ईरान और ओमान के बीच हाल ही में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक संपन्न हुई है जिसमें कई अहम सामरिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के बीच मस्कट में हुई इस खास मुलाकात में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि होर्मुज में ‘बिना शुल्क आवाजाही’ को लेकर उनके बीच एक सकारात्मक सहमति बन गई है। ओमानी विदेश मंत्री अल-बुसैदी ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर दोनों देशों की बहुत ही रचनात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और बिना शुल्क आवाजाही के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को भी इस अहम बैठक के दौरान पूरी तरह से दोहराया है।
सीजफायर पर लेबनानी नागरिकों को भरोसा नहीं दक्षिणी लेबनान में इस वक्त युद्धविराम तो कायम है लेकिन वहां के आम नागरिकों को इजरायल की नीयत पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं हो रहा है। बेरूत के समुद्र किनारे अस्थाई टेंट में जीवन बिता रहे बेघर लोगों का साफ तौर पर कहना है कि उन्हें इस बात पर गहरा शक है कि यह सीजफायर टिक पाएगा। इन विस्थापित लोगों का कहना है कि वे दक्षिणी लेबनान के हुला शहर में स्थित अपने घरों की तरफ तभी लौटेंगे जब उन्हें बताया जाएगा कि रास्ता पूरी तरह खुल गया है। नागरिकों का कहना है कि उन्हें इस मौजूदा सीजफायर पर इसलिए भरोसा नहीं है क्योंकि इजरायल हमेशा से ही धोखेबाज रहा है और वह अपनी बातों पर कायम नहीं रहता। जब तक उन्हें अपनी पूरी सुरक्षा और शांति का पक्का यकीन नहीं हो जाता, वे अपने नष्ट हो चुके इलाकों में वापस जाने का जोखिम बिल्कुल भी नहीं उठाएंगे।
नेतन्याहू का लेबनान में डटे रहने का ऐलान लेबनान के लोगों की आशंकाओं के बीच ही इजरायल के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट बयान सामने आया है जो चिंता बढ़ाने वाला है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और जनरल स्टाफ के प्रमुख एयाल जमीर ने लेबनान के मौजूदा हालात पर एक संयुक्त और अहम बयान जारी किया है। इन तीनों शीर्ष अधिकारियों ने एक सुर में साफ कर दिया है कि इजरायली सेना फिलहाल लेबनान की धरती से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने ऐलान किया है कि इजरायली सैनिक लेबनान में पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जगह पर डटे रहेंगे और वहां अपनी सैन्य मौजूदगी को लगातार बनाए रखेंगे। इस कड़े बयान से यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और शांति की राह अभी भी बहुत लंबी है।
गालिबाफ ने स्विट्जरलैंड दौरे का किया बचाव ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका के साथ बातचीत करने के फैसले की आलोचना करने वाले अपने घरेलू विरोधियों को बहुत ही करारा जवाब दिया है। उन्होंने अपने विरोधियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका समूह लेबनान में इजरायल द्वारा किए जा रहे भयंकर खून-खराबे को तुरंत रोकने के लिए ही स्विट्जरलैंड गया था। गालिबाफ ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने कुछ लोगों को यह कहते हुए सुना कि काश एयरपोर्ट बंद होता ताकि उनकी टीम बातचीत करने के लिए स्विट्जरलैंड न जा पाती। इन आलोचकों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी टीम बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड नहीं गई होती, तो लेबनान में मुसलमानों और शियाओं का और भी ज्यादा खून बहता। उनके इस बयान से यह जाहिर होता है कि ईरान इस कूटनीतिक बातचीत को लेबनान की सुरक्षा और शांति के लिए बेहद जरूरी मानता है।
अमेरिका से कृषि उत्पाद खरीदने पर ईरान का रुख ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती ने अमेरिका से सामान खरीदने की शर्तों पर देश की नीति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। हेम्मती ने स्पष्ट रूप से बताया है कि ईरान पर अमेरिका से कृषि उत्पाद या कोई अन्य सामान खरीदने की कोई कानूनी मजबूरी या दबाव नहीं है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते में केवल यह कहा गया है कि शुरुआती 6 अरब डॉलर का इस्तेमाल ‘बुनियादी सामान और दवाएं’ खरीदने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर अमेरिकी सामान की कीमत और गुणवत्ता दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में काफी बेहतर है, तो ईरान को उसे खरीदने में कोई आपत्ति नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि ईरान केवल अपनी आर्थिक सुविधा और मुनाफे के आधार पर ही अमेरिका से किसी भी तरह की खरीदारी करेगा।
पेंटागन ने मांगा 80 अरब डॉलर का बजट इस पूरे क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका का रक्षा विभाग (पेंटागन) एक बहुत ही बड़ी वित्तीय तैयारी करने में पूरी तरह से जुट गया है। पेंटागन ने शीर्ष सीनेटरों को आधिकारिक तौर पर बताया है कि उसे ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी युद्ध का खर्च उठाने के लिए लगभग 80 अरब डॉलर की भारी भरकम जरूरत है। यह विशाल रकम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले से ही मांगे जा रहे बड़े सैन्य खर्च के बिल्कुल अलग और अतिरिक्त है। हालांकि व्हाइट हाउस के मैनेजमेंट और बजट ऑफिस ने इस भारी राशि के लिए अभी तक कांग्रेस से कोई भी औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ कैपिटल हिल में सांसदों के साथ लगातार अहम बैठकें कर रहे हैं ताकि इस विशाल युद्ध बजट के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाया जा सके।





































