ओडिशा विधानसभा के उपाध्यक्ष के नाम पर सरकारी कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस गंभीर मामले के प्रकाश में आते ही पूरे राज्य के प्रशासनिक हलकों में अचानक हड़कंप मच गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में संलिप्त एक असिस्टेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। इस धोखाधड़ी की आधिकारिक शिकायत डिप्टी स्पीकर के निजी सचिव द्वारा राजधानी के पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में विभाग के दो सहायक कार्यकारी इंजीनियरों को मुख्य रूप से नामजद आरोपी बनाया गया है।
गिरफ्तारी और ट्रांजिट – गिरफ्तार किए गए आरोपी अधिकारी लक्ष्मण हेम्ब्रम के खिलाफ पुलिस ने पुख्ता सबूतों के आधार पर कार्रवाई की है। वह क्योंझर जिले के हरिचंदनपुर क्षेत्र में असिस्टेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के महत्वपूर्ण पद पर तैनात होकर अपनी सेवाएं दे रहा था। स्थानीय पुलिस ने आरोपी को उसके कार्यक्षेत्र से गिरफ्तार किया और तुरंत अपनी कस्टडी में ले लिया है। इसके बाद मामले की आगे की कानूनी जांच और गहन पूछताछ के लिए उसे भुवनेश्वर लाया गया है। पुलिस कस्टडी में लेकर आरोपी से इस पूरे रैकेट के बारे में बारीकी से जानकारी जुटा रही है।
सह-आरोपी की तलाश – इस पूरे फर्जी दस्तावेज तैयार करने के षड्यंत्र में एक महिला सह-आरोपी की भूमिका भी पूरी तरह उजागर हुई है। इस मामले की दूसरी आरोपी मोनालिसा बेहरा है जो क्योंझर जिले के ही बांसपाल ब्लॉक में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। पुलिस के अनुसार मामला दर्ज होने की भनक लगते ही वह महिला अधिकारी अपने स्थान से तुरंत फरार होने में कामयाब रही। स्थानीय पुलिस प्रशासन अब उसकी धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार सघन छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। पुलिस का दावा है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे षड्यंत्र के कई अन्य छिपे राज खुलेंगे।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं – भुवनेश्वर जोन-1 के एसीपी रमेश चंद्र बिसोई ने इस मामले में चल रही कानूनी कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी लक्ष्मण हेम्ब्रम को कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं के तहत जालसाजी और धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। एसीपी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दस्तावेजों की जालसाजी के खेल में अन्य बाहरी लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस विभाग इस मामले में संलिप्त किसी भी दोषी व्यक्ति को कतई बख्शने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।
फर्जी लेटरहेड का खेल – इस पूरे मामले की जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के काम करने के तरीके के बारे में पता चला है। जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आरोपियों ने विधानसभा का एक नकली आधिकारिक लेटरहेड बकायदा तैयार किया था। इस नकली लेटरहेड के ऊपर डिप्टी स्पीकर भवानी शंकर भोई के कथित तौर पर हूबहू फर्जी हस्ताक्षर भी बनाए गए थे। इसी जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करके वे विभिन्न सरकारी विभागों में मनचाहे तबादलों की सिफारिशें भेजने का काम कर रहे थे। उपाध्यक्ष के निजी सचिव की सतर्कता के कारण ही समय रहते इस बड़े फर्जी लेटरहेड के खेल का पर्दाफाश हो सका।
षड्यंत्र की गहरी जांच – कैपिटल थाने की पुलिस अब इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र के सभी पहलुओं की बहुत ही बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह फर्जी दस्तावेज असल में किसने और कहां तैयार किए थे। इसके साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इन जाली सिफारिशी पत्रों को राज्य के किस-किस विभाग और जगह भेजा गया था। पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब करने के लिए जांच अभी पूरी तरह जारी है। आगामी दिनों में जैसे-जैसे पुलिस की यह जांच आगे बढ़ेगी, इसमें कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
































