हिंदू पंचांग के अनुसार, 26 अगस्त 2026 (बुधवार) को श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। आज के दिन शोभन योग और श्रवण नक्षत्र का अत्यंत शुभ व दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में शोभन योग और श्रवण नक्षत्र के दौरान किए जाने वाले विशेष उपायों को अत्यंत फलदायी माना गया है। ये उपाय जीवन की विभिन्न बाधाओं को दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सफलता के मार्ग को सुगम बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
इसके साथ ही सनातन धर्म में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे हेरंब संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं आज के ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ हेरंब संकष्टी चतुर्थी की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, भद्रा काल, चंद्रोदय का समय और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।
जीवन में सफलता व समृद्धि के लिए आज के विशेष उपाय
26 अगस्त को शोभन योग और श्रवण नक्षत्र के पावन अवसर पर अपनी समस्याओं के अनुसार निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
- आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए: यदि आप आत्मबल की कमी महसूस कर रहे हैं या निर्णय लेने में संकोच होता है, तो आज सफेद मोतियों की माला धारण करें। इससे आपका आत्मविश्वास तेजी से बढ़ेगा और आप अपने कार्यों को अधिक कुशलता से पूरा कर पाएंगे।
- करियर में तीव्र तरक्की के लिए: यदि आप जीवन और व्यवसाय में उन्नति की रफ्तार बढ़ाना चाहते हैं, तो आज सफेद फूल वाले पौधे की जड़ में जल अर्पित करें। इसके साथ ही पास के किसी मंदिर में कपूर की डिब्बी दान करें।
- जीवनसाथी की सफलता व समृद्धि के लिए: आज चांदी की कोई छोटी वस्तु (जैसे सिक्का या धातु) खरीदकर लाएं। इसे अपने घर के पूजा स्थान में स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करें और पूरे दिन वहीं रहने दें। अगले दिन स्नान के बाद इसे अपने पास रखें या प्रयोग में लाएं।
- समाज में मान-सम्मान व रुतबा बढ़ाने के लिए: समाज में विशिष्ट पहचान बनाने के लिए आज एक मुट्ठी चावल और थोड़ी-सी मिश्री एक सफेद कपड़े में बांधकर मंदिर में दान करें।
- अपनी वाणी का प्रभाव बढ़ाने के लिए: यदि आप चाहते हैं कि लोग आपकी बातों से प्रभावित हों, तो आज रात अपने सिरहाने के पास एक बर्तन में जल भरकर रखें। अगले दिन सुबह उस जल को किसी पौधे की जड़ में डाल दें।
- वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए: आज पूजा के समय थोड़ी-सी हल्दी में घी मिलाकर भगवान गणेश के मस्तक पर तिलक लगाएं और उनके समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- संगीत व कला के क्षेत्र में उन्नति के लिए: संगीत या कला के क्षेत्र से जुड़े लोग आज मिट्टी के दीपक में 2 कपूर जलाकर मां सरस्वती के समक्ष रखें और देवी मां को ताजे पुष्प अर्पित करें।
- नौकरी व दफ्तर की बाधाएं दूर करने के लिए: नौकरी से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए आज घी, पिसी हुई शक्कर और सफेद तिल के लड्डू बनाकर श्री गणेश को भोग लगाएं। यदि लड्डू बनाना संभव न हो, तो ये तीनों सामग्रियां अलग-अलग मंदिर में दान करें। यदि ऑफिस के कार्यों में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो सफेद दक्षिणावर्ती शंख की विधिवत पूजा करके उसे अपने पूजा घर में स्थापित करें।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त व चंद्रोदय समय
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को ‘हेरंब संकष्टी चतुर्थी’ कहा जाता है। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखकर शाम को गणेश पूजन करते हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करते हैं।
1. हेरंब संकष्टी चतुर्थी तिथि (Heramba Sankashti Chaturthi Date)
- तिथी प्रारंभ: 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:50 बजे
- तिथी समाप्त: 01 सितंबर 2026 को सुबह 07:41 बजे
- व्रत की तिथि: संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्र अर्घ्य का मुख्य महत्व होता है। अतः चंद्रोदय की तिथि के अनुसार हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा।
2. पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
31 अगस्त को भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए दो मुख्य शुभ समय प्राप्त हो रहे हैं:
- प्रथम प्रातः मुहूर्त: सुबह 05:58 बजे से प्रातः 07:34 बजे तक
- द्वितीय प्रातः मुहूर्त: सुबह 09:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तक
- सायंकाल दीप प्रज्वलन समय: शाम 06:44 बजे
3. भद्रा काल का ध्यान रखें
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर सुबह 05:58 बजे से सुबह 08:50 बजे तक भद्रा रहेगी। इस बार भद्रा का वास मृत्युलोक (पृथ्वी) पर रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भद्रा पृथ्वी पर हो, तो उस अवधि में कोई भी नया या मांगलिक कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
4. चंद्रोदय समय एवं पारण (Moonrise Time & Paran)
संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र देव को अर्घ्य देना अनिवार्य माना गया है:
- चंद्रोदय का समय: 31 अगस्त 2026 की रात 08:29 बजे
- अर्घ्य एवं पूजन: रात 08:29 बजे चंद्रमा के दर्शन होने के बाद श्री गणेश की आरती करें और चंद्रमा को जल एवं दूध से अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलें।
- पारण का नियम: जो श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य देने के तुरंत बाद व्रत खोलते हैं, वे 31 अगस्त की रात को ही पारण कर सकते हैं। जो लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं, वे 01 सितंबर को सुबह 05:59 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।
श्री गणेश पूजन एवं संकष्टी व्रत का धार्मिक महत्व
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन की सभी विकट समस्याएं और बाधाएं स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं। हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।
इसके अतिरिक्त, इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बप्पा को समर्पित यह व्रत रखने और चंद्र पूजन करने से कुंडली में स्थित चंद्र दोष शांत होता है, जिससे व्यक्ति को मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और सुदृढ़ आर्थिक स्थिति की प्राप्ति होती है।
















































