लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के विशेषज्ञों ने एक अत्यंत असामान्य और चुनौतीपूर्ण मामले में मरीज के सीने में लंबे समय से फंसे ड्रिल बिट (विदेशी वस्तु) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे वर्षों से हो रहे सीने के दर्द से राहत दिलाई।
कुशीनगर निवासी मरीज को वर्ष 2014 में सड़क दुर्घटना के दौरान दाहिनी बांह की हड्डी (ह्यूमरस) में फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद वर्ष 2015 में उसका उपचार किया गया। मरीज को दाहिनी बांह की हड्डी से संबंधित उपचार और ऑपरेशन से कई बार गुजरना पड़ा।
उपचार के दौरान इस्तेमाल किया गया ड्रिल बिट करीब 11 वर्षों तक मरीज के सीने में मौजूद रहा, जिसकी जानकारी लंबे समय तक नहीं हो सकी। इस दौरान मरीज सामान्य जीवन जीता रहा, लेकिन उसे लगातार सीने में दर्द की शिकायत बनी रही। आखिरकार वह एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, SGPGI पहुंचा। जांच के दौरान चिकित्सकों को सीने में मौजूद इस विदेशी वस्तु का पता चला।
मामला इसलिए बेहद जटिल था क्योंकि ड्रिल बिट लंबे समय से शरीर के अंदर मौजूद था। विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच और बहु-विषयक टीम की सावधानीपूर्वक योजना के बाद इसे सफलतापूर्वक निकाल दिया।
इस जटिल उपचार को प्रो. अमित कुमार सिंह (ट्रॉमा सर्जरी), डॉ. अमित कुमार (एडिशनल प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. आदित्य, डॉ. वरुण गुप्ता (सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी) तथा डॉ. वंश (एडिशनल प्रोफेसर, एनेस्थीसिया) की टीम ने अंजाम दिया।
चिकित्सकों के अनुसार, यह मामला दर्शाता है कि पुराने और जटिल ट्रॉमा मामलों में विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और विभिन्न विभागों के समन्वय से चुनौतीपूर्ण स्थितियों का भी सफल उपचार संभव है। ड्रिल बिट निकाले जाने के बाद मरीज को लंबे समय से हो रहे सीने के दर्द से राहत मिली।











































