बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सीजेपी के जेन-जी आंदोलन को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिससे स्पष्ट होता है कि युवाओं और बेरोजगारों के इस आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान युवाओं और छात्रों को जो बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, वे अब राजनीति का शिकार हो चुके हैं। आंदोलन अब स्वतंत्र नहीं रह गया है और इसके कारण जेन-जी तथा छात्रों के मन में गंभीर शंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। देश की जनता भी इस राजनीतिक मोड़ को अच्छी तरह समझ रही है।
राज्य इकाइयों को निर्देश: मायावती ने स्पष्ट किया कि बीएसपी की सहानुभूति और चिंता हमेशा से युवाओं की जायज मांगों के साथ रही है। विशेष रूप से जेन-जी और जेन-अल्फा की समस्याओं को लेकर पार्टी बेहद गंभीर है। मायावती ने पार्टी की सभी स्टेट यूनिटों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों और संबंधित क्षेत्रों में अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। अधिकारियों से मिलकर युवाओं और छात्रों की समस्याओं का शांतिपूर्ण और न्यायसंगत तरीके से समाधान कराने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। बीएसपी की राज्य इकाइयों को युवाओं की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने को कहा गया है।
प्रदर्शन से दूर रहने का आदेश: अनुशासन का हवाला देते हुए मायावती ने बीएसपी कार्यकर्ताओं को किसी भी धरना, प्रदर्शन या आंदोलन में भाग न लेने की हिदायत दी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपनी तन, मन और धन की पूरी शक्ति को आगामी चुनावों के लिए बचाकर रखें। पार्टी की ऊर्जा को सड़कों पर व्यर्थ करने के बजाय चुनावी संगठन को मजबूत करने में लगाया जाना चाहिए। डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के सपनों को साकार करने के लिए चुनाव जीतना अत्यंत आवश्यक है। सत्ता के माध्यम से ही ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियां लागू की जा सकती हैं।
पूर्व सरकार के कार्य: अपने बयान में मायावती ने स्मरण कराया कि उत्तर प्रदेश में बीएसपी की चार बार सरकार रही है। उन कार्यकालों में पार्टी ने सर्वसमाज और युवाओं की दुख-तकलीफों का स्थायी समाधान करके दिखाया है। इसलिए कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में लगकर एक बार फिर ऐसी ही जनहितैषी सरकार बनाने का प्रयास करना चाहिए। स्थायी समाधान केवल प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर ही संभव है, जिसे बीएसपी ने अपने पिछले शासनकाल में साबित किया है। चुनावों में सफलता प्राप्त करके ही युवाओं, दलितों और उपेक्षितों के अधिकारों की वास्तविक रक्षा की जा सकती है।
संजय आजाद मामला: जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान घटी घटनाओं का उल्लेख करते हुए मायावती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन समय रहते उचित और प्रभावी कदम उठाता तो संजय आजाद जैसी गंभीर और अप्रिय घटना को आसानी से टाला जा सकता था। पुलिस की समय पर कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ी। मायावती ने इस पूरे प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ तत्काल और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की जोरदार मांग की है ताकि कानून का इकबाल कायम रह सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
प्रशासन को चेतावनी: मायावती ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि संजय आजाद प्रकरण के दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में ढिलाई बरती गई या अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो बीएसपी भी पीछे नहीं रहेगी। पार्टी ऐसे संवेदनशील मामलों में खुलकर सामने आएगी और न्याय के लिए आवाज उठाएगी। प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और अपराधियों को सजा दिलानी चाहिए। युवाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।








































