अमेरिकी सेना द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों के जवाब में ईरान की सेना और आईआरजीसी ने अलग-अलग सैन्य अभियानों की घोषणा की है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनकी नौसैनिक संपत्तियों पर भीषण जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसने कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमले किए हैं। सरकारी प्रसारक आईरिब के मुताबिक ईरानी सेना ने बताया कि उसके ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के १३वें चरण में नौसेना ने एक बड़ा हमला अंजाम दिया है।
क्रूज मिसाइल से हमला: ईरानी नौसेना ने उत्तरी हिंद महासागर में मौजूद एक अमेरिकी युद्धपोत पर तट से समुद्र में मार करने वाली क्रूज मिसाइल दागी है। ईरान का दावा है कि इस मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी जहाज को मजबूरन पीछे हटना पड़ा और अमेरिकी सैनिकों में भारी खौफ फैल गया है। इसके साथ ही आईआरजीसी ने कहा कि उसके ‘ऑपरेशन नस्र-२’ के १६वें चरण में कतर स्थित अल उदैद एयर बेस पर भीषण हमला किया गया। इस हमले में लंबी दूरी के रडार सिस्टम और अमेरिका के कई रणनीतिक हवाई ईंधन भरने वाले विमानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
कुवैत और जॉर्डन में तबाही: आईआरजीसी ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपने हमले जारी रखे तो आगे भी ऐसी ही खतरनाक जवाबी कार्रवाई की जाएगी। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि ‘ऑपरेशन नस्र-२’ के १५वें चरण में कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया है। इस हमले में अमेरिका के हिमार्स मिसाइल लॉन्चर और कई घातक मिसाइलों को नष्ट करने की बात कही गई है। इसके अलावा ड्रोन और मिसाइलों से उन गुप्त स्थानों को भी निशाना बनाया गया है जहां अमेरिकी सैनिक भारी संख्या में मौजूद थे।
बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रयोग: ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर तैनात हवाई ईंधन भरने वाले विमानों और लड़ाकू विमानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। उसका कहना है कि इस हमले में कई अमेरिकी विमान पूरी तरह नष्ट हुए हैं और कई अन्य को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही ईरान द्वारा जॉर्डन की आम जनता और वहां की सेना से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का पुरजोर विरोध करने की अपील भी की गई है। आईआरजीसी के मुताबिक उसकी नेवी ने ओमान के घानेम क्षेत्र में अमेरिकी एयर कंट्रोल रडार को भी निशाना बनाया है।
रणनीतिक रडार किए नष्ट: ओमान के सलामेह रॉक्स स्थित अमेरिकी समुद्री नियंत्रण रडार को भी ईरानी बलों ने पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इन तमाम हमलों के बीच ईरान ने यह दावा भी किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब भी पूरी तरह से ईरानी नेवी का कंट्रोल बना हुआ है। एक अन्य आधिकारिक बयान में आईआरजीसी ने कहा कि ‘ऑपरेशन नस्र-२’ के ११वें चरण के तहत एक और गुप्त कार्रवाई की गई। इसके तहत सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र में स्थित अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंटर पर अचानक बेहद भीषण हमला किया गया।
सैनिकों को पकड़ने का दावा: सीरिया में हुए इस हमले में अमेरिकी रडार सिस्टम और कई सैन्य हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिए गए तथा अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया गया। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने ईरान के इस बड़े दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सेंटकॉम ने स्पष्ट रूप से कहा कि अल-तनफ में किसी भी अमेरिकी सैनिक की न तो मौत हुई है और न ही किसी को बंदी बनाया गया है। दूसरी तरफ ईरानी सेना ने कहा कि ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के १२वें चरण में अराश ड्रोन के जरिए कुवैत में रसद सहायता केंद्रों को निशाना बनाया गया है।


























































