इजरायल ने हमास के साथ प्रस्तावित हथियार डालने के समझौते को लेकर अमेरिका के सामने गंभीर सुरक्षा चिंताएं प्रकट की हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ऑफिस के एक अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण मामले की जानकारी मीडिया से साझा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इस सप्ताह की शुरुआत में इस डील का ऐलान किया गया था। इस घोषणा के बाद से इजरायल की तरफ से सामने आने वाली यह सबसे पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है। इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि पुख्ता सुरक्षा गारंटी के बिना कोई भी समझौता आगे नहीं बढ़ सकता है।
हमास की मंशा: इजरायल प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने हमास की नीयत पर गंभीर संदेह व्यक्त करते हुए बयान दिया है। डोरोन स्पीलमैन के अनुसार इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि हमास वास्तव में निरस्त्रीकरण नहीं चाहता है। हमास का असली मकसद अपनी सैन्य ताकत को फिर से मजबूत और संगठित करना है। जब तक हमास पूरी तरीके से हथियार नहीं डाल देता, तब तक इजरायली फौज गाजा से पीछे नहीं हटेगी। वर्तमान में गाजा के 60 फीसदी से ज्यादा भाग पर इजरायली आर्मी का कड़ा सैन्य नियंत्रण बना हुआ है।
हमले की आशंका: इजरायली प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने गाजा से सेना की समय पूर्व वापसी पर होने वाले खतरों से आगाह किया है। उन्होंने कहा कि हमारा आकलन है कि अगर हमास के पूरी तरीके से हथियार डालने से पहले हम अपनी फौज पीछे हटाते हैं, तो खतरा बहुत बढ़ जाएगा। हमास जल्दी से पूरे गाजा में अपनी मौजूदगी बढ़ा लेगा और अपने आतंकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक बार फिर खड़ा करेगा। इसके बाद वह इजरायली समुदायों के लिए फिर से खतरा बनेगा और 7 अक्टूबर 2023 जैसे अटैक का फिर प्रयास करेगा। इजरायल का मानना है कि ऐसी स्थिति में क्षेत्र की शांति पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो जाएगी।
समर्पण की शर्त: इजरायली सरकार ने निरस्त्रीकरण की परिभाषा को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए अपनी शर्त दुनिया के सामने रखी है। डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि निरस्त्रीकरण का मतलब है हथियारों का पूरी तरीके से समर्पण। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि इससे कम हमें कुछ भी कबूल नहीं है। स्पीलमैन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब हमास ने निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। हमास ने करीब 3 साल से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 9 महीने पहले हुए अमेरिका की मध्यस्थता वाली सीजफायर डील के तहत यह कदम उठाने का दावा किया था।
जटिल प्रक्रिया: गाजा में करीब 3 साल से जारी इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में इसे संभावित बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि इस शांति प्रक्रिया के सामने अब भी कई गंभीर बाधाएं और एक बेहद लंबी प्रक्रिया मौजूद है। अमेरिका की मध्यस्थता से 9 महीने पहले हुए सीजफायर समझौते के तहत हमास ने निरस्त्रीकरण प्रक्रिया को शुरू करने की बात कही थी। लेकिन इजरायल द्वारा जताई गई हालिया सुरक्षा चिंताओं के बाद इस योजना के क्रियान्वयन पर संशय पैदा हो गया है। जमीनी धरातल पर शांति स्थापित करने के लिए अभी कई कूटनीतिक चरणों को पार करना बाकी है।
शांति का खाका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20 सूत्री गाजा योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम स्थापित करना है। ट्रंप की 20 सूत्री युद्धविराम योजना में हमास के निरस्त्रीकरण और उसके टनल के व्यापक नेटवर्क को नष्ट करने को कहा गया है। इस योजना में इजरायली फौज की गाजा से चरणबद्ध वापसी का स्पष्ट प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसके साथ ही एक नई टेक्निकल एक्सपर्ट वाली फिलिस्तीन की सरकार का गठन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की बात कही गई है। योजना के अंतिम चरण में गाजा के रीडेवलपमेंट यानी व्यापक पुनर्विकास का भी प्रस्ताव रखा गया है।


























































