न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का इंग्लैंड में दुखद निधन हो गया है। उन्होंने अपने जीवन के 94वें जन्मदिन के अवसर पर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहा। ब्लेयर सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि वे खेल में असीम साहस और अद्भुत भावना की मिसाल थे। उनके इस दुखद निधन पर न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपनी गहरी संवेदना और शोक व्यक्त किया है। उनकी याद में इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट के पहले दिन टीम काली पट्टी बांधकर उतरेगी।
शानदार क्रिकेट करियर बॉब ब्लेयर ने वर्ष 1952 से लेकर 1964 के बीच न्यूजीलैंड के लिए कुल 19 महत्वपूर्ण टेस्ट मैच खेले थे। इन अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने अपनी बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर 43 विकेट अपने नाम किए थे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड बहुत ही अधिक शानदार और प्रभावशाली रहा था। उन्होंने अपने करियर के 59 फर्स्ट क्लास मैचों में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 330 विकेट चटकाए थे। वर्ष 1956-57 के सीजन में उन्होंने महज 9 की औसत से 46 विकेट हासिल कर और दो बार एक पारी में 9 विकेट लेकर इतिहास रचा था।
जिंदगी का सबसे बड़ा दुख क्रिकेट के इतिहास में बॉब ब्लेयर को उनके असाधारण प्रदर्शन के साथ-साथ उनके अद्भुत साहस के लिए हमेशा याद किया जाता है। वर्ष 1953 के साउथ अफ्रीका दौरे पर एलिस पार्क में खेलते समय एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। इस मैच के दूसरे दिन की सुबह उन्हें अपनी मंगेतर नेरिसा लव के दुखद निधन की मनहूस खबर मिली थी। उनकी मंगेतर क्रिसमस ईव पर हुए उस भीषण टांगीवाई रेल हादसे का शिकार हो गई थीं जिसमें 151 लोगों की जान गई थी। इस भयानक त्रासदी के बीच होटल में शोक मनाने के बावजूद जब टीम मुश्किल में थी, तब उन्होंने मैदान पर लौटने का साहसिक फैसला किया।
भावुक कर देने वाला पल एलिस पार्क स्टेडियम में मौजूद 23 हजार दर्शक उस समय पूरी तरह स्तब्ध रह गए जब ब्लेयर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे। उस समय पिच के दूसरे छोर पर बर्ट सटक्लिफ मौजूद थे, जो गेंद लगने के कारण अस्पताल से इलाज करवाकर वापस लौटे थे। इन दोनों महान खिलाड़ियों ने मिलकर अपनी टीम के आखिरी विकेट के लिए 33 बहुमूल्य रन जोड़े थे। इसी यादगार साझेदारी के दौरान टेस्ट क्रिकेट के एक ओवर में 25 रन बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बन गया था। जब ब्लेयर आउट होकर पवेलियन लौटने लगे तो पूरा स्टेडियम उनके सम्मान में खड़ा हो गया और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया गया।
विशेष ट्रॉफी की शुरुआत बॉब ब्लेयर और उस टांगीवाई रेल हादसे की दर्दनाक कहानी ने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के क्रिकेट जगत को गहरे तक प्रभावित किया था। इसी प्रभाव के कारण वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए एक विशेष टांगीवाई शील्ड की शुरुआत की गई। इस ऐतिहासिक ट्रॉफी को न्यूजीलैंड की पारंपरिक लकड़ी और टांगीवाई क्षेत्र में मिलने वाले एक विशेष पत्थर से खास तौर पर तैयार किया गया था। इस खास शील्ड के माध्यम से उस दर्दनाक घटना और ब्लेयर के महान त्याग को दोनों देशों द्वारा सम्मान दिया गया। महान गेंदबाज ब्लेयर उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच का हिस्सा रहने वाले आखिरी जीवित न्यूजीलैंड खिलाड़ी बचे थे।
खेल के प्रति गहरा समर्पण वर्ष 1953 के उस दर्दनाक दौरे के बाद भी बॉब ब्लेयर ने करीब एक दशक तक न्यूजीलैंड का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी टेस्ट मैच वर्ष 1964 में साउथ अफ्रीका के ही खिलाफ खेला था। अपने इस अंतिम मुकाबले में उन्होंने सात विकेट चटकाकर अपने पूरे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सबको चौंका दिया था। उम्र बढ़ने के बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका यह अटूट प्रेम कभी भी कम नहीं हुआ और वे 60 साल की उम्र तक मैदान पर खेलते रहे। संन्यास लेने के बाद उन्होंने इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे, नॉर्दर्न आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में क्रिकेट कोचिंग देने का काम भी किया।





































