उत्तर प्रदेश विधान परिषद में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का MLC चुनाव राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बेहद खास और विशिष्ट चुनावी प्रक्रिया है। इस अनूठी लोकतांत्रिक प्रणाली के माध्यम से राज्य के पंजीकृत शिक्षित नागरिक यानी स्नातक और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक अपने पसंदीदा प्रतिनिधियों को चुनते हैं। इन निर्वाचित प्रतिनिधियों को चुनकर प्रदेश के उच्च सदन यानी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रबुद्ध वर्ग की आवाज उठाने के लिए भेजा जाता है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 100 सीटों में से 8 सीटें विशेष रूप से शिक्षक कोटे के MLC के लिए आरक्षित की गई हैं। इसके साथ ही इतनी ही यानी 8 सीटें स्नातक कोटे के MLC के लिए भी संवैधानिक रूप से आरक्षित रखी गई हैं।
मतदाता बनने के नियम
इस विशिष्ट कोटे के चुनाव में देश के आम चुनावों की तरह आम जनता सीधे तौर पर अपने मताधिकार का प्रयोग या वोट नहीं करती है। इस चुनाव की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने और वोटर बनने के लिए एक आम नागरिक को कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। नियमों के अनुसार मतदाता बनने के लिए नागरिक को आवेदन करने की निर्धारित तारीख से कम से कम 3 साल पहले अनिवार्य रूप से स्नातक होना चाहिए। इसके अलावा यदि आवेदक के पास स्नातक की डिग्री नहीं है, तो उसके पास इसके समकक्ष कोई अन्य उच्च शैक्षणिक डिग्री होना बेहद जरूरी माना गया है। इन सभी शैक्षिक दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही चुनाव आयोग द्वारा उन्हें वोट डालने का अधिकार दिया जाता है।
बीजेपी की पहली सूची
इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश में होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के आगामी MLC चुनाव 2026 के लिए सत्तारूढ़ दल BJP ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने गहन विचार-विमर्श के बाद कुल 5 महत्वपूर्ण सीटों पर अपने फाइनल उम्मीदवारों के नामों की सूची सार्वजनिक रूप से जारी कर दी है। इस घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश की स्थानीय राजनीति में अचानक गरमाहट आ गई है और कयासों का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी ने इस चुनाव को बेहद गंभीरता से लेते हुए अपने संगठन के जमीनी स्तर के नेताओं को इस बार मैदान में उतारने का फैसला किया है।
सीटों के अनुसार प्रत्याशी
बीजेपी की आधिकारिक सूची के अनुसार लखनऊ स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह को पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। वहीं दूसरी तरफ प्रबुद्ध वर्ग के प्रभाव वाली आगरा स्नातक सीट से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर पार्टी की केंद्रीय समिति ने अपनी सहमति दी है। शिक्षक कोटे की सीटों की बात करें तो बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को बीजेपी ने अपना अधिकृत टिकट दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने लखनऊ शिक्षक सीट से एक बार फिर उमेश द्विवेदी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी की अहम मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा को BJP ने अपना प्रत्याशी बनाया है।
चयन के मुख्य आधार
पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार इस बार उम्मीदवारों के चयन में किसी भी प्रकार की सिफारिश के बजाय योग्यता और जमीनी पकड़ को ही एकमात्र आधार बनाया गया था। उम्मीदवारों के अंतिम चुनाव में उनकी अपने-अपने संबंधित क्षेत्र में पकड़, पुराना संगठनात्मक कार्य अनुभव और स्थानीय शिक्षकों एवं स्नातकों के बीच उनके व्यक्तिगत प्रभाव को खासा महत्व दिया गया है। BJP इन द्विवार्षिक MLC चुनाव 2026 में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की एक बेहद आक्रामक और वैज्ञानिक स्ट्रैटेजी को लेकर काम कर रही है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने राज्य के प्रबुद्ध वर्ग को अपनी नीतियों से अवगत कराने के लिए विशेष संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है।
दिसंबर में समाप्त होगा कार्यकाल
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर सूबे के सभी सियासी दल इस समय पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इन विशिष्ट सीटों पर प्रतिनिधित्व कर रहे मौजूदा विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल इसी साल दिसंबर महीने में पूरी तरह खत्म हो रहा है। इसी कारण सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं और माना जा रहा है कि अन्य दल भी जल्द अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेंगे। वर्तमान में बीजेपी ने गाजियाबाद सीट को छोड़कर बाकी सभी 5 सीटों पर अपने पत्ते खोल दिए हैं। हालांकि इस संवेदनशील MLC चुनाव को लेकर अभी भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदान की वास्तविक तारीखों का ऐलान किया जाना बाकी है।





































