शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 10 सदस्य देश मिलकर पूरी दुनिया की कुल GDP का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार को मजबूत करने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संगठन के सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय कानून के मान्यता प्राप्त सिद्धांतों और नियमों के आधार पर आपसी संबंधों को बेहतर बना रहे हैं। आपसी हितों वाले विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे पड़ोसी संबंध, अटूट दोस्ती और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर काम जारी है। SCO का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक सहयोग को लगातार बढ़ावा देना है।
भारत की पूर्ण सदस्यता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरी सक्रियता से हिस्सा ले रहे हैं। यह शिखर सम्मेलन SCO की स्थापना के सफल 25 साल पूरे होने के बेहद खास मौके पर आयोजित किया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत वर्ष 2017 में आधिकारिक रूप से SCO का पूर्णकालिक सदस्य देश के रूप में शामिल हुआ था। इस बार यह महत्वपूर्ण सम्मेलन विस्तारित ‘SCO Plus’ फॉर्मेट में आयोजित किया जा रहा है, जो बेहद खास है। इसमें मुख्य संगठन से जुड़े एक दर्जन से भी ज्यादा विभिन्न देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
वैश्विक नेताओं का जमावड़ा: बिश्केक में आयोजित इस विस्तारित बैठक में विश्व के कई प्रमुख और शक्तिशाली देशों के शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। इसमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान भाग ले रहे हैं। साथ ही मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलौन सिसोलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंग्बे भी मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी विशेष रूप से बिश्केक पहुंचे हैं। इन सभी नेताओं की उपस्थिति से यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बहुत बड़ा और मुख्य केंद्र बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उद्देश्य: SCO का एक प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, गहरी दोस्ती और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत बनाना है। इसके साथ ही क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर रणनीति तैयार की जाती है। नई वैश्विक चुनौतियों और उभरते सुरक्षा खतरों से मिलकर निपटने के लिए सदस्य देश आपस में सहमति बनाते हैं। आर्थिक सहयोग को अभूतपूर्व बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाना भी इसका मुख्य लक्ष्य है। इन प्राथमिकताओं के जरिए संगठन यूरेशियन क्षेत्र में विकास और समृद्धि के नए रास्ते खोलने का काम कर रहा है।
व्यापक भागीदारी का दायरा: इस 26वें SCO लीडरशिप समिट में 10 सदस्य देश, 15 पार्टनर देश और 2 ऑब्जर्वर देश पूर्ण रूप से शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि वैश्विक परिदृश्य में इस संगठन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक बातचीत और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाना है। बिश्केक में एकत्र हुए सभी नेता व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी आदान-प्रदान जैसे विषयों पर गहन चर्चा कर रहे हैं। इस व्यापक मंच के माध्यम से विकासशील और विकसित देशों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य: शिखर सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आतंकी खतरों से निपटने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सदस्य देशों के बीच व्यापारिक सुगमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध रखने के लिए नए समझौतों पर बात हो रही है। संगठन के 25 वर्षों के सफर की समीक्षा करने के साथ ही अगले 25 वर्षों के लिए एक स्पष्ट खाका खींचा जा रहा है। बिश्केक में हो रही ये बैठकें न केवल यूरेशिया बल्कि पूरे विश्व की शांति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सम्मेलन के समापन पर एक साझा घोषणापत्र जारी किए जाने की उम्मीद है जो भविष्य की नीतियों को दिशा देगा।















































