Delhi-NCR में एक बार फिर स्वाइन फ्लू का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। जहां पिछले साल 229 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं इस सीजन में अभी तक 14 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। मामूली बुखार और वायरल जैसे लक्षणों वाला यह फ्लू बेहद खतरनाक हो सकता है। फरीदाबाद के Amrita Hospital में पल्मोनोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर Arjun Khanna के अनुसार, यह आंकड़े चेतावनी हैं कि इन्फ्लूएंजा तेजी से फैल रहा है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इस दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए।
गंभीर जटिलताएं: H1N1 यानी स्वाइन फ्लू को लोग अक्सर एक सामान्य फ्लू वायरस मानकर खारिज करने की भूल कर देते हैं। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले स्वस्थ लोग बिना किसी जटिलता के इससे ठीक हो जाते हैं, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण काफी गंभीर हो सकता है। यह वायरस फेफड़ों में पहुंचकर वायरल निमोनिया का कारण बन सकता है और अस्थमा व सीओपीडी जैसी सांस की बीमारियों को बढ़ा सकता है। इसके अलावा यह हार्ट पर तनाव बढ़ाता है, जिससे मरीज को अस्पताल या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है।
प्रमुख लक्षण: स्वाइन फ्लू की शुरुआत में साधारण बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो बहुत जल्दी गंभीर रूप ले सकते हैं। इसके लक्षण अन्य मौसमी संक्रमणों से काफी मिलते-जुलते होते हैं। तेज बुखार, खांसी, शरीर में दर्द, थकान और गले में खराश जैसे लक्षण Covid-19 और Dengue में भी देखने को मिलते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। हालांकि सांस में तकलीफ, सीने में दर्द और ऑक्सीजन स्तर घटने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गलत इलाज: स्वाइन फ्लू के इलाज को लेकर सबसे बड़ी चिंता मरीजों द्वारा एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक उपयोग करना है। डॉक्टर Arjun Khanna के अनुसार, H1N1 एक वायरल संक्रमण है, जिसके खिलाफ एंटीबायोटिक्स दवाएं बिल्कुल भी प्रभावी नहीं होती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से इन्फ्लूएंजा का इलाज नहीं होता, बल्कि इससे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है। इस वायरस से पीड़ित मरीजों को केवल विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा बताई गई उचित एंटीवायरल दवाओं और देखभाल की ही जरूरत होती है।
बचाव उपाय: स्वाइन फ्लू से बचाव और रोकथाम के लिए सालाना इन्फ्लूएंजा टीकाकरण कराना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। वैक्सीन लगवाने से गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा नियमित रूप से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना और लक्षण दिखने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना जरूरी है। यदि घर में कोई व्यक्ति अस्वस्थ है, तो उसके आसपास मास्क पहनना चाहिए। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
वायरस इतिहास: H1N1 वायरस, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है, पहली बार साल 2009 में दुनिया के सामने आया था। इस वायरस का पहला मामला Mexico के Veracruz इलाके में दर्ज किया गया था। इसके बाद उसी साल अप्रैल महीने में America के California राज्य में भी इसके नए मरीज पाए गए थे। चूंकि इस संक्रमण का शुरुआती स्रोत और जुड़ाव सूअरों से था, इसलिए इस बीमारी का नाम स्वाइन फ्लू रख दिया गया था। तब से यह वायरस हर साल सीजनल फ्लू के रूप में सामने आता है।













































