पचदेवरा पुल के पास पटरियों पर फैला मौत का तांडव प्रयागराज के करछना इलाके में बुधवार की शाम काल बनकर आई दो ट्रेनों ने पांच जिंदगियों को सदा के लिए शांत कर दिया। पचदेवरा ओवरब्रिज के पास हुए इस खौफनाक मंजर ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह हादसा यमुना नगर के पास उस समय हुआ जब रेल की पटरियों पर खड़े लोग अपनी जान की परवाह किए बिना स्थिति को देखने के लिए नीचे उतर आए थे। इस रेल त्रासदी की सूचना मिलते ही भारी संख्या में लोग और पुलिस बल मौके पर एकत्रित हो गए। शवों के क्षत-विक्षत होने के कारण शुरुआत में पहचान करना काफी कठिन साबित हो रहा था।
कालका एक्सप्रेस के रुकने से पैदा हुई भ्रम की स्थिति हादसे की कड़ियाँ जोड़ते हुए जीआरपी अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले एक व्यक्ति कालका एक्सप्रेस की चपेट में आया था। इस दुर्घटना के बाद चालक ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन को पचदेवरा ओवरब्रिज के पास ही रोक दिया। ट्रेन के अचानक रुकने से यात्रियों के मन में कौतूहल पैदा हुआ और वे यह देखने के लिए डिब्बों से बाहर निकल आए कि आखिर हुआ क्या है। बहुत से यात्री बगल वाले ट्रैक पर खड़े होकर कालका एक्सप्रेस के नीचे दबे व्यक्ति को देख रहे थे, जो कि अंततः उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
तेज रफ्तार पुरुषोत्तम एक्सप्रेस ने मचाई तबाही दुर्भाग्यवश, जिस समय यात्री पटरियों के पास खड़े होकर चर्चा कर रहे थे, ठीक उसी समय पुरुषोत्तम एक्सप्रेस वहां से गुजरी। ट्रेन की गति बहुत अधिक थी और शाम के धुंधलके में यात्री उसे देख नहीं पाए। बिना किसी चेतावनी के आई इस ट्रेन ने ट्रैक पर खड़े चार लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर के कारण चारों व्यक्तियों के शरीर के परखच्चे उड़ गए और उनकी तत्काल मौत हो गई। इस प्रकार, एक छोटे हादसे की जांच के दौरान हुई लापरवाही ने एक बड़े नरसंहार का रूप ले लिया और कुल पांच लोगों की जान चली गई।
बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासी थे मृतक पुलिस प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, अब तक तीन मृतकों की पहचान हो चुकी है। इनमें से एक मृतक बिहार राज्य के सिवान का निवासी बलिराम (उम्र 36 वर्ष) था। अन्य दो मृतक उत्तर प्रदेश के ही विभिन्न जिलों के थे, जिनमें मिर्जापुर के सुनील कुमार (उम्र 24 वर्ष) और फिरोजाबाद का रहने वाला किशोर आकाश (उम्र 17 वर्ष) शामिल है। पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने कहा कि अन्य दो अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए आसपास के जिलों और बिहार पुलिस से भी संपर्क साधा जा रहा है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि हो सके।
कानूनी प्रक्रिया और शवों का पंचनामा पुलिस ने सभी पांचों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। करछना के सहायक पुलिस आयुक्त सुनील कुमार ने बताया कि रेलवे ट्रैक पर बिखरे अवशेषों को समेटने और पहचान के निशान ढूंढने में काफी समय लगा। रेल प्रशासन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं कि आखिर ट्रेन रुकने के बाद यात्रियों को ट्रैक पर उतरने से क्यों नहीं रोका गया। घटनास्थल पर अभी भी भारी पुलिस बल तैनात है और परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा है ताकि पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंपे जा सकें।
शासन-प्रशासन की सक्रियता और सहायता की घोषणा प्रयागराज की इस घटना पर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहयोग प्रदान करें। उन्होंने रेलवे और स्थानीय प्रशासन को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने का सुझाव भी दिया है। स्थानीय प्रशासन अब मृतकों के आश्रितों को सरकारी सहायता दिलवाने की कागजी कार्यवाही में जुट गया है।





































