इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा यह संघर्ष अब एक वैश्विक संकट बन चुका है। फरवरी के अंत में शुरू हुए US-Israel Joint Attacks के बाद से अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध की विभीषणता ने न केवल इंसानी जीवन को बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी संकट में डाल दिया है।
युद्ध के विनाशकारी प्रभाव (Devastating Impact of War):
- Mass Casualties: हमलों में अब तक हजारों नागरिकों और सैन्य कर्मियों की मौत हो चुकी है।
- Economic Instability: ईंधन की कीमतें (Fuel Prices) दुनिया भर में आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार अस्थिर हो गया है।
- Shipping Route Disruption: होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप होने की कगार पर है।
युद्ध अपराधों की आशंका (War Crimes Allegations): दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर नागरिक ठिकानों (Civilian Targets) को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं। अल-बरदेई ने चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो यह ‘चुनिंदा युद्ध’ (Selective War) की नीति पूरे मध्य पूर्व को तबाह कर देगी। उन्होंने खाड़ी देशों (Persian Gulf) से आग्रह किया है कि वे केवल दर्शक न बने रहें, बल्कि सक्रिय होकर इस युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाएं।
ऐतिहासिक संदर्भ: मोहम्मद अल-बरदेई, जिन्होंने 1997 से 2009 तक IAEA का नेतृत्व किया, पहले भी अमेरिका की सैन्य नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान तनाव 2005 के नोबेल शांति पुरस्कार के आदर्शों के विपरीत है और इसे रोकने के लिए तुरंत ‘सीजफायर’ की आवश्यकता है।




































