हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने कथित तौर पर मंदिर परिसर में खुद को आग लगा ली। घटना शाम करीब आठ बजे की बताई जा रही है। राजस्थान निवासी 36 वर्षीय रामदास पुत्र गजानंद ने कथित तौर पर अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। देखते ही देखते युवक आग की लपटों से घिर गया और जमीन पर गिर पड़ा। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने घटना को देखा तो तत्काल उसकी मदद के लिए आगे आए और पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। आग बुझने तक युवक गंभीर रूप से झुलस चुका था और उसके शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जल गया था।
गंभीर हालत में अस्पताल आग बुझाने के बाद घायल युवक को तत्काल चिकित्सा सहायता देने की कोशिश की गई। घटना की सूचना मिलने पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और युवक को अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर बताई। युवक के शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस जाने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घटना के बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति रही। जिस जगह यह घटना हुई, वहां आग लगने के कारण अचानक बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की आशंका भी बन सकती थी। खासकर धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच इस तरह की घटना तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।
कहां का रहने वाला है युवक पुलिस के अनुसार घायल युवक की पहचान रामदास पुत्र गजानंद के रूप में हुई है। वह जहालबाड़, राजस्थान का निवासी बताया गया है और उसकी उम्र 36 वर्ष है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह ज्वालामुखी मंदिर में किस उद्देश्य से पहुंचा था और घटना से पहले उसकी गतिविधियां क्या थीं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वह मंदिर परिसर में अकेले आया था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था। इसके साथ ही घटना में इस्तेमाल किए गए पदार्थ की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में पेट्रोल का जिक्र सामने आया है, लेकिन पुलिस यह भी जांच कर रही है कि युवक ने वास्तव में पेट्रोल का इस्तेमाल किया था या किसी अन्य ज्वलनशील पदार्थ का।
कई पहलुओं पर पड़ताल घटना के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है। युवक ने अपने ऊपर आग क्यों लगाई, उसका उद्देश्य क्या था और घटना से ठीक पहले वहां क्या हुआ, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि युवक मंदिर में कब पहुंचा था और उसके साथ कौन-कौन लोग संपर्क में थे। घटना के कारणों को लेकर अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। युवक की पहचान सामने आने के बाद उसके निवास और अन्य संबंधित जानकारी के आधार पर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य मामले की जांच में फॉरेंसिक टीम को भी शामिल किया गया है। घटना के बाद टीम मंदिर परिसर पहुंची और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस अब इन साक्ष्यों के आधार पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि आग किस तरह लगाई गई और मौके पर कौन-कौन सी परिस्थितियां मौजूद थीं। ज्वलनशील पदार्थ से संबंधित जानकारी और घटनास्थल की स्थिति भी जांच का हिस्सा है। पुलिस के सामने युवक के इस कदम की वजह जानना सबसे अहम पहलुओं में से एक है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के वक्त युवक के आसपास मौजूद लोगों ने क्या देखा और आग लगने के बाद बचाव की कार्रवाई किस तरह हुई।
सुरक्षा को लेकर सवाल मंदिर परिसर में हुई इस घटना ने भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर आकस्मिक घटनाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि घटना के समय मंदिर में भारी भीड़ मौजूद होती तो आग देखकर श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती थी और इससे नुकसान बढ़ने की आशंका रहती। इससे पहले बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में भगदड़ के दौरान सात महिला श्रद्धालुओं की मौत और 14 लोगों के घायल होने की घटना सामने आ चुकी है। ज्वालामुखी मंदिर की घटना में फिलहाल घायल युवक को गंभीर हालत में टांडा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है और पुलिस तथा फॉरेंसिक टीम मामले की जांच कर रही है। युवक ने यह कदम क्यों उठाया, उसने किस पदार्थ का इस्तेमाल किया और घटना के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।











































