समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में बिजली संकट के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले दस साल में यूपी के बिजली विभाग को बर्बाद करने का काम किया है। सपा अध्यक्ष के अनुसार भाजपा के कुशासन के चलते आज जनता भीषण बिजली संकट का सामना करने के लिए मजबूर है। अखिलेश का कहना है कि आगामी चुनाव में जनता भाजपा को करारा जवाब देकर सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। इस बयान के साथ ही सपा ने बिजली के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विभाग की कार्यप्रणाली अखिलेश यादव ने सरकार की समीक्षा बैठकों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री की कार्यशैली को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने पूछा कि क्या बिजली मंत्री समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होते हैं या उन्हें जानबूझकर बुलाया नहीं जाता है। सपा मुखिया ने सीएम से अनुरोध किया कि यदि सब ठीक है तो बिजली मंत्री के साथ एक तस्वीर साझा करें। उनका मानना है कि सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच आपसी सामंजस्य का पूरी तरह अभाव है। इस प्रकार की अव्यवस्था ही प्रदेश में बिजली संकट का मुख्य कारण बनी हुई है, ऐसा सपा का आरोप है।
उपलब्धियों का दावा भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सपा के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों को विस्तार से जनता के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि 31 हजार मेगावाट की सप्लाई पीक टाइम में दी जा रही है, जो सपा के 13 हजार मेगावाट से कहीं अधिक है। सपा शासनकाल में उपभोक्ताओं की संख्या केवल 1 करोड़ 81 लाख थी, जो अब बढ़कर 3 करोड़ 70 लाख हो गई है। भाजपा प्रवक्ता का दावा है कि पहले की तरह वीआईपी संस्कृति नहीं है और अब हर गांव को समान बिजली मिल रही है। इन आंकड़ों के माध्यम से भाजपा ने सपा के शासनकाल की तुलना में अपनी व्यवस्था को बेहतर बताया है।
सीएम का पुराना तंज योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर सपा को आड़े हाथों लेते हुए पुराने समय के हालातों की याद दिलाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा शासन में बिजली के तारों पर कपड़े सुखाए जाते थे क्योंकि उनमें कभी करंट आता ही नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं बिजली की स्थिति पर नजर रख रहे हैं ताकि जनता को परेशानी न हो। भाजपा लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनके कार्यकाल में बिजली क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। सीएम का यह बयान सपा के उन दावों को खोखला बताने के लिए है, जिनमें बिजली सुधार की बात कही जाती है।
जनता की परेशानी उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के मौसम के बीच बिजली कटौती से आम जनता का हाल फिलहाल काफी बेहाल बना हुआ है। बिजली संकट अब प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभर गया है, जिसका असर दिखाई दे रहा है। 2027 के चुनाव से पहले विपक्ष सरकार की इस कमजोरी को भुनाने के लिए बिजली के मुद्दे पर आक्रामक है। सीएम भले ही बैठकें कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बिजली न मिलने से जनता परेशान हो रही है। इस समस्या के कारण आम आदमी का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और रोष बढ़ रहा है।
सियासी भविष्य का प्रश्न आने वाला समय ही यह बताएगा कि क्या बिजली विभाग वास्तव में जनता की इस समस्या को दूर कर पाने में सफल हो पाएगा। बिजली की राजनीति अब बयानों के करंट तक ही सीमित होकर रह गई है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में यह मुद्दा सरकार के लिए काफी भारी पड़ सकता है। सरकार के लिए चुनौती है कि वह अपने दावों को धरातल पर साबित करे ताकि जनता को राहत मिल सके। देखना होगा कि इस सियासी जंग का अंत अंततः किसके पक्ष में जाता है और किसे लाभ मिलता है।

























































