फ्रांस में पिछले दो सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन देशव्यापी रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और खराब व्यवस्थाओं से शुरू हुआ विरोध अब वेतन, पेंशन और आर्थिक असमानता जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। शनिवार को भी बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर तनाव, आगजनी, दुकानों में लूटपाट और पुलिस पर हमले की घटनाओं ने स्थिति को गंभीर बना दिया।
छात्रों की दस प्रमुख मांगें: छात्र नेता रियाद रानी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के सामने अब भी दस मांगें हैं, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार प्रमुख है। छात्र चाहते हैं कि पारकूर्सअप नाम की विश्वविद्यालय प्रवेश व्यवस्था समाप्त की जाए और विश्वविद्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में हजारों अतिरिक्त सीटें उपलब्ध कराई जाएं। उनकी मांग है कि शिक्षकों की बड़े पैमाने पर स्थायी नियुक्तियां हों और शिक्षकों को उचित सेवा संबंधी दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक इमारतों की मरम्मत तथा नवीनीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजना लागू करने की मांग भी शामिल है।
आश्वासनों के बजाय ठोस कार्रवाई की मांग: रियाद रानी ने कहा कि छात्र सरकार की ओर से शुरुआती घोषणाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक दिन पहले अच्छी बातें कहीं और बड़े वादे किए, लेकिन अब केवल भाषणों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने पहले किए गए वादों का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों को वास्तविक बदलाव चाहिए। छात्र नेतृत्व का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को दूर करने के लिए स्पष्ट फैसले, पर्याप्त संसाधन और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी हैं। जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन को समाप्त करना आसान नहीं होगा।
वेतन, पेंशन और असमानता भी बने मुद्दे: शुरुआत में शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहा यह आंदोलन अब आर्थिक और सामाजिक असंतोष का भी प्रतिनिधित्व कर रहा है। प्रदर्शनकारी वेतन, पेंशन और बढ़ती आर्थिक असमानता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। अलग-अलग शहरों में सरकार विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं और आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ रही है। शनिवार को पेरिस, लियोन, क्लेरमों-फेरां और स्ट्रासबर्ग में पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि नीस और नांत में पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया। इन कार्रवाइयों के बावजूद प्रदर्शन जारी रहे।
मैक्रों ने देश में एकता बनाए रखने की अपील की: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में कई वर्षों से अलग-अलग कारणों से तनाव बढ़ता रहा है और देश ने इसे बढ़ने दिया। उन्होंने हाल की घटनाओं को गणराज्य की नींव को झकझोरने वाला बताया। मैक्रों ने यह भी कहा कि अतीत में हुए हमलों के कारण अलग-अलग धर्मों के लोगों को गलत नजरिये से देखे जाने की स्थिति बनी है। उन्होंने लोगों से सभी घटनाओं और समस्याओं को एक साथ मिलाकर देखने से बचने तथा एक पक्ष को दूसरे पक्ष के खिलाफ खड़ा करने के प्रयासों में न फंसने की अपील की। उनके मुताबिक, देश में एकता और आपसी सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।
सरकार के सामने भरोसा बहाल करने की चुनौती: मैक्रों ने लोगों से प्रदर्शन समाप्त करने और शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अभी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का जोर अपनी दस मांगों पर है, जबकि आंदोलन में शामिल अन्य लोग वेतन, पेंशन और आर्थिक असमानता से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि अब बड़े भाषणों के बजाय फैसले और परिणाम दिखाई देने चाहिए। मैक्रों ने कहा कि सुधार की शुरुआत करने में कभी देर नहीं होती और गणराज्य की बुनियाद एकता तथा सद्भाव पर टिकी है। अब सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों पर कार्रवाई करने, व्यापक आर्थिक असंतोष का समाधान तलाशने और हिंसक प्रदर्शनों के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती है।

















































