जाने-माने जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk अपनी कुछ प्रमुख मांगों को लेकर पिछले काफी दिनों से लगातार अपना प्रदर्शन कर रहे थे। वे वर्तमान शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मुख्य मांग को लेकर अपना कड़ा विरोध खुलकर जता रहे थे। इसी मुख्य मांग को लेकर वे पिछले बीस दिनों से Jantar Mantar पर अपनी लंबी भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। उनके इस कड़े विरोध प्रदर्शन को समाज के विभिन्न वर्गों और उनके तमाम समर्थकों का पूरा साथ मिल रहा था। वे अपनी इस मांग पर पूरी तरह से अड़े हुए थे और बिना नतीजे के पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थे।
संसद मार्च की योजना: उनका यह अचानक अस्पताल में भर्ती होने का पूरा घटनाक्रम एक बहुत ही बड़े प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले हुआ है। आने वाली बीस जुलाई को वे अपने अनगिनत समर्थकों के साथ एक बहुत बड़े संसद मार्च का आयोजन करने वाले थे। इस अहम मार्च में वे भारी संख्या में अपने समर्थकों के साथ पैदल ही संसद भवन की तरफ कूच करने वाले थे। उनके अस्पताल जाने की यह दुखद घटना इस प्रस्तावित बड़े मार्च से ठीक दो दिन पहले ही घटित हुई है। इस अचानक हुए स्वास्थ्य बिगड़ाव ने उनके आगामी संसद मार्च की पूरी योजना पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
धरना स्थल खाली कराया: उनके अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन ने धरना स्थल पर अपनी कार्रवाई बहुत ज्यादा तेज कर दी है। Delhi Police ने अपनी पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए Jantar Mantar से सभी प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह से हटा दिया है। वहां की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बहुत बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल भी तुरंत तैनात किया गया है। सुरक्षाबलों ने वहां मौजूद सभी प्रदर्शनकारियों से धरना स्थल को तत्काल प्रभाव से खाली करने को कड़ाई से कहा है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद उस पूरे इलाके को एक बड़े सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
अदालत का आदेश: इस पूरी कार्रवाई को लेकर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना आधिकारिक बयान भी मीडिया में जारी किया है। New Delhi के DCP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान जारी कर पुलिस की इस पूरी कार्रवाई का कारण बताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि यह पूरी कार्रवाई Delhi High Court के एक सीधे आदेश के बाद ही की गई है। इसके साथ ही चिकित्सा विशेषज्ञों की सख्त सलाह को भी इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा मुख्य आधार बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने के कारण ही उन्हें आवश्यक इलाज के लिए सुरक्षित अस्पताल ले जाना पड़ा है।
प्रदर्शनकारियों का हंगामा: पुलिस अधिकारी ने बताया कि अस्पताल ले जाने की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस को कुछ बाधाएं भी उत्पन्न हुई थीं। अदालत के सख्त आदेश का पालन करते समय वहां मौजूद कुछ उग्र प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। समर्थकों के इस अचानक किए गए विरोध के कारण धरना स्थल पर थोड़ी देर के लिए हल्की अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। लोग अपने नेता को ले जाए जाने का लगातार कड़ा विरोध कर रहे थे जिससे पुलिस को काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस बलों और वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के बीच थोड़ी बहुत तीखी नोकझोंक भी साफ तौर पर देखने को मिली थी।
पुलिस का संयम: भारी विरोध और अफरा-तफरी के बावजूद वहां मौजूद पुलिस बलों ने स्थिति को पूरी तरह से बिगड़ने से बचा लिया। वरिष्ठ अधिकारी के बयान के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों ने इस बेहद तनावपूर्ण माहौल में भी अपना पूरा संयम और धैर्य बरता। किसी भी तरह के कड़े बल प्रयोग से बचते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर वहां से रास्ते से हटाया। प्रशासन ने इस पूरी तनावपूर्ण कार्रवाई को अंततः बेहद सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करने में बड़ी सफलता पाई। इसके बाद बिना किसी भी नागरिक को नुकसान पहुंचाए उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से सही सलामत अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया गया।


























































