बाराबंकी क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद खतरे के निशान को पार कर गया है। जलस्तर में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। जिला प्रशासन की विभिन्न टीमें प्रभावित गांवों और उनसे जुड़े मजरों की स्थिति पर निरंतर अपनी नजर रख रही हैं। नदी के बढ़ते जलस्तर से तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
दो तहसीलों में स्थिति गंभीर: जिले के जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए अपना बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि देर रात तक जिले की कुल 12 ग्राम पंचायतें और कई मजरे बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके थे। जिले की दो प्रभावित तहसीलों में बाढ़ के हालात पर चौबीसों घंटे प्रशासनिक स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान समय में घाघरा नदी का जलस्तर अपने निर्धारित खतरे के निशान से लगभग 25 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर में अगर और वृद्धि होती है तो प्रभावित गांवों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
राहत किट और भोजन वितरण: जिलाधिकारी के अनुसार प्रशासनिक टीमें बाढ़ की जमीनी स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पूरी तरह मुस्तैद हैं। बाढ़ की चपेट में आए बेघर और प्रभावित लोगों तक सभी जरूरी राहत सामग्रियां लगातार पहुंचाई जा रही हैं। भूख से प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन की तरफ से लंच पैकेट तैयार करवाकर वितरित किए जा रहे हैं। इलाके में फंसे लोगों को निकालने और राहत देने के लिए बचाव कार्य लगातार बिना रुके चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कुल मिलाकर करीब 6 हजार राहत किट प्रभावित ग्रामीणों के बीच बांटे जा चुके हैं।
गर्भवती महिलाओं पर विशेष नजर: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें लगातार नावों के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रही हैं। चिकित्सकों द्वारा खासतौर पर गांव की गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसी भी आपात स्थिति में इन संवेदनशील वर्गों को तुरंत डॉक्टरी इलाज मिल सके। इसके लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों को भी अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
मवेशियों हेतु नावों की व्यवस्था: बाढ़ के इस भयावह माहौल में ग्रामीणों के साथ-साथ उनके पालतू पशुओं की जान बचाना भी एक कठिन कार्य साबित हो रहा है। पशुओं की सुरक्षा के संदर्भ में डीएम ने जानकारी दी कि जो पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित जगह ले जाना चाहते हैं, उन्हें बोट मिल रही है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही इन बोटों के माध्यम से भारी-भरकम पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक ले जाना आसान हो गया है। बाढ़ के पानी के बीच फंसे पशुओं को बचाने के लिए स्थानीय गोताखोरों और राहत टीमों की मदद ली जा रही है। पशुपालकों को आश्वस्त किया गया है कि उनके मवेशियों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं।
चारे की पर्याप्त उपलब्धता: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जो लोग अपने पशुओं को अपने पास ही रखना चाहते हैं, उनके लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। ऐसे जिद करने वाले या असहाय लोगों के लिए जिला प्रशासन की तरफ से पशुओं के चारे की मुफ्त व्यवस्था कराई जा रही है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि जिला प्रशासन पल-पल बदलते बाढ़ के हालात पर अपनी सतर्क दृष्टि बनाए हुए है। क्षेत्र में जैसी स्थितियां बन रही हैं, उसी के अनुरूप राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपस में तालमेल बनाकर पीड़ितों की हर संभव मदद करें।












































