केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने इस याचिका के फैसले को सुरक्षित रखा है.
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना का समर्थन किया है. अब हाई कोर्ट अपने फैसले में यह तय करेगा कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना सही है या नहीं.
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय हाल ही में अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं से सवाल किया था. कोर्ट ने उनसे पूछा था कि इस योजना से उनके किस अधिकार का उल्लंघन हुआ है. इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि यह स्वैच्छिक है और जिन लोगों को इससे कोई समस्या है, उन्हें सशस्त्र बलों में शामिल नहीं होना चाहिए. उच्च न्यायालय ने कहा था कि भर्ती के लिए अग्निपथ योजना थलसेना, नौसेना और वायुसेना के विशेषज्ञों द्वारा बनाई गई है और न्यायाधीश सैन्य विशेषज्ञ नहीं हैं.
हाई कोर्ट की पीठ ने कही थी यह बात
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने 12 दिसंबर को कहा था, ‘योजना में क्या गलत है? यह अनिवार्य नहीं है. स्पष्ट तरीके से कहूं तो हम सैन्य विशेषज्ञ नहीं हैं. आप (याचिकाकर्ता) और मैं विशेषज्ञ नहीं हैं. इसे थलसेना, नौसेना और वायु सेना के विशेषज्ञों के बड़े प्रयासों के बाद तैयार किया गया है.’ पीठ ने कहा, ‘सरकार ने एक विशेष नीति बनाई है. यह अनिवार्य नहीं है, यह स्वैच्छिक है.’ अदालत ने कहा, ‘आपको यह साबित करना होगा कि अधिकार छीन लिया गया है. क्या हम यह तय करने वाले व्यक्ति हैं कि इसे (योजना के तहत सेवाकाल) चार साल या पांच साल अथवा सात साल किया जाना चाहिए.’
सरकार ने 21 से 23 साल कर दी है आयु सीमा
सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना 14 जून को शुरू की गई. योजना के नियमों के अनुसार, साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु के लोग आवेदन करने के पात्र हैं और उन्हें चार साल के कार्यकाल के लिए शामिल किया जाएगा. योजना के तहत, उनमें से 25 प्रतिशत की सेवा नियमित कर दी जाएगी. अग्निपथ की शुरुआत के बाद इस योजना के खिलाफ कई राज्यों में विरोध शुरू हो गया. बाद में, सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया.















































