अमेरिकी सीनेट में माइनॉरिटी लीडर Chuck Schumer ने Iran के साथ युद्ध को लेकर Donald Trump की आलोचना की है। शूमर ने आरोप लगाया है कि ट्रंप केवल अपने तेल उद्योग से जुड़े ‘Big Oil’ कैंपेन डोनर्स को फायदा पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप के इन फैसलों के कारण आम अमेरिकी नागरिकों को ऊर्जा की लगातार बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। Chuck Schumer ने X पर लिखा कि ईरान में ट्रंप का युद्ध उनके उन तेल कारोबारी दोस्तों के लिए एक बड़ा तोहफा है। इन बड़ी तेल कंपनियों ने मुनाफा कमाने के वादे के साथ ट्रंप के चुनाव अभियान को भारी फंड मुहैया कराया था।
ऊर्जा संकट और राजनीति: शूमर के अनुसार ऐसा लगता है कि ट्रंप ने चुनाव में जो वादा किया था, उसे अब वे पूरा कर रहे हैं। अमेरिका में जारी इस आंतरिक राजनीतिक घमासान के बीच ईरान के साथ युद्ध पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि इस संघर्ष से आम जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है और ऊर्जा संकट गहरा रहा है। वहीं दूसरी ओर Donald Trump ने कहा है कि ईरानी नेता पर्दे के पीछे वार्ता करने के इच्छुक दिखाई देते हैं। लेकिन ईरान द्वारा खुले तौर पर इनकार करने से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।
सऊदी अरब की नई पहल: मिडिल ईस्ट में जारी इस भारी सैन्य तनाव और कूटनीतिक अस्थिरता के बीच एक नया गठबंधन आकार ले रहा है। Saudi Arabia का कहना है कि यह नया गठबंधन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा शिपमेंट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह गठबंधन विशेष रूप से Bab al-Mandeb जलडमरूमध्य, Red Sea और Gulf of Aden में समुद्री आवाजाही को सुरक्षित करेगा। सऊदी अरब का मानना है कि व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सख्त जरूरत है। Riyadh में आयोजित एक बड़ी बैठक के बाद इस दूरगामी सुरक्षा योजना के सभी ब्यौरे सार्वजनिक किए गए।
रियाद में 43 देशों की बैठक: इस नए गठबंधन की रूपरेखा तैयार करने के लिए Riyadh में 43 देशों और EU की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद गुरुवार को इस प्रस्तावित समुद्री सुरक्षा योजना का आधिकारिक खुलासा किया गया। सऊदी अरब ने बताया कि कुल 14 देशों ने इस नए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन का पूर्ण समर्थन किया है। इन समर्थक देशों में Turkey, Pakistan, Egypt, Sudan और Djibouti जैसे कई प्रमुख देश प्रमुखता से शामिल हैं। यह गठबंधन रेड सी और आसपास के जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों पर होने वाले खतरों को रोकने का काम करेगा।
ओमान और यूएई की दूरी: हालांकि इस गठबंधन को 14 देशों का समर्थन मिला है, लेकिन खाड़ी के कुछ देश इससे दूर नजर आ रहे हैं। खाड़ी के छह अरब देशों में से Oman और UAE का नाम इस गठबंधन का समर्थन करने वालों में शामिल नहीं था। ओमान इस समय Strait of Hormuz को लेकर Iran के साथ स्वतंत्र रूप से कूटनीतिक बातचीत में व्यस्त है। वहीं Oman और Iran मिलकर जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही के लिए एक संयुक्त अस्थायी रास्ता बनाने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में ओमान और यूएई का इस नए गठबंधन से दूर रहना क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
गठबंधन और युद्ध का भविष्य: एक तरफ जहां Saudi Arabia 14 देशों के साथ मिलकर समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करने में जुटा है। वहीं दूसरी तरफ Donald Trump पर अमेरिका के भीतर ही ईरान युद्ध को लेकर चौतरफा दबाव और आरोप बढ़ते जा रहे हैं। Iran के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei के सैन्य सलाहकार Mohsen Rezaei भी अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे चुके हैं। रजाई का कहना है कि यदि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो अमेरिकी जहाजों और सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अब यह देखना बाकी है कि सऊदी अरब का यह गठबंधन और अमेरिकी राजनीति किस दिशा में रुख मोड़ती है।


























































