बड़ी बढ़ोत्तरी: बसपा सुप्रीमो मायावती ने कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में शुक्रवार को हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि 19 किलोग्राम के सिलेंडर पर सीधे 993 रुपये बढ़ा दिए गए हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि के रूप में दर्ज हुई है। मायावती का मानना है कि इस प्रकार की वृद्धि से बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ेगा और आम नागरिकों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा।
महंगाई का संकट: मायावती ने आशंका जताई है कि कमर्शियल गैस के महंगे होने के बाद अब घरेलू रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि जनता इस महंगाई से पहले से ही त्रस्त है और पेट्रोलियम पदार्थों में फिर से होने वाली वृद्धि उनके लिए बड़ा संकट साबित होगी। लोगों में व्याप्त इस बेचैनी को दूर करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
आर्थिक बोझ: बसपा प्रमुख के अनुसार, राजधानी Delhi में नई कीमतों के प्रभावी होने के बाद कमर्शियल गैस सिलेंडर अब 3,000 रुपये से भी अधिक महंगा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कमर्शियल सिलेंडर की कमी भी देखी जा रही है, और इस बीच कीमतों में हुई एकमुश्त वृद्धि ने जनजीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। यह वृद्धि सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा देने वाली है।
सरकारी नियंत्रण: मायावती ने सरकार को याद दिलाया कि हाल ही में हुए राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित रखा गया था। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव के समय कीमतों को स्थिर रखना संभव था, तो वर्तमान में भी जनकल्याण के तहत उसी नीति को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि वे चुनावी लाभ से ऊपर उठकर व्यापक जनहित में तेल और गैस की कीमतों को स्थिर रखें।
अंतरराष्ट्रीय तनाव: कीमतों में इस बदलाव के पीछे के कारणों का उल्लेख करते हुए मायावती ने कहा कि चाहे America-Israel और Iran के बीच युद्ध की स्थिति हो या अन्य कोई वैश्विक वजह, इसका सीधा नुकसान भारतीय नागरिकों को नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही उठापटक का बहाना बनाकर घरेलू कीमतों में वृद्धि करना गरीब जनता के साथ अन्याय होगा और सरकार को इसे रोकना चाहिए।
नीतिगत आकलन: अपने वक्तव्य के समापन में मायावती ने सरकार को सलाह दी कि कोई भी नीति बनाने से पहले उसका मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ने वाले असर का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि महंगाई से जूझ रहे लोगों की कमर तोड़ देगी। इसलिए, सरकार को जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर लगाम लगानी चाहिए।

























































