उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन से जुड़े प्रावधानों को अधिक सख्त बनाया है। नए निर्देश राज्य के सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में होने वाली नियुक्तियों पर लागू होंगे। इसके तहत उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जांच में उनके आचरण और गतिविधियों को महत्व दिया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा अपने आप में उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का आधार नहीं बनेगी। हालांकि, हिंसक प्रदर्शनों में भागीदारी और ऐसे संगठनों से जुड़ाव, जिनका उद्देश्य हिंसक तरीकों से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलना है, नियुक्ति के लिए गंभीर विषय माना जाएगा। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य चरित्र सत्यापन के दौरान राजनीतिक विचारों और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना है।
आंदोलन के दौरान हिंसा करने वालों के लिए बढ़ेगी मुश्किल: नए प्रावधानों के मुताबिक, किसी आंदोलन या प्रदर्शन में हिंसक गतिविधियों में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की सरकारी नियुक्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में चरित्र सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी की भूमिका और गतिविधियों की प्रकृति को ध्यान में रखा जाएगा। सरकार के निर्देशों में हिंसा को सामान्य राजनीतिक असहमति से अलग माना गया है। इसका मतलब है कि किसी मुद्दे पर विचार रखना या राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा होना अपने आप में अयोग्यता नहीं है, लेकिन हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी गंभीर मानी जाएगी। सरकारी विभागों और संबंधित संस्थाओं में सीधी भर्ती के लिए चयनित अभ्यर्थियों का सत्यापन इसी नीति के तहत किया जाएगा। इस व्यवस्था के कारण सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए किसी भी आंदोलन में अपनी भूमिका और आचरण को लेकर निर्धारित नियमों का ध्यान रखना जरूरी हो गया है।
हिंसा को उद्देश्य बनाने वाले संगठनों की सदस्यता पर स्पष्ट प्रावधान: आदेश में कहा गया है कि ऐसे संगठन, जिनका संकल्पित उद्देश्य हिंसक तरीके अपनाकर समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, उनसे जुड़े व्यक्तियों को सरकार के अधीन नियुक्ति के लिए अपात्र समझा जाएगा। इसके साथ ही राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी व्यक्ति को अनुपयुक्त घोषित करने पर रोक स्पष्ट की गई है। इस प्रकार नियम किसी व्यक्ति की राजनीतिक सोच और हिंसा आधारित गतिविधियों में उसकी भागीदारी को अलग-अलग कसौटियों पर देखते हैं। चरित्र सत्यापन के दौरान संबंधित संगठन की घोषित मंशा और अभ्यर्थी के उससे जुड़ाव जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के संबंध में फैसला केवल राजनीतिक विचारों के आधार पर नहीं, बल्कि निर्धारित प्रावधानों और गतिविधियों से जुड़े तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इक्कीस वर्ष की आयु के बाद तीन साल की गतिविधियों की होगी अहमियत: निर्देशों में एक समय-सीमा भी तय की गई है, जिसके तहत इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद जांच की तारीख से पिछले तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भागीदारी को संबंधित व्यक्ति के सक्रिय रूप से उनसे जुड़े रहने का प्रमाण माना जाएगा। हालांकि, इस आकलन में एक शर्त भी रखी गई है। यदि संबंधित अवधि के दौरान व्यक्ति की प्रवृत्ति में बदलाव आने के ठोस और सकारात्मक प्रमाण उपलब्ध हैं, तो उस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसका अर्थ है कि चरित्र सत्यापन में केवल पुरानी गतिविधियों का उल्लेख ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार में आए बदलाव के प्रमाण भी महत्वपूर्ण होंगे। आदेश में इस प्रावधान को हिंसक गतिविधियों में निरंतर संलग्नता का आकलन करने के आधार के रूप में शामिल किया गया है।
प्राथमिकी दर्ज होने या जांच लंबित रहने पर स्वतः अयोग्यता नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना या मामले की जांच लंबित रहना अपने आप में उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इस तरह केवल कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के आधार पर नियुक्ति का निर्णय स्वतः नहीं किया जाएगा। चरित्र सत्यापन में मामले से जुड़े तथ्यों और लागू नियमों के अनुरूप आकलन किया जाएगा। नए निर्देशों के अनुसार, पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का इस प्रक्रिया के तहत सत्यापन नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, अभ्यर्थी के पूर्व विभाग से उसके संबंध में आवश्यक जानकारी भी मांगी जा सकती है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चरित्र सत्यापन के दौरान अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति संबंधी निर्णय लेना है।
एम. देवराज के निर्देश, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के लिए तीस दिन की समय-सीमा: नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों में पुलिस को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट तीस दिन के भीतर देने के लिए कहा गया है। यह व्यवस्था राज्य के सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती से होने वाली नियुक्तियों के लिए निर्धारित की गई है। जरूरत पड़ने पर उम्मीदवार के पिछले विभाग से भी जानकारी ली जा सकेगी। नए नियमों में एक ओर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अयोग्यता तय करने से बचने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर हिंसक गतिविधियों और हिंसा को उद्देश्य बनाने वाले संगठनों से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखने का प्रावधान रखा गया है। इस बदलाव के बाद सरकारी नियुक्तियों के चरित्र सत्यापन में निर्धारित समय-सीमा, उपलब्ध प्रमाण और अभ्यर्थी की गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
















































