राम मंदिर में हुए कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर विपक्षी दल संसद के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में 31 जुलाई को संसद भवन परिसर के बाहर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का एक बिल्कुल अनोखा रूप देखने को मिला। पप्पू यादव ने साधु का भेष धारण करके संसद के बाहर अपना विरोध दर्ज कराया और सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने सांकेतिक रूप से राम मंदिर में हुए कथित घोटाले का संसद के बाहर नाटकीय चित्रण करके अपना गहरा विरोध जाहिर किया। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के कई अन्य वरिष्ठ सांसद भी मौके पर मौजूद रहे।
विपक्ष का राम मंदिर मुद्दे पर हमला: राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। इसी मांग को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दल संसद परिसर में लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे हैं। पप्पू यादव के सांकेतिक प्रदर्शन को भी विपक्ष के इसी देशव्यापी विरोध अभियान का एक हिस्सा माना जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को दबाने नहीं देंगे और सदन में चर्चा की मांग जारी रखेंगे।
सोमवार को लोकसभा दो बार स्थगित: राम मंदिर मुद्दे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में सोमवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने इन मुद्दों पर तुरंत चर्चा कराने और सरकार से जवाब मांगने के लिए सदन में जमकर नारेबाजी की। हंगामे के कारण पीठ को लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। आखिरकार अपराह्न दो बजकर 10 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ने बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। बार-बार के स्थगन के कारण संसद का कीमती समय बर्बाद हुआ और विधायी कार्य प्रभावित हुए।
बिना चर्चा के पास हुआ महत्वपूर्ण बिल: लोकसभा में विपक्षी सांसदों के लगातार जारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच ही सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करा लिया। सदन ने बिना किसी विस्तृत चर्चा के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाने वाले इस प्रमुख बिल को अपनी मंजूरी दे दी। इस नए कानून के लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश (CJI) सहित जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से शीर्ष अदालत में लंबित पड़े मुकदमों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। विपक्ष ने हंगामा जारी रखा, जबकि सरकार ने इसे पारित कराया।
दो नए विधेयक सदन में पेश: विपक्षी हंगामे के बीच ही केंद्र सरकार ने आर्थिक और सांख्यिकी क्षेत्र से जुड़े दो अन्य नए विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखा। सरकार ने शोर-शराबे के बीच ही ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक 2026’ को लोकसभा में पेश करने की अपनी विधायी प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही वित्तीय बैंकिंग प्रणाली से संबंधित ‘बैंककार बही साक्ष्य विधेयक 2026’ को भी सदन के समक्ष पेश कर दिया गया। हालांकि विपक्ष इन विधेयकों को पेश किए जाने के दौरान भी वेल में आकर लगातार नारेबाजी और हंगामा करता रहा। इसके बावजूद पीठ ने सरकारी कामकाज को संचालित करते हुए इन विधेयकों को रिकॉर्ड पर ले लिया।
संसदीय सत्र में गतिरोध बरकरार: मॉनसून सत्र के दौरान संसद में जारी यह भारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों पक्षों के रुख काफी सख्त हैं। एक तरफ जहां विपक्ष राम मंदिर, छात्र प्रदर्शन और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बहस कराने की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर संसद की कार्यवाही ठप करके देश का पैसा और समय बर्बाद कर रहा है। एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी विपक्ष के इस आक्रामक रवैये का मजबूती से मुकाबला करने पर चर्चा हुई। आने वाले दिनों में भी संसद के दोनों सदनों में हंगामे और तीखी बहस के ही आसार बने हुए हैं।


























































