भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने राज्य की राजनीति में एक नया और बड़ा तूफान ला दिया है। उत्तर प्रदेश के भीतर पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर पूरी तरह से आमने-सामने आ गए हैं। इस पूरे विवाद में दोनों तरफ से लगातार नए-नए और विवादित बयानबाजी का दौर बड़े स्तर पर जारी है। कांग्रेस पार्टी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए सत्ता पक्ष पर अपने तीखे हमले काफी तेज कर दिए हैं। इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु अब राज्य के एक बड़े नेता द्वारा दिया गया हालिया बयान बन गया है।
दीपक सिंह का सतीश महाना पर तंज कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता दीपक सिंह ने यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान पर कड़ा तंज कसा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सतीश महाना इस पूरे मामले में बहुत ही ज्यादा सौभाग्यशाली इंसान हैं। उनका यह सौभाग्य है कि उनके द्वारा दिए गए पैसे की मंदिर परिसर से बिल्कुल भी चोरी नहीं हुई है। दीपक सिंह का यह बयान महाना के उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने अपनी आस्था का जिक्र किया था। कांग्रेस नेता ने महाना के बयान को आधार बनाकर यह साबित करने की कोशिश की है कि चोरी की घटना बिल्कुल सच है।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान को बनाया आधार कांग्रेस नेता ने अपनी आक्रामक रणनीति के तहत विधानसभा अध्यक्ष के पद की गरिमा और शक्ति का खुलकर जिक्र किया है। दीपक सिंह ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक राज्य में वहां का विधानसभा अध्यक्ष सबसे सर्वोच्च स्थान रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दिए गए आदेश को अंतिम रूप से सही और बाध्यकारी माना जाता है। इसी संवैधानिक शक्ति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब तो स्वयं सतीश महाना ने ही चंदा चोरी की बात को सार्वजनिक तौर पर मान लिया है। कांग्रेस का तर्क है कि जब अध्यक्ष ने खुद चोरी की पुष्टि कर दी है तो सरकार को अब कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई की मांग इस गंभीर मुद्दे पर अपनी आवाज को बुलंद करते हुए दीपक सिंह ने सीधे तौर पर चंपत राय का नाम लिया है। उन्होंने राज्य सरकार से यह सख्त मांग की है कि चंपत राय समेत सभी चढ़ावा चोरों को तुरंत पकड़कर जेल भेजा जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि भगवान राम के पवित्र मंदिर को इन लालची चढ़ावा चोरों के चंगुल से हर हाल में मुक्ति दिलानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने इस बात पर बहुत जोर दिया कि लोगों की आस्था के नाम पर हुए इस बड़े धोखे की उचित सजा मिलनी ही चाहिए। उनकी इस बेहद कड़ी मांग के बाद राज्य का सियासी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है।
हाई कोर्ट के जज की घटना का जिक्र अपनी मांग को और अधिक मजबूत करने के लिए दीपक सिंह ने राज्य के इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने मीडिया को याद दिलाया कि इसी राज्य ने अतीत में विधानसभा अध्यक्ष के आदेश का पालन करते हुए एक सख्त कदम उठाया था। उस समय अध्यक्ष के एक आदेश के बाद सीधे हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज को भी बिना देरी किए तलब कर लिया गया था। इस पुरानी ताकतवर मिसाल को देते हुए उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या अब विधानसभा अध्यक्ष के इतने स्पष्ट बयान के बाद भी चढ़ावा और चंदा चोर जेल जाने से आसानी से बच जाएंगे।
सतीश महाना का वह विवादित बयान इस पूरे राजनीतिक बखेड़े की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के एक अजीबोगरीब बयान से हुई थी जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। सतीश महाना ने अपने वायरल वीडियो में कहा था कि जिनका पैसा चोरी हुआ शायद उन्होंने सच्ची श्रद्धा और आस्था से अपना दान नहीं किया था। इसके विपरीत, उन्होंने अपने दान को पूरी तरह से सही ठहराते हुए कहा कि हमने पूरे मन और आस्था के साथ मंदिर को दान किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी सच्ची श्रद्धा के कारण उनका पैसा सुरक्षित रूप से भव्य मंदिर निर्माण के कार्य में लगा है। सतीश महाना का यही विवादित बयान अब राज्य सरकार के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक मुसीबत का मुख्य कारण बन गया है।

























































