अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर चल रही बातचीत पूरी तरह से टूट चुकी है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए तय की गई 60 दिनों की अवधि अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। इस समय सीमा को आगे बढ़ाने को लेकर कोई सहमति बनती नहीं दिख रही है। दोनों पक्ष आज भी एक-दूसरे से उतने ही दूर हैं जितने वे शुरुआत में थे। भले ही हाल तक संदेशों का आदान-प्रदान हुआ हो, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सभी तरह की वार्ताएं पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं।
कड़े आर्थिक अभियान की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि वे ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ईरान को समझौते का पूरा अवसर दिया, जिसे उसने गंवा दिया। अब अमेरिका किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई का ऐलान कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो भी देश, व्यापारिक संस्थान या बैंक ईरान के साथ व्यापार करेंगे या उसकी मदद करेंगे, उन्हें बेहद गंभीर और बुरे आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
ईरान के नुकसान का दावा ट्रंप ने दावा किया कि लगातार दबाव और कार्रवाइयों के कारण ईरान अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर खड़ा है। उन्होंने लिखा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह से तबाह और बर्बाद हो चुकी हैं। इसके अलावा उनकी मिलिट्री फैक्ट्रियां मलबे का ढेर बन गई हैं और उनकी राष्ट्रीय मुद्रा पूरी तरह बेकार हो चुकी है। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश अपने एयरपोर्ट, बिजनेस या वित्तीय संस्थानों को ईरान की मदद की इजाजत देगा, वह अमेरिका की तरफ से दी जाने वाली बेहद कठोर आर्थिक सजा के लिए खुद जिम्मेदार होगा।
इकोनॉमिक D-Day का कड़ा संदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सभी वैश्विक साझेदारों और सहयोगियों से ईरान के खिलाफ इस आर्थिक युद्ध में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने तेल तस्करी, स्वैप लाइन, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस, जहाजों की रजिस्ट्री और फ्रंट कंपनियों को तुरंत बंद करने की मांग की। ट्रंप ने इसे ‘इकोनॉमिक D-Day’ का नाम दिया और कहा कि ईरान के खतरे को खत्म करने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने आश्वस्त किया कि ये ऐतिहासिक कदम आतंकवाद फैलाने की क्षमता को पंगु बना देंगे और ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने देंगे।
ओमान और समुद्री मार्ग का संकट सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर ईरान ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है। ईरान का कहना है कि वह खाड़ी देश ओमान के साथ मिलकर इस मार्ग को प्रबंधित करने की योजना बना रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बिना शर्त पूरी तरह खुलवाना चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ओमान को धमकी दी है और सोशल मीडिया पर यह संकेत दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका का नया क्षेत्र बन सकता है। इससे इस पूरे जलमार्ग पर सैन्य और कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है।
घरेलू राजनीति और बेसेंट का बयान ट्रंप द्वारा यह नया आर्थिक अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है जब इस युद्ध को छह महीने का समय बीत चुका है। फिलहाल कोई भी सैन्य या कूटनीतिक समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। नवंबर के अमेरिकी चुनावों के पास आते ही ट्रंप को देश के भीतर ही कड़ी राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप का यह बयान ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के उस बयान के एक हफ्ते बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान को अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक रूप से अलग-थलग कर देगा।
















































