लेबनान की सीमा पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने हिजबुल्लाह के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा समन्वित सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसे “Operation Roaring Lion” नाम दिया गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, हमले जारी रहेंगे।
ऑपरेशन रोरिंग लायन की बारीकियां (Details of Operation Roaring Lion): IDF के जनरल स्टाफ चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर के नेतृत्व में इजरायली वायुसेना और आर्टिलरी ने बेरूत, बेका वैली और दक्षिणी लेबनान में 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों की सबसे बड़ी विशेषता इनका “Precise Intelligence” (सटीक खुफिया जानकारी) पर आधारित होना है। इजरायल ने महीनों की प्लानिंग के बाद हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर्स, मिसाइल डिपो और उनकी विशिष्ट ‘राडवान फोर्स’ के बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है।
नेतन्याहू की दोहरी रणनीति (Netanyahu’s Dual Strategy): प्रधानमंत्री नेतन्याहू एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान विरोधी रुख का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने लेबनान में सैन्य कार्रवाई को रोकने से इनकार कर दिया है। नेतन्याहू के कार्यालय का बयान स्पष्ट है: “हम ट्रंप के 2 सप्ताह के सीजफायर का समर्थन करते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब ईरान तुरंत होर्मुज के रास्ते खोल दे और अमेरिका व इजरायल पर हमले बंद करे।”
क्षेत्रीय अस्थिरता और हिजबुल्लाह का भविष्य (Regional Instability and Hezbollah’s Future): इजरायल का लक्ष्य उत्तरी इजरायल के विस्थापित नागरिकों को वापस उनके घरों में बसाना है। इसके लिए हिजबुल्लाह की कमर तोड़ना अनिवार्य है। हिजबुल्लाह की एरियल यूनिट्स और नेवल एसेट्स पर हुए प्रहार ने संगठन को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। लेकिन ईरान के समर्थन और होर्मुज की नाकेबंदी ने इस युद्ध को इजरायल-लेबनान सीमा से निकालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है।
निष्कर्ष: आगामी कुछ दिन मिडिल ईस्ट के लिए निर्णायक होंगे। यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो यह दो सप्ताह का सीजफायर इतिहास का सबसे छोटा और असफल शांति प्रयास साबित हो सकता है। विश्व की निगाहें अब वाशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।




































