राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने अपने आरोप पत्र में हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। जांच से यह साबित हो गया है कि इस हमले की पूरी रूपरेखा सीमा पार से तैयार की गई थी। इस खौफनाक साजिश में कुख्यात आतंकी सरगना की सबसे अहम भूमिका रही है। इसी वजह से जांच एजेंसी ने उसे इस पूरे नरसंहार का मुख्य मास्टरमाइंड घोषित किया है। अब उसके खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाते हुए गैर-जमानती वारंट भी जारी करवा लिया गया है।
पर्यटकों का हुआ था कत्लेआम आतंकवादियों ने बाइस अप्रैल दो हजार पच्चीस को इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था। इस आतंकी घटना में छब्बीस बेगुनाह नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मरने वाले इन छब्बीस लोगों में से ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों से आए पर्यटक थे। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि आतंकियों ने निर्दोष लोगों से उनका धर्म पूछा और फिर उन्हें गोलियों से भून दिया। इस अमानवीय कृत्य ने पूरे देश को गहरे सदमे और भयानक गुस्से में डाल दिया था।
देशभर में फैला आक्रोश निर्दोष पर्यटकों की इस निर्मम हत्या के बाद पूरे देश में आक्रोश की एक बड़ी लहर दौड़ गई थी। देश का हर नागरिक आतंकवादियों के खिलाफ सबसे सख्त और निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहा था। जनता के इसी भारी दबाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के कारण सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। इस आतंकी घटना के सीधे जवाब में देश की सेना ने एक बहुत बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऐतिहासिक और आक्रामक जवाबी सैन्य अभियान को ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया था।
ऑपरेशन सिंदूर का कहर इस सैन्य अभियान के तहत दुश्मन देश को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। भारतीय सेनाओं ने सीमा पार जाकर आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों पर जोरदार प्रहार किया था। इस शक्तिशाली कार्रवाई में पड़ोसी देश और वहां के कब्जे वाले हिस्से में मौजूद आतंकी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। सेना के इस अचूक प्रहार से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े गढ़ पूरी तरह से खाक हो गए थे। कुल मिलाकर आतंकवादियों के नौ प्रमुख और बड़े ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया गया था।
सैन्य ठिकानों की तबाही इस ऑपरेशन में सिर्फ आतंकी कैंपों को ही निशाना नहीं बनाया गया था। भारतीय सेना ने आतंकवादियों को पनाह देने वाली पाकिस्तानी सेना के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया था। सेना की इस अचूक और विनाशकारी बमबारी में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकाने भी बर्बाद हो गए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस जवाबी हमले में पाकिस्तान के दर्जनभर एयरबेस पूरी तरह से तबाह कर दिए गए थे। यह भारत की तरफ से अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी सैन्य कार्रवाइयों में से एक थी।
कानूनी लड़ाई है जारी सैन्य कार्रवाई के बाद अब आतंकवादियों के खिलाफ देश के भीतर कानूनी लड़ाई भी अपने अंतिम चरण में है। जांच एजेंसी लगातार उन सभी आरोपियों पर शिकंजा कस रही है जो इस खूनी साजिश में शामिल थे। सुलेमान, जिब्रान और हमजा अफगानी जैसे आतंकियों को पहले ही आरोपी बनाया जा चुका है। इसके साथ ही बशीर और परवेज जैसे स्थानीय मददगारों पर भी कानूनी शिंकजा कस दिया गया है। अब नए कानूनों का इस्तेमाल करके मुख्य आका को भी भगोड़ा घोषित करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।


























































