संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने गिरफ्तार किए गए जॉइंट अवामी Action कमेटी के नेताओं के अधिकारों की वकालत की है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए सभी नागरिक नेताओं को तुरंत कानूनी सहायता और वकील से मिलने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही इन नेताओं को अपने परिवार के सदस्यों से नियमित रूप से संपर्क करने की पूरी अनुमति दी जानी चाहिए। प्रशासन को इन सभी बंदियों के लिए कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और उचित न्याय पाने के अधिकार की पूरी रक्षा करनी होगी। किसी भी लोकतांत्रिक या कानूनी व्यवस्था में बंदियों के बुनियादी अधिकारों का हनन करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अमानवीय माना जाता है।
इंटरनेट बंदी पर चिंता: संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों पर गहरी चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार तनावपूर्ण माहौल के बीच इंटरनेट को पूरी तरह बंद करना एक बेहद चिंताजनक कदम है। डिजिटल संचार के इस दौर में इंटरनेट का बंद होना नागरिकों के दैनिक जीवन और उनकी सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इस तरह के प्रतिबंधों से क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की सही जानकारी बाहरी दुनिया तक पहुंचने में भी भारी बाधा आती है। संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
सूचना के अधिकार का हनन: मानवाधिकार संस्था के बयान में कहा गया है कि इंटरनेट बंद होने से लोगों के बुनियादी अधिकारों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे आम नागरिकों के सूचना पाने, उसे दूसरों के साथ साझा करने और अपनी बात रखने के अधिकार पर असमान रूप से असर पड़ता है। संकट के समय में लोगों को सही और सटीक जानकारी मिलना उनका मौलिक अधिकार है जिसे किसी भी स्थिति में रोका नहीं जाना चाहिए। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र ने उच्च अधिकारियों से पूरे अशांत क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने की पुरजोर अपील की है। संचार माध्यमों को चालू रखकर ही अफवाहों को रोका जा सकता है और स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।
सार्थक राजनीतिक संवाद: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने क्षेत्र के संकट को सुलझाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की गंभीर समस्याओं और उनकी जायज शिकायतों का स्थाई समाधान निकालने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच एक सार्थक और सभी को साथ लेकर चलने वाला राजनीतिक संवाद शुरू किया जाना चाहिए। जब तक सभी पक्षों की बातों को ध्यान से नहीं सुना जाएगा तब तक असंतोष को दूर करना पूरी तरह असंभव होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह दमनकारी नीतियों को छोड़कर प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर बातचीत का रास्ता चुने।
स्थायी शांति का मार्ग: वोल्कर तुर्क का यह दृढ़ मानना है कि केवल बातचीत और आपसी संवाद के जरिए ही इस क्षेत्र में बदलाव लाया जा सकता है। उनका कहना है कि संवाद के माध्यम से ही क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति को पूरी तरह से बहाल किया जा सकता है। हिंसा और बल प्रयोग से किसी भी समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सकता बल्कि इससे तनाव और ज्यादा बढ़ जाता है। शांति बहाली के लिए सरकार और नागरिक संगठनों को एक दूसरे पर भरोसा जताते हुए सकारात्मक रुख अपनाना होगा। संयुक्त राष्ट्र ने उम्मीद जताई है कि सभी पक्ष समझदारी दिखाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से मसलों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
चुनावों के बीच अशांति: गौरतलब है कि इस क्षेत्र में आगामी 27 जुलाई को होने वाले क्षेत्रीय विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। जून महीने से शुरू हुई इस अशांति और हिंसक प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों बेगुनाह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तानी फौज द्वारा किए जा रहे जुल्मों के खिलाफ जॉइंट अवामी Action कमेटी के नेतृत्व में लोग सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने इस नागरिक संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाकर उसके नेताओं को जेल में बंद कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव से ऐन पहले पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है।


























































