हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है, अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह विशेष महीना हर तीन साल में केवल एक बार आता है और पूर्ण रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस पवित्र मास की पूर्णिमा का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, जप-तप और उपायों को सामान्य दिनों की तुलना में कई हजार गुना अधिक फलदायी माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास की पूर्णिमा 30 मई, दिन शनिवार को पड़ रही है। वहीं, उदया तिथि की मान्यताओं के अनुसार स्नान और दान-पुण्य की विशेष पूर्णिमा 31 मई को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इस पावन अवसर पर किए गए कुछ बेहद सरल और सात्विक उपाय जीवन में धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में बहुत मदद करते हैं।
पूर्णिमा पर बन रहा है अत्यंत शुभ महा-संयोग
31 मई को पड़ने वाली अधिक मास पूर्णिमा के दिन ‘रवि योग’ का अत्यंत शुभ निर्माण हो रहा है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद मंगलकारी और शक्तिशाली माना गया है। इस शुभ अवधि के दौरान किए गए सभी धार्मिक कार्य और पूजा-अर्चना से जीवन के कई गंभीर दोष स्वतः ही दूर हो जाते हैं और सफलता के नए रास्ते खुलते हैं। इसके साथ ही, इस दिन चंद्रमा और देवगुरु बृहस्पति की शुभ स्थिति भी इस पर्व को और अधिक विशेष तथा प्रभावशाली बना रही है।
हल्दी से करें ये चमत्कारी उपाय
पूर्णिमा के दिन प्रातः काल स्नान-ध्यान के बाद एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा सा पवित्र गंगाजल व एक चुटकी पिसी हुई हल्दी मिला लें। इस अभिमंत्रित जल को अपने घर के मुख्य द्वार पर अच्छी तरह से छिड़कें और उसी हल्दी से दरवाजे के दोनों ओर शुभ ‘स्वास्तिक’ का चिह्न बनाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अचूक उपाय से घर की हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा तुरंत दूर होती है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा अपार समृद्धि का प्रवेश होता है।
मानसिक शांति के लिए चंद्र देव को दें अर्घ्य
पूर्णिमा तिथि का सीधा संबंध चंद्र देव से माना जाता है, इसलिए इस दिन रात के समय चंद्र देव की विशेष पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है। रात्रि में जब चंद्रमा पूर्ण रूप से निकल आए, तो उन्हें शुद्ध जल, कच्चा दूध, अक्षत (साबुत चावल) और सफेद फूल मिलाकर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय पूरे भक्ति-भाव से “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का निरंतर जाप करें। ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है, किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र देव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
पीपल और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का महत्व
पूर्णिमा के पावन दिन पर पीपल के पेड़ की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करना भी बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाने से आस-पास की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
वहीं, धन लाभ के लिए घर के पूजा स्थल या मंदिर में धन की देवी मां लक्ष्मी को 11 पीली कौड़ियां और मखाने का भोग अवश्य अर्पित करें। ऐसी मान्यता है कि पूजा संपन्न होने के बाद इन अभिमंत्रित पीली कौड़ियों को एक लाल रंग के साफ कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर सुरक्षित रख देने से घर में स्थायी बरकत आती है और जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती।





































