नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UMEED अधिनियम, 2025 को भारत के मुस्लिम समुदाय, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री, किरेन रिजिजू, ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के वक्फ बोर्डों को छह महीने के भीतर UMEED पोर्टल पर वक्फ से संबंधित संपत्तियों का पूरा विवरण अपलोड करने का निर्देश दिया है।
यह पोर्टल 6 जून, 2025 को लॉन्च किया गया था और यह मंत्रालय की एक प्रमुख डिजिटल पहल है। इसका सहज डिज़ाइन मुतवल्ली, जाँचकर्ताओं और अनुमोदकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाता है।
1. यह वक्फ प्रशासन को अपारदर्शिता और मैन्युअल रिकॉर्ड से हटाकर एक पारदर्शी, सत्यापन योग्य और केंद्रीकृत प्रणाली की ओर ले जाता है।
2. यह वास्तविक समय में वक्फ संपत्ति के उपयोग और पट्टे की प्रक्रियाओं को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है।
3. इसमें एक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली भी है जो समस्याओं के त्वरित समाधान को सुनिश्चित करती है।
4. यह यह भी सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग उनके इच्छित उद्देश्य के अनुसार हो, यानी मुख्य रूप से वंचित मुसलमानों, जिसमें महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं, के उत्थान के लिए हो।
जागरूकता अभियान
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने UMEED पोर्टल के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं।
1. पोर्टल के इंटरफ़ेस को दर्शाने वाली दस आसान-से-पालन वाली ट्यूटोरियल फिल्में जारी की गई हैं।
2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वक्फ संशोधन और UMEED पोर्टल लॉन्च पर समर्पित फिल्में प्रसारित की गई हैं।
3. देश भर में 100 से अधिक बहुभाषी लेख और 150 से अधिक छोटे वीडियो प्रकाशित किए गए हैं।
4. समुदाय के सदस्यों के मार्गदर्शन के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है।
सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
यह पोर्टल सिर्फ एक तकनीकी उन्नयन नहीं है; बल्कि यह वक्फ शासन में निष्पक्षता और दक्षता के प्रति एक प्रतिबद्धता है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को पारदर्शी और उत्पादक तरीके से प्रबंधित करना है, ताकि उनका लाभ समुदाय, विशेषकर महिलाओं और युवाओं तक पहुँच सके। UMEED पोर्टल सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण का एक साधन बनकर उभर रहा है।





























