ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 26 सितंबर 2026 को ग्रहों की स्थिति कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संकेत दे रही है। आज बुध कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं और यहां पहले से शुक्र मौजूद हैं। बुध और शुक्र की इस युति से तुला राशि में लक्ष्मी-नारायण योग बन रहा है। वहीं मीन राशि में चंद्रमा और वक्री शनि की युति से विष योग बन रहा है। दूसरी ओर कर्क राशि में उच्च के बृहस्पति के साथ नीच के मंगल की स्थिति नीचभंग राजयोग को सक्रिय कर रही है। इन तीनों योगों का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित भाव, राशि और ग्रहों की स्थिति के अनुसार इनके शुभ और चुनौतीपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में 26 सितंबर का दिन ग्रहों की चाल और इन तीन विशेष योगों के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रहों के वर्तमान गोचर से जुड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज सूर्य कन्या राशि में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित हैं और 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा मीन राशि में हैं और सुबह 11:31 तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहने के बाद उत्तरभाद्रपद में प्रवेश करेंगे तथा 28 सितंबर को मेष राशि में चले जाएंगे। मंगल कर्क राशि में नीच स्थिति में हैं और 12 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। बुध आज तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं और 2 दिसंबर 2026 तक यहां रहेंगे। गुरु कर्क राशि में उच्च के होकर स्थित हैं तथा 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र तुला राशि में अपनी स्वराशि में हैं और 27 अक्टूबर को वृश्चिक राशि में जाएंगे। शनि मीन राशि में वक्री चाल से चल रहे हैं और मार्च 2027 में मेष राशि में प्रवेश करेंगे। राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में स्थित हैं तथा दोनों वर्ष 2027 में क्रमशः मकर और कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस पूरी ग्रह स्थिति में बुध-शुक्र, चंद्रमा-शनि और गुरु-मंगल की स्थितियां आज के प्रमुख ज्योतिषीय घटनाक्रम का आधार बन रही हैं।
ग्रह गोचर एवं नक्षत्र स्थिति चार्ट—26 सितंबर 2026
| क्रम | ग्रह का नाम | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | आगामी राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | कन्या | उत्तरा फाल्गुनी | 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 2 | चंद्रमा | मीन | पूर्वाभाद्रपद (सुबह 11:31 तक), इसके बाद उत्तरभाद्रपद | प्रत्येक सवा दो दिन में राशि बदलते हैं। 28 सितंबर 2026 को मेष राशि में जाएंगे। |
| 3 | मंगल | कर्क (नीच राशि) | पुष्य | 12 नवंबर 2026 तक कर्क राशि में ही रहेंगे। |
| 4 | बुध | तुला (आज ही प्रवेश) | चित्रा / स्वाति | 26 सितंबर 2026 को कन्या से निकलकर तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं और 2 दिसंबर 2026 तक रहेंगे। |
| 5 | गुरु (बृहस्पति) | कर्क (उच्च राशि) | पुष्य / आश्लेषा | 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 6 | शुक्र | तुला (स्वराशि) | स्वाति / विशाखा | 27 अक्टूबर 2026 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 7 | शनि | मीन (वक्री चाल) | उत्तरभाद्रपद | मार्च 2027 में मेष राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 8 | राहु | कुंभ | शतभिषा | वर्ष 2027 में मकर राशि में प्रवेश करेंगे (हमेशा उल्टी चाल)। |
| 9 | केतु | सिंह | मघा / पूर्वाफाल्गुनी | वर्ष 2027 में कर्क राशि में प्रवेश करेंगे (हमेशा उल्टी चाल)। |
चार्ट के अनुसार ग्रहों की स्थिति: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 26 सितंबर 2026 के इस गोचर चार्ट में सूर्य कन्या राशि में, चंद्रमा और वक्री शनि मीन राशि में, नीच के मंगल और उच्च के गुरु कर्क राशि में, बुध और स्वराशि के शुक्र तुला राशि में, राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में स्थित हैं। इस स्थिति में सबसे प्रमुख परिवर्तन बुध का आज तुला राशि में प्रवेश है, जिसके कारण पहले से तुला में मौजूद शुक्र के साथ उनकी युति बन गई है। इसी तरह मीन राशि में चंद्रमा-शनि की युति विष योग और कर्क राशि में मंगल-गुरु की स्थिति नीचभंग राजयोग का आधार बन रही है। आने वाले दिनों में सूर्य 17 अक्टूबर, शुक्र 27 अक्टूबर, गुरु 31 अक्टूबर और मंगल 12 नवंबर को राशि परिवर्तन करेंगे, जबकि बुध 2 दिसंबर तक तुला में रहेंगे। इसलिए 26 सितंबर की यह ग्रह स्थिति आगे आने वाले कई महत्वपूर्ण गोचर परिवर्तनों की शुरुआत भी कर रही है।
1. बुध-शुक्र से लक्ष्मी-नारायण योग: धन, व्यापार और रिश्तों पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार 26 सितंबर 2026 को बुध अपनी मित्र राशि तुला में प्रवेश कर चुके हैं और यहां पहले से शुक्र विराजमान हैं। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है, जबकि शुक्र धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य, सुख-सुविधा और दांपत्य जीवन के कारक माने जाते हैं। तुला राशि में इन दोनों ग्रहों की युति से लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण हो रहा है। यह योग बुद्धि और आर्थिक समझ के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों, धन, सौंदर्य और वैवाहिक सुख से जुड़े मामलों में प्रभाव डाल सकता है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा बेहद शुभ
मेष राशि: वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह योग मेष राशि के सप्तम भाव में बन रहा है। इससे जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आने के संकेत हैं। व्यापार और साझेदारी से जुड़े लोगों के लिए कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान बढ़ने की संभावना भी बताई गई है।
मिथुन राशि: यह योग आपके पंचम भाव में बन रहा है और बुध आपके राशि स्वामी हैं। शिक्षा और बुद्धि से जुड़े मामलों में समय अनुकूल रह सकता है। विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिल सकता है। प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ने के साथ आकस्मिक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं।
सिंह राशि: तृतीय भाव में लक्ष्मी-नारायण योग बनने से आपकी वाणी और संवाद क्षमता प्रभावशाली रहेगी। बातचीत के माध्यम से अटके हुए काम पूरे कराने में सफलता मिल सकती है। छोटे भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और छोटी दूरी की यात्राएं लाभदायक रह सकती हैं।
तुला राशि: आपकी ही राशि के प्रथम भाव में यह योग बन रहा है। इससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है और व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा। धन संचय करने की क्षमता बेहतर होगी, हालांकि सुख-सुविधाओं और भौतिक वस्तुओं पर खर्च बढ़ने के संकेत भी हैं।
धनु राशि: एकादश भाव में बनने वाला यह योग आय और लाभ के नए अवसर खोल सकता है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। बड़े भाई-बहनों तथा वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग प्राप्त हो सकता है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा चुनौतीपूर्ण
कर्क राशि: चतुर्थ भाव में यह योग सुख-सुविधाओं में वृद्धि कर सकता है, लेकिन माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। घर में उपकरणों या अन्य घरेलू आवश्यकताओं पर अचानक खर्च होने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
वृश्चिक राशि: द्वादश भाव में बनने वाली इस युति से सुख-सुविधाओं और विलासिता की वस्तुओं पर खर्च बढ़ सकता है। बजट प्रभावित होने की आशंका है। कानूनी मामलों में अतिरिक्त सावधानी रखने की आवश्यकता बताई गई है।
मीन राशि: अष्टम भाव में यह योग बनने से गुप्त शत्रुओं से परेशानी बढ़ सकती है। त्वचा या पेट से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, क्योंकि असावधानी से विवाद की स्थिति बन सकती है।
लक्ष्मी-नारायण योग के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ प्रभाव वाली राशियों के जातक बुधवार को छोटी कन्याओं को हरी मिठाइयां या मिश्री बांट सकते हैं और शुक्रवार को माता लक्ष्मी को गुलाब का इत्र अर्पित कर सकते हैं। चुनौतीपूर्ण प्रभाव वाली राशियों के लिए प्रतिदिन अरगला स्तोत्र या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने, बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने और अपने पास चांदी का सिक्का रखने का उपाय बताया गया है।
2. मीन राशि में चंद्रमा-शनि से विष योग: मानसिक तनाव और कार्यों में देरी का संकेत
वैदिक ज्योतिष के अनुसार 26 सितंबर 2026 को चंद्रमा और शनि मीन राशि में एक साथ स्थित हैं। चंद्रमा मन और भावनाओं के कारक माने जाते हैं, जबकि शनि अनुशासन और कर्म से संबंधित ग्रह हैं। दोनों की युति से विष योग बन रहा है। इसके प्रभाव से मानसिक तनाव, भ्रम, उदासी और कार्यों में देरी जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि जिन राशियों के लिए यह योग अनुकूल भाव में बन रहा है, उनके लिए यही स्थिति अनुशासन, व्यावहारिकता और आत्मबल बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
विष योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ
वृषभ राशि: एकादश भाव में विष योग बनने के कारण मानसिक गंभीरता बढ़ सकती है, लेकिन आर्थिक स्तर पर नुकसान के संकेत नहीं हैं। शनि के योगकारक होने के कारण अनुशासन के साथ लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
कन्या राशि: सप्तम भाव में चंद्रमा-शनि की युति व्यापारिक मामलों में व्यावहारिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ा सकती है। साझेदारी के कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना लाभदायक रहेगा और इससे संभावित नुकसान से बचने में सहायता मिल सकती है।
मकर राशि: तृतीय भाव में विष योग बन रहा है और शनि आपके राशि स्वामी हैं। कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की क्षमता बढ़ेगी। आत्मबल मजबूत होगा और कार्यक्षेत्र में लगातार मेहनत का परिणाम मिलने के संकेत हैं।
विष योग—इन राशियों के लिए रहेगा बेहद चुनौतीपूर्ण
मिथुन राशि: दशम भाव में विष योग बनने से कार्यस्थल पर राजनीति और अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद की स्थिति बन सकती है। काम का बढ़ता दबाव मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है।
कर्क राशि: नवम भाव में चंद्रमा और शनि की युति होने से भाग्य का अपेक्षित साथ मिलने में रुकावट आ सकती है। बनते हुए काम अंतिम समय पर अटक सकते हैं। अनजाना डर और उदासी मन को प्रभावित कर सकती है।
वृश्चिक राशि: पंचम भाव में विष योग बनने से संतान संबंधी चिंता बढ़ सकती है। विद्यार्थियों का पढ़ाई में मन कम लग सकता है और प्रेम संबंधों में गलतफहमियां बढ़ने की संभावना है।
कुंभ राशि: द्वितीय भाव में यह योग बनने से परिवार में मतभेद हो सकते हैं। कटु वाणी संबंधों को प्रभावित कर सकती है और धन हानि के संकेतों को देखते हुए निवेश से बचने की सलाह दी गई है।
मीन राशि: प्रथम भाव में स्वयं विष योग बनने के कारण इसका प्रभाव सबसे अधिक महसूस हो सकता है। सिरदर्द, अनिद्रा और नकारात्मक विचार परेशान कर सकते हैं। आज बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी गई है।
विष योग के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ प्रभाव वाली राशियों के जातक शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं। चुनौतीपूर्ण प्रभाव वाली राशियों के लिए सोमवार और शनिवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करने, प्रतिदिन ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करने और शनिवार शाम हनुमान चालीसा का पाठ करने का उपाय बताया गया है। रात के समय दूध पीने से बचने की सलाह भी दी गई है।
3. कर्क राशि में गुरु-मंगल से नीचभंग राजयोग: संघर्ष के बाद सफलता के संकेत
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल कर्क राशि में नीच स्थिति में हैं, जबकि बृहस्पति इसी राशि में उच्च के हैं। वर्तमान में दोनों ग्रह कर्क राशि में स्थित हैं। उच्च के गुरु के साथ नीच मंगल की स्थिति से मंगल के नीचत्व का भंग माना जाता है और इसी कारण नीचभंग राजयोग सक्रिय है। यह योग आरंभिक संघर्ष के बाद सफलता, उन्नति और महत्वपूर्ण उपलब्धियों के अवसर देने वाला माना गया है। अलग-अलग राशियों के लिए इसका प्रभाव संबंधित भाव के अनुसार भूमि, संपत्ति, करियर, लाभ, भाग्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।
नीचभंग राजयोग—इन राशियों के लिए रहेगा बेहद शुभ
मेष राशि: चतुर्थ भाव में यह राजयोग बन रहा है और मंगल राशि स्वामी हैं। भूमि, भवन और वाहन से जुड़े सुख मिल सकते हैं। पैतृक संपत्ति का कोई पुराना विवाद सुलझने की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।
कर्क राशि: प्रथम भाव में बन रहा यह राजयोग विशेष प्रभावशाली रहेगा। गुरु का आशीर्वाद और मंगल का साहस कार्यक्षेत्र में सफलता दिला सकता है। नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी और नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के अवसर मिल सकते हैं।
कन्या राशि: एकादश भाव में यह राजयोग बनने से बड़े निवेशों से भारी मुनाफे के संकेत हैं। प्रभावशाली लोगों से संपर्क स्थापित हो सकते हैं, जो भविष्य में करियर को नई दिशा देने में सहायक होंगे।
तुला राशि: दशम भाव में बन रहा नीचभंग राजयोग नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति और वेतन वृद्धि के अवसर ला सकता है। नई नौकरी के अवसर मिलने तथा व्यापार के विस्तार के संकेत हैं।
वृश्चिक राशि: मंगल राशि स्वामी हैं और नवम भाव में उच्च के गुरु के साथ उनकी स्थिति भाग्य को मजबूत करने वाली है। धार्मिक यात्राओं के योग बन सकते हैं। उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के रास्ते खुल सकते हैं।
नीचभंग राजयोग—इन राशियों के लिए रहेगा चुनौतीपूर्ण
मिथुन राशि: द्वितीय भाव में गुरु-मंगल की युति वाणी में उग्रता ला सकती है। गुरु शुभ होने के बावजूद मंगल की नीच स्थिति के प्रभाव से धन संचय में बाधा आ सकती है। परिवार में अहंकार के कारण टकराव की स्थिति बन सकती है।
धनु राशि: अष्टम भाव में यह युति बन रही है। गुरु राशि स्वामी हैं, लेकिन अष्टम भाव में स्थिति और नीच मंगल के प्रभाव को देखते हुए वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहना होगा।
कुंभ राशि: षष्ठ भाव में नीचभंग राजयोग बनने से गुप्त शत्रु परेशानी पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में खर्च बढ़ सकता है। रक्त और पेट से संबंधित बीमारियों के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नीचभंग राजयोग के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ प्रभाव वाली राशियों के जातक गुरुवार को मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं और हनुमान जी को बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं। चुनौतीपूर्ण प्रभाव वाली राशियों के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करने, प्रत्येक मंगलवार को तांबे के बर्तन में गुड़ रखकर दान करने और बड़े भाई या गुरुतुल्य व्यक्तियों का अपमान करने से बचने का उपाय बताया गया है।














































