खर्च की भरपाई कर दी है। ट्रंप ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के साथ-साथ संभावित समझौते की शर्तों पर भी चर्चा चल रही है। प्रस्तावित ढांचे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं के बदले अमेरिकी प्रतिबंधों, नाकेबंदी और दूसरी आर्थिक पाबंदियों में ढील देने की बात शामिल है। साथ ही, समझौते के हर चरण में स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था रखने का प्रस्ताव है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पक्ष दूसरे की जिम्मेदारियों की पुष्टि किए बिना बड़ी रियायत न दे। इस प्रकार सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक बातचीत तीनों इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।
हाकान फिदान और मार्को रुबियो की मुलाकात में क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा: अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिविधियों के समानांतर तुर्किये ने भी अपनी भूमिका सक्रिय की है। शुक्रवार को अमेरिका में जी20 की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच अमेरिका और ईरान की वार्ता, क्षेत्र में बदलते हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत हुई। यह मुलाकात तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सप्ताह की शुरुआत में हुई फोन वार्ता के बाद हुई। उस बातचीत में अंकारा ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई थी और क्षेत्रीय तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया था। अब प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रारंभिक सहमति के 7 दिनों के भीतर अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने की बात शामिल है। ऐसे में समुद्री रास्तों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता अमेरिका, ईरान, कतर और तुर्किये की कूटनीतिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन गई है।















































