यरूशलम: इजरायल इस वक्त केवल मोर्चों पर ही नहीं, बल्कि अपने घर के अंदर भी एक गहरे सैन्य और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। गाजा युद्ध (अक्टूबर 2023) शुरू होने के बाद से इजरायली सेना लगातार ऑपरेशनों के भारी दबाव में है और इस समय सेना में करीब 12,000 सैनिकों की भारी कमी है। इस कमी ने पूरे सैन्य ढांचे को तनाव में डाल दिया है।
इस संकट को जो बात सबसे ज्यादा जटिल बना रही है, वह है इजरायल के ‘अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स’ (हरे दी) समुदाय को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट।
संकट के मुख्य कारण:
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश बनाम राजनीति: साल 2024 में इजरायल के हाई कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला दिया था कि हरे दी येशिवा छात्रों को सैन्य सेवा से छूट देने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इसके बावजूद, सरकार में शामिल अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां इस छूट को बरकरार रखने के लिए नए कानून लाने का दबाव बना रही हैं।
- 80 हजार युवा सेना से बाहर: मौजूदा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 से 24 साल की उम्र के लगभग 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा इस वक्त सैन्य सेवा के योग्य हैं, लेकिन उन्हें अभी तक सेना में शामिल नहीं किया गया है।
ऐसे समय में जब IDF चीफ सेना के ‘अंदर से टूटने’ की चेतावनी दे रहे हैं, इन युवाओं की भर्ती न होना इजरायल के लिए एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संकट बन गया है।



































