रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को फिलीपींस के सेबू में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव लगातार बढ़े हैं। वह 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में भाग लेने के दौरान समुदाय से संवाद कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, रक्षा क्षमताओं और भ्रष्टाचार को रोकने के प्रयासों का जिक्र किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत की बात को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से सुना जाता है और देश की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी ओर से किसी को उकसाने का प्रयास नहीं करता, लेकिन यदि कोई देश उसे उकसाता है तो भारत दृढ़ता से जवाब देता है। उनके संबोधन में राष्ट्रीय आत्मविश्वास और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का संदेश प्रमुख रहा।
प्रधानमंत्री को मिले सम्मानों से भारत की साख का उल्लेख: रक्षा मंत्री ने भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के समर्थन में प्रधानमंत्री को विभिन्न देशों से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मानों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के 35 देशों के नेतृत्व ने प्रधानमंत्री को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है और यह भारत के बढ़ते सम्मान को दर्शाता है। राजनाथ सिंह के अनुसार, आज भारत जब अपनी बात रखता है तो विश्व समुदाय उसे ध्यान से सुनता है। उन्होंने इस स्थिति को देश की अंतरराष्ट्रीय साख में हुए बदलाव के रूप में प्रस्तुत किया। उनके बयान का आशय था कि भारत की वैश्विक पहचान केवल उसके आकार या जनसंख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी बातों, नीतियों और नेतृत्व को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने इस बढ़ते सम्मान को भारत की मजबूत होती स्थिति का संकेत बताया।
दुनिया को परिवार मानने की सोच पर दिया जोर: राजनाथ सिंह ने भारत की सांस्कृतिक परंपरा और वैश्विक सहयोग के दर्शन पर चर्चा करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है और यह भावना उसकी सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रक्षा मंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए नाग पंचमी पर सांपों को दूध पिलाने की परंपरा का उदाहरण दिया और कहा कि भारत की सोच में सभी के प्रति अपनत्व का भाव शामिल है। उनके मुताबिक, भारत की अंतरराष्ट्रीय नीति में सहयोग और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण का महत्व है। इस विचार को सामने रखते हुए उन्होंने भारत की पहचान को केवल सैन्य शक्ति और आर्थिक प्रगति के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक उदारता और वैश्विक समुदाय के साथ संबंध बनाने की भावना से भी जोड़ा।
भारत की अर्थव्यवस्था को शीर्ष तीन में पहुंचने का भरोसा: आर्थिक विकास पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश आने वाले समय में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में जारी संकट को भारत की आर्थिक प्रगति के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि यह संकट नहीं होता, तो भारत अब तक दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका होता। उनके बयान में देश की आर्थिक क्षमता को लेकर भरोसा दिखाई दिया। उन्होंने यह संकेत दिया कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की प्रगति का लक्ष्य स्पष्ट है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में इस लक्ष्य तक पहुंचने की कोई समयसीमा या आर्थिक आंकड़ों का विस्तृत विवरण नहीं दिया, लेकिन शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने को लेकर विश्वास जरूर जताया।
ऑपरेशन सिंदूर के जरिए रक्षा तैयारियों का संदेश: रक्षा मंत्री ने भारत की सैन्य क्षमता और सुरक्षा नीति पर चर्चा करते हुए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब कमजोर नहीं है और उसकी रक्षा तैयारियों में उल्लेखनीय मजबूती आई है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत किसी को पहले से उकसाने की नीति नहीं अपनाता, लेकिन यदि कोई उसे उकसाता है तो उसे कड़ा जवाब दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के रुख का संदेश अब स्पष्ट है। इस बयान के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में देश की दृढ़ता और अपनी रक्षा करने की क्षमता को रेखांकित किया। उनके अनुसार, भारत शांति और संयम के साथ आगे बढ़ने में विश्वास रखता है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख इसी दृढ़ नीति के संदर्भ में किया गया।
शौर्य दिवस पर सैनिकों के बलिदान को बताया अविस्मरणीय: राजनाथ सिंह ने अपने फिलीपींस दौरे के दौरान भारत की प्रतिष्ठा, आर्थिक प्रगति और रक्षा क्षमता पर जोर दिया, जबकि इससे पहले शौर्य दिवस के अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना के वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। उस अवसर पर उन्होंने कहा था कि देश सैनिकों के बलिदान का हमेशा ऋणी रहेगा। उनके इस संदेश में सैनिकों के साहस और देश के लिए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया था। फिलीपींस में भारतीय समुदाय के सामने दिए गए संबोधन में भी रक्षा मंत्री ने देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत बताया और कहा कि भारत को उकसाने की कोशिश करने वालों को जवाब मिलेगा। साथ ही उन्होंने वैश्विक सहयोग की भारतीय सोच और आर्थिक विकास पर भरोसा जताया। उनके संबोधन में भारत की अंतरराष्ट्रीय साख, सांस्कृतिक दृष्टिकोण और रक्षा क्षमता को देश की बदलती वैश्विक भूमिका के प्रमुख पहलुओं के रूप में प्रस्तुत किया गया।













































