प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीमों ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद मोहम्मद नदीमुल हक पर शिकंजा कसा। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने सांसद से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ पहुंचकर छापेमारी और तलाशी की प्रक्रिया शुरू की है। यह तलाशी कोलकाता में सांसद के स्वामित्व वाले उर्दू समाचार पत्र ‘अखबार-ए-मशरिक’ के दफ्तर और उनके व्यक्तिगत आवास पर जारी है। इसके साथ-साथ देश की राजधानी दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर भी केंद्रीय जांच दल पूरी मुस्तैदी से छानबीन में लगा है। बताते चलें कि सांसद का यह दिल्ली वाला सरकारी आवास टीएमसी पार्टी के दफ्तर के रूप में भी अस्थायी तौर पर प्रयोग किया जाता है।
दरगा रोड स्थित अखबार दफ्तर में तलाशी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पार्क सर्कस के दरगा रोड पर स्थित ‘अखबार-ए-मशरिक’ के दफ्तर में ईडी अधिकारी पहुंचे। राज्यसभा सांसद नदीमुल हक इस बहुचर्चित उर्दू समाचार पत्र के निदेशक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इससे जुड़े रहे हैं। छापेमारी के दौरान दफ्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की टुकड़ियों ने पूरे परिसर को घेर रखा है। जांच की गोपनीयता और सुरक्षा को देखते हुए कार्यालय का मुख्य गेट पूरी तरह बंद करके आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। इस कार्रवाई के कारण तलाशी अभियान जारी रहने तक किसी भी बाहरी व्यक्ति या कर्मचारी को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली है।
आठ शहरों से प्रकाशित होता है अखबार प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच के लिए की जा रही है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से उन वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और दस्तावेजों को खंगाल रही है जिनमें गड़बड़ी के गंभीर आरोप हैं। यह समाचार पत्र कोलकाता के अलावा दिल्ली, रांची, आसनसोल, सिलीगुड़ी, भोपाल, लखनऊ तथा श्रीनगर से भी नियमित प्रकाशित किया जाता है। कई राज्यों से जुड़ाव होने के कारण ईडी अखबार के इन सभी अलग-अलग प्रकाशन केंद्रों के वित्तीय रिकॉर्ड्स की भी पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार कोलकाता ईडी की विशेष टीम ने इस मामले के सभी संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ सुनियोजित छापेमारी शुरू की है।
बिधाननगर पुलिस में दर्ज एफआईआर से जुड़ा केस जांच एजेंसी की यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में दर्ज कराई गई एक पुरानी एफआईआर से जुड़ी बताई गई है। पुलिस एफआईआर के तथ्यों का संज्ञान लेते हुए ईडी ने इस मामले में अपनी नई ईसीआर दर्ज की और कानूनी कार्रवाई शुरू की। जांच दल दफ्तर में रखे तमाम कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव, बही-खातों और वित्तीय रसीदों की गहन जांच करके सबूत जुटाने में लगा है। अधिकारियों द्वारा सांसद के अखबार से जुड़े वित्तीय घाटे, मुनाफे और विज्ञापनों से होने वाली आय के ब्योरे भी मांगे जा रहे हैं। अचानक हुई इस छापेमारी के बाद से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों और मीडिया हलकों में चर्चाओं का दौर बेहद गर्म हो चुका है।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद मोहम्मद नदीमुल हक का संबंध अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रसिद्ध सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान विषय में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की थी। संसदीय राजनीति का हिस्सा बनने से पहले नदीमुल हक लंबे समय तक पत्रकारिता, संपादन और स्वतंत्र लेखन के काम में सक्रिय रहे थे। मई 2012 में उन्हें पहली बार तृणमूल कांग्रेस द्वारा राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर संसद के उच्च सदन में भेजा गया था। वर्तमान में वह 2024 से 2030 तक की अवधि वाले अपने तीसरे कार्यकाल के तहत उच्च सदन में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
संसदीय कामकाज और जांच का दायरा अपने तीन बार के लंबे कार्यकाल के दौरान नदीमुल हक संसद की कई अति महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित समितियों के सदस्य भी रहे हैं। वह टीएमसी के लिए कई प्रमुख मुद्दों पर मीडिया और संसद दोनों ही जगहों पर लगातार अपने विचार प्रमुखता से रखते आए हैं। फिलहाल ईडी अधिकारी बिधाननगर पुलिस मामले से जुड़े सभी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए सबूत जुटाने में व्यस्त हैं। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या अखबार के जरिए किसी तरह की वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया। सोमवार सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चलती रही और अधिकारी वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच में लगे रहे।













































