अमेरिका के अटलांटा में शनिवार को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया और भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया। बैठक में नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद सबसे पहले सहायता पहुंचाने के लिए भारत की भूमिका की सराहना की गई। चारों देशों ने नेपाल को दिए गए सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। भारत ने बाढ़ प्रभावित पड़ोसी देश में राहत और बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के साथ वित्तीय सहायता भी दी थी। बैठक के दौरान पश्चिम एशिया के तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में आपदा राहत, आर्थिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने सबसे पहले पहुंचाई मदद: क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की त्वरित सहायता को विशेष रूप से रेखांकित किया। संयुक्त बयान में कहा गया कि आपदा के बाद सबसे पहले मदद पहुंचाने में भारत ने अहम भूमिका निभाई। भारत ने राहत और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए तथा आर्थिक सहायता भी दी। चारों देशों ने नेपाल को दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए आपदा के समय सहायता पहुंचाने के प्रयासों को महत्व दिया। बाढ़ जैसी आपदा के बाद प्रभावित लोगों तक जरूरी संसाधन पहुंचाना राहत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। भारत की ओर से उपकरणों और वित्तीय मदद की उपलब्धता को इसी संदर्भ में देखा गया। क्वाड की बैठक में भारत की भूमिका की प्रशंसा से यह बात भी सामने आई कि पड़ोसी देश में संकट के समय भारत ने तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय योगदान दिया।
मनमाने निर्यात प्रतिबंधों पर क्वाड की गंभीर चिंता, चीन की नीतियों की ओर इशारा: वैश्विक व्यापार और आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा के दौरान क्वाड देशों ने किसी देश का नाम लिए बिना मनमाने निर्यात प्रतिबंध लगाने की नीतियों पर गंभीर चिंता जताई। संयुक्त बयान में कहा गया कि निर्यात पर अचानक और मनमाने तरीके से रोक लगाने तथा बाजार के सामान्य नियमों के खिलाफ व्यापारिक नीतियां अपनाने से दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। इन टिप्पणियों को चीन की नीतियों की ओर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बयान में विशेष रूप से महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और ऐसी व्यापारिक गतिविधियों का उल्लेख किया गया, जिनसे वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा होता है। चारों देशों ने आर्थिक सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए जरूरी बताया। इसके साथ ही भरोसेमंद और खुली वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने तथा मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पश्चिम एशिया के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों और कर्मचारियों की सुरक्षा जरूरी: क्वाड बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चारों देशों ने कहा कि इन समुद्री रास्तों से व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति जारी रहना बेहद जरूरी है। जहाजों को किसी तरह की बाधा के बिना आवाजाही की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और उन पर टोल नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। क्वाड ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की बात कही। इन समुद्री मार्गों का महत्व केवल जहाजों के आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इनसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी जुड़ी हुई है। इसलिए इन क्षेत्रों में सुरक्षित समुद्री परिवहन बनाए रखने को चारों देशों ने आवश्यक बताया।
जयशंकर ने क्वाड की प्राथमिकताएं बताईं, अटलांटा में हुई इस साल की तीसरी बैठक: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि क्वाड ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने तथा सभी देशों को अपनी पसंद के फैसले लेने की आजादी देने के महत्व को फिर से दोहराया है। उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया। जयशंकर ने आतंकवाद का मुकाबला करने, समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और विभिन्न देशों की क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत भी बताई। सामाजिक माध्यम एक्स पर उन्होंने जानकारी दी कि अटलांटा में हुई यह बैठक इस वर्ष विदेश मंत्रियों के स्तर पर क्वाड की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी बैठकें आयोजित की गई थीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखना क्वाड की निरंतर कोशिशों में शामिल है।
जी20 में जयशंकर ने समुद्री हमलों का मुद्दा उठाकर वैश्विक दक्षिण की चिंता बताई: क्वाड देशों की बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को एस. जयशंकर ने जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में नागरिक जहाजों और उनके कर्मचारियों पर बार-बार हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुद्री मार्गों पर इस तरह के हमलों से जहाजों का सुरक्षित आवागमन बाधित होता है और नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है। विदेश मंत्री के अनुसार, इन घटनाओं का सबसे ज्यादा असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ रहा है। समुद्री परिवहन प्रभावित होने से ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति में दिक्कत आती है और इनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं। जी20 बैठक में उठाई गई इस चिंता के बाद क्वाड की बैठक में भी प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग के साथ भारत ने सुरक्षित समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था के महत्व को फिर सामने रखा।
















































