अफ्रीकी देश कांगो के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस का प्रकोप बेहद गंभीर रूप अख्तियार करता जा रहा है। कांगो के संचार मंत्रालय द्वारा रविवार को सोशल मीडिया पर जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार स्थिति भयावह है। देश में इबोला वायरस के कुल संदिग्ध मामलों की संख्या अब बढ़कर 904 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस घातक बीमारी के कारण अब तक 119 संदिग्ध मौतें दर्ज की हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दुनिया भर के देश अपनी सीमाओं पर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।
अस्पतालों को निर्देश
कांगो में उत्पन्न हुए इस स्वास्थ्य संकट को देखते हुए भारत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इबोला वायरस को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी प्रादेशिक सरकारों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बीमारी को लेकर सख्त निगरानी बढ़ाएं। इसके साथ ही देश भर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की तैयारियों को परखने और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की चिकित्सा जांच तेज करने के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य प्रणाली को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बीमारी के मुख्य लक्षण
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आम जनता और डॉक्टरों की जानकारी के लिए इबोला के प्रमुख लक्षणों की सूची साझा की गई है। मंत्रालय के अनुसार इस वायरस से संक्रमित होने पर मरीज को सबसे पहले तेज बुखार और शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्ति की मांसपेशियों में तेज दर्द, असहज करने वाला सिरदर्द और गले में गंभीर खराश होने लगती है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है मरीज को उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आते हैं और उसकी आंखें पूरी तरह लाल हो जाती हैं।
पूर्व का घटनाक्रम
इस वर्तमान स्वास्थ्य संकट से पहले कांगो के अधिकारियों ने जो आंकड़े जारी किए थे, वे भी बेहद चिंताजनक थे। पूर्व में देश के भीतर इबोला वायरस के 700 से ज्यादा संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके थे। उस शुरुआती दौर में अधिकारियों के पास 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की पुख्ता जानकारी सामने आई थी। इन तमाम मामलों की जांच में यह पाया गया कि इबोला के अधिकतर मामले मुख्य रूप से कांगो के इतुरी प्रांत से जुड़े हुए थे। इसी विशेष क्षेत्र में इस खतरनाक वायरस का सबसे घातक और जानलेवा प्रकोप देखने को मिला था।
यात्रियों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार द्वारा जारी स्वास्थ्य सलाह में यात्रियों के लिए कड़े नियम और अनिवार्य दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार ने कहा है कि इबोला से प्रभावित देशों से सीधे आने वाले अथवा इन देशों के रास्ते भारत पहुंचने वाले यात्रियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यदि किसी भी यात्री में इबोला संक्रमण का कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो उसे इमिग्रेशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही वहां तैनात स्वास्थ्य अधिकारियों को तुरंत इसकी सूचना देनी होगी। ऐसा न करने पर इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई की जाएगी। हवाई अड्डों पर इस संबंध में लगातार उद्घोषणाएं की जा रही हैं।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्र
भारत के चिकित्सा महानिदेशालय यानी DGHS की ओर से जारी स्वास्थ्य सलाह में तीन प्रमुख देशों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इस आधिकारिक सूची में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान से भारत आने वाले हवाई यात्रियों का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इन तीनों ही अफ्रीकी देशों को इबोला संक्रमण के मामले में हाई रिस्क वाले देशों की श्रेणी में रखा है। हालांकि डब्लूएचओ का कहना है कि इसके वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा अभी काफी कम है। फिर भी भारत सरकार अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर पर कोई ढील नहीं देना चाहती है।





































