त्योहारों के मौसम में सोने और चांदी के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना राहत लेकर आया है। इस दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। महज एक महीने में सोने की कीमत करीब 12,300 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गई, जबकि चांदी लगभग 48,000 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। वायदा बाजार में 1 अक्टूबर को सोना 1,50,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो 30 अक्टूबर तक घटकर करीब 1,38,400 रुपये रह गया। इसी तरह चांदी का भाव महीने की शुरुआत में 2,27,200 रुपये प्रति किलोग्राम था, लेकिन 30 अक्टूबर को यह गिरकर 1,79,132 रुपये पर पहुंच गया। इस तेज गिरावट ने त्योहारों पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों के साथ-साथ कीमती धातुओं में निवेश करने वालों का भी ध्यान खींचा है।
शुक्रवार को सोने और चांदी में तेज बिकवाली: अक्टूबर के आखिरी कारोबारी शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर को दोनों धातुओं की कीमतों में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली। वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 2.88 प्रतिशत यानी 4,111 रुपये टूटकर 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी की कीमतों में इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इसका भाव 5.45 प्रतिशत यानी 10,321 रुपये कम होकर 1,79,132 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव बना रहा। वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 3.61 प्रतिशत गिरकर करीब 3,875 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि हाजिर चांदी में 5.82 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव घटकर 49.10 डॉलर प्रति औंस रह गया। एक ही कारोबारी दिन में आई इस बड़ी गिरावट ने दोनों धातुओं के बाजार में बिकवाली का दबाव साफ दिखाया।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का असर: बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का रुख भी एक प्रमुख वजह है। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा, लेकिन साथ ही महंगाई को लेकर चिंता भी जाहिर की। इस रुख के बाद बाजार में यह आशंका मजबूत हुई कि आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर नीतियां सख्त रह सकती हैं। ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर कीमती धातुओं पर पड़ता है, क्योंकि निवेशक आर्थिक परिस्थितियों और मौद्रिक नीति के अनुसार अपने निवेश संबंधी फैसले बदलते हैं। फेड के फैसले और महंगाई को लेकर बनी चिंता के बीच सोने-चांदी में बिकवाली बढ़ी, जिसका असर घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय कीमतों तक दिखाई दिया।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड तय करेंगे आगे की दिशा: विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। दोनों धातुओं की अगली चाल काफी हद तक अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। इन कारकों में होने वाला बदलाव निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों में बदलाव आता है, तो उसका असर कीमती धातुओं के भाव पर भी दिखाई देगा। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और एक महीने के भीतर आई बड़ी गिरावट के बाद भी कीमतों की दिशा को लेकर निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है।
लंबी अवधि के निवेशकों और त्योहारों की खरीदारी करने वालों के लिए मौका: अक्टूबर में सोने और चांदी के भाव में आई भारी कमी के बाद लंबी अवधि के निवेशकों और त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को खरीदारी का अवसर दिखाई दे रहा है। महीनेभर में सोने के करीब 12,300 रुपये और चांदी के लगभग 48,000 रुपये सस्ता होने से बाजार में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है और डॉलर, बॉन्ड यील्ड तथा अमेरिकी फेड की नीतियों में बदलाव के अनुसार भाव आगे ऊपर या नीचे जा सकते हैं। इसलिए खरीदारी या निवेश की योजना बनाने वालों को अपनी जरूरत, बजट और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
सोना-चांदी खरीदने से पहले इन बातों पर रखें नजर: अक्टूबर के दौरान दोनों कीमती धातुओं में आई गिरावट ने त्योहारों के समय खरीदारी करने वालों को राहत दी है, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है। सोने का भाव 1 अक्टूबर के 1,50,700 रुपये प्रति 10 ग्राम से घटकर 30 अक्टूबर को करीब 1,38,400 रुपये पर पहुंचा, जबकि चांदी 2,27,200 रुपये से गिरकर 1,79,132 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। शुक्रवार की तेज गिरावट ने इस मासिक कमी को और महत्वपूर्ण बना दिया। हालांकि, वायदा बाजार के भाव और आभूषण खरीदते समय ग्राहकों को मिलने वाली अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में उपलब्ध भाव और आभूषण की कीमत की जानकारी लेना जरूरी है। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेड के फैसलों के आधार पर सोने-चांदी की कीमतों में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
















































