रूस का शांति प्रयास और पुतिन का हस्तक्षेप एक तरफ जहां अमेरिका ने ईरान को “खत्म करने” की धमकी दी है और चीन पर आर्थिक दबाव बनाना शुरू किया है, वहीं दूसरी तरफ रूस इस मामले में एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में उभर रहा है। रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर लंबी बातचीत की है।
- रूस का रुख: पुतिन ने शांति प्रयासों में मदद करने की अपनी तत्परता जताई है। रूस नहीं चाहता कि यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) में तब्दील हो, क्योंकि इससे पूरे यूरेशिया क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
- ईरान की स्थिति: इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद ईरान अब रूस और चीन जैसे सहयोगियों की ओर देख रहा है ताकि अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों का मुकाबला किया जा सके।
ट्रंप की ‘Tariff Diplomacy’ के मायने डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ‘आर्थिक हथियारों’ के इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं। चीन पर 50% Tariff लगाने की धमकी केवल व्यापार से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह एक Geopolitical Tool है।
हथियारों की होड़ रोकना: अमेरिका चाहता है कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर रहे। यदि चीन की मिसाइलें ईरान पहुँचती हैं, तो यह अमेरिकी वायु सेना और नौसेना के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।चीन पर दबाव: अमेरिका जानता है कि चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात (Exports) पर टिकी है, और 50% टैरिफ चीन के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित होगा।
निष्कर्ष: मुहाने पर खड़ी दुनिया वर्तमान स्थिति यह है कि अमेरिका और ईरान में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ट्रंप की बौखलाहट और ईरान का कड़ा रुख यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। रूस और चीन का इस संघर्ष में शामिल होना इसे एक World War-like Scenario की ओर धकेल सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति का कोई आखिरी रास्ता बचेगा या फिर गोलियों की गूँज ही अंतिम फैसला करेगी।





































