स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स का सातवां दिन भारत के लिए ऐतिहासिक और बेहद शानदार रहा है। इन खेलों की पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम करते हुए देश का मान बढ़ाया है। पुरुषों की 100 मीटर टी47 फाइनल स्पर्धा में भारतीय एथलीटों ने स्वर्ण और रजत दोनों पदकों पर अपना कब्जा जमा लिया। इस जीत के साथ ही भारत के खाते में अब तक कुल तीन स्वर्ण पदक सफलता पूर्वक जुड़ चुके हैं। इन दो शानदार पदकों को मिलाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों की कुल संख्या अब पंद्रह हो गई है।
दिलीप और बासिल की तेज दौड़ फाइनल रेस में भारतीय धावकों ने शुरुआत से ही अपनी तेज गति का शानदार और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दिलीप महादु गावित ने ट्रैक पर बहुत तेज दौड़ते हुए 10.71 सेकेंड का बेहतरीन समय निकाला। इस शानदार समय के साथ दिलीप ने पहला स्थान प्राप्त करके स्वर्ण पदक अपने नाम करने में सफलता पाई। दूसरी तरफ मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने भी 10.83 सेकेंड का शानदार समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया। बासिल ने अपनी इस गति और समय के आधार पर भारत के लिए रजत पदक जीतने में कामयाबी हासिल की।
दिलीप की ऐतिहासिक उपलब्धि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही दिलीप गावित ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। दिलीप अब इन खेलों की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए हैं। कुल भारतीय पैरा एथलीटों की बात करें तो स्वर्ण पदक जीतने वाले वह देश के दूसरे खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले महिला शॉट पुट एफ57 इवेंट में शर्मिला ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर यह इतिहास रचा था। दिलीप ने 10.71 सेकेंड में अपनी फाइनल रेस पूरी करके इस पूरे सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है।
दिलीप का संघर्षपूर्ण जीवन स्वर्ण पदक विजेता दिलीप गावित मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले के पास स्थित तोरण डोंगरी गांव के रहने वाले हैं। वह बचपन से ही एक बहुत ही साधारण किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया है। बचपन के दिनों में एक बार पेड़ से नीचे गिरने के कारण दिलीप के दाहिने हाथ में काफी गंभीर चोट लग गई थी। उस समय उचित और सही इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनका वह दाहिना हाथ कोहनी के नीचे से काटना पड़ गया था। इस बड़ी शारीरिक दुर्घटना के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और एथलेटिक्स में अपना सफर जारी रखा।
पिछली सफलता और रेस का अनुभव दिलीप गावित इससे पहले एशियन पैरा गेम्स 2022 में भी पुरुषों की 400 मीटर टी47 इवेंट में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। ग्लासगो में अपनी रेस के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि फाइनल में उनकी शुरुआत थोड़ी धीमी रही थी। हालांकि धीमी शुरुआत के बाद उन्होंने ट्रैक पर धीरे-धीरे अपनी गति पकड़ी और जीत हासिल करने का यह अनुभव उनके लिए शानदार रहा। दिलीप ने यह भी बताया कि वहां का मौसम बिल्कुल भी अच्छा नहीं था जिससे सही टाइमिंग हासिल करने में बहुत दिक्कत हुई। खराब मौसम के कारण शरीर सुस्त हो जाता है जिससे दौड़ से पहले सही से वार्मअप करना भी उनके लिए काफी मुश्किल रहा था।
भविष्य के लक्ष्य और पैरालंपिक अपनी इस बड़ी सफलता के बाद दिलीप ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल वह किसी भी तरह की नौकरी के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं। उनका वर्तमान और सबसे प्रमुख लक्ष्य केवल अपनी खेल स्पर्धाओं पर ध्यान केंद्रित करके देश के लिए और अधिक पदक जीतना है। दिलीप ने आगामी सितंबर-अक्टूबर महीने में जापान में आयोजित होने वाले पैरा एशियाई खेलों को अपना अगला महत्वपूर्ण निशाना बताया है। उन्हें पूरा भरोसा है कि वह जापान में होने वाली इस बड़ी प्रतियोगिता में अपने वर्तमान प्रदर्शन से भी ज्यादा बेहतर खेल दिखाएंगे। इसके बाद उनका अंतिम और सबसे बड़ा लक्ष्य भविष्य में होने वाले प्रतिष्ठित पैरालंपिक खेलों में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है।


























































