Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। श्रावण मास की शुरुआत पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए प्रदेशवासियों से पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण का यह पवित्र महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, स्वच्छता और प्रकृति की रक्षा का भी समय है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों से एकजुट होकर पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता में अपना योगदान देने का आग्रह किया।
भगवान शिव की प्रेरणा: अपने पत्र में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भगवान शिव के स्वरूप को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए व्याख्या की है। उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्र मंथन के दौरान विषपान करके महादेव ने सृष्टि की रक्षा का महान संदेश दिया था। शिव जी की जटाओं में गंगा, मस्तक पर चंद्रमा और गले में सर्प का होना हमें प्रकृति और जीवों के साथ सामंजस्य बिठाकर रहने की सीख देता है। जलाभिषेक की परंपरा इसी त्याग और कृतज्ञता की भावना को प्रदर्शित करती है, जो हमें प्रकृति के प्रति जवाबदेह बनाती है।
श्रावण का सौंदर्य: ज्येष्ठ और आषाढ़ की भीषण गर्मी के बाद श्रावण की बारिश से धरती का रूप पूरी तरह बदल जाता है। मिट्टी की सोंधी महक और चारों तरफ फैली हरियाली से पूरे प्रदेश में उल्लास का माहौल बन जाता है। नदियां अपने पूरे उफान और सुंदरता के साथ बहती हैं, जबकि मोर का नृत्य वातावरण को आनंदित कर देता है। गांवों में धान की रोपाई के बाद होने वाले सामूहिक भोज हमारी प्राचीन साझा संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाते हैं।
अमृत सरोवर योजना: जल संकट से निपटने के लिए Uttar Pradesh सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने उपलब्धियां बताईं। राज्य में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवरों का निर्माण और विकास सफलतापूर्वक किया जा चुका है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए जनभागीदारी को अति आवश्यक माना गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंचतत्वों में जल ही जीवन का मूल आधार है और इसकी हर एक बूंद को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।
सराहनीय मॉडल: जल संरक्षण के संदर्भ में सीएम Yogi Adityanath ने Lucknow की एक रिहायशी सोसाइटी के इनोवेटिव मॉडल का विशेष रूप से उल्लेख किया। उस सोसाइटी ने एसी और आरओ से निकलने वाले करीब 50 हजार लीटर व्यर्थ पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ा है। इस पानी को सीधे जमीन के अंदर भेजकर भूजल स्तर को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से हम जो कुछ भी लेते हैं, उसे वापस लौटाना हमारा कर्तव्य है और यह पहल पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय है।
संवर्धन का संकल्प: संदेश के अंत में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रदेशवासियों से श्रावण माह को एक अभियान के रूप में मनाने की अपील की है। उन्होंने हर नागरिक से पानी की एक-एक बूंद का सम्मान करने और कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी रक्षा करने का वचन मांगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, जल संवर्धन और पर्यावरण की सुरक्षा ही समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित राज्य की असली आधारशिला है। यही संकल्प श्रावण का वास्तविक संदेश है जो उत्तर प्रदेश को प्रगति के नए पथ पर ले जाएगा।

























































