अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीनों से चल रहा युद्ध अब एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति में पहुँच चुका है। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त रूप से भीषण हमले किए थे। इन छह महीनों के संघर्ष के बाद अब दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद का केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जलमार्ग पर अपना अधिकार जता रहे हैं, जबकि ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से उसका है।
ट्रंप का सोशल मीडिया दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दुनिया का एक नक्शा पोस्ट किया है। इस पोस्ट किए गए मैप में उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका दर्शाया है। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रमुख और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर कब्ज़ा करने की अपनी हालिया धमकी को फिर से दोहरा दिया है। ट्रंप के इस रुख के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव और ज्यादा गहरा गया है।
वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा की आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। सामान्य दिनों में दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत होने के बाद से ही ईरान ने इस पूरे समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है। इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में जहाजों की आवाजाही रुक गई है और ऊर्जा आपूर्ति पर भारी संकट मंडरा रहा है।
मोहसेन रेज़ाई का तीखा पलटवार: ट्रंप के इस दावे पर ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेज़ाई ने कड़ा ऐतराज जताया है। हाल ही में मोहम्मद बाघेरी ज़ोलग़द्र की जगह लेने वाले पूर्व IRGC कमांडर रेज़ाई ने ट्रंप का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने X पर लिखा कि होर्मुज को खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर दावा करने के बीच का अंतर 7,000 मील से भी अधिक है। उन्होंने नक्शे की तस्वीर शेयर कर लिखा कि कुछ सपने हकीकत से बहुत दूर होते हैं।
ईरान की सख्त शर्तें: होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने के विषय पर ईरान ने अपनी पुरानी मांगों को एक बार फिर से बेहद सख्ती के साथ दोहराया है। ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री रास्ते को तब तक नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका उसकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं करता। ईरान की इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करना, तेल पर लगे प्रतिबंध हटाना, उसकी जब्त संपत्तियों को रिहा करना और युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करना शामिल है। इन मांगों के बिना ईरान झुकने को तैयार नहीं है।
कतर की कूटनीतिक पहल: इस पूरे वैश्विक संकट के बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान जारी किया है। कतर ने कहा कि वह होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच एक ठोस समझौता होते देखना चाहता है। कतर के अनुसार ऐसा कोई भी समझौता दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत को फिर से शुरू करने में मददगार साबित होगा। कतर को उम्मीद है कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति और बातचीत का रास्ता आसान हो सकता है।
















































