रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड में स्थायी अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थापित करने की संभावना को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी जानकारी दी है। ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि पोलैंड में अमेरिकी सेना का स्थायी अड्डा बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि पोलैंड के राष्ट्रपति कारोले नावरोट्स्की के नेतृत्व में इस दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। ट्रंप के मुताबिक, अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो अड्डे के स्थान की घोषणा बहुत जल्द की जा सकती है। उन्होंने इसे अमेरिका और पोलैंड के बीच गठबंधन के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। पोलैंड लंबे समय से अपने देश में स्थायी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की मांग करता रहा है और रूस से बढ़ते खतरे के बीच इसे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखता है। हालांकि, इस समय तक स्थायी सैन्य अड्डे को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने संभावित स्थानों का किया निरीक्षण ट्रंप ने बताया कि पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने पोलैंड का दौरा किया था और प्रस्तावित सैन्य अड्डे के लिए कई संभावित स्थानों को देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि स्थायी सैन्य मौजूदगी का मुद्दा केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित स्थानों और व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पोलैंड पहले से ही अमेरिका से अपने देश में स्थायी सैन्य मौजूदगी की मांग करता रहा है। जून में पोलैंड के रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि अमेरिकी रक्षा विभाग पोलैंड में स्थायी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के प्रस्ताव को लेकर खुला रुख रखता है, हालांकि उस समय कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था। अमेरिकी रक्षा मंत्री के साथ हुई बातचीत के दौरान यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की समीक्षा का मुद्दा भी सामने आया था। फिलहाल पोलैंड में अमेरिकी सैनिक मुख्य रूप से रोटेशन के आधार पर तैनात किए जाते हैं।
रूस के खतरे के बीच पोलैंड मजबूत कर रहा रक्षा व्यवस्था पोलैंड ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए सैन्य खर्च में काफी वृद्धि की है। उसने अमेरिका से बड़ी मात्रा में हथियार भी खरीदे हैं। रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण स्तर का हमला शुरू किए जाने के बाद पोलैंड ने नाटो के पूर्वी हिस्से में अपनी सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई है। पोलैंड की भौगोलिक स्थिति और यूक्रेन के साथ उसकी सीमा को देखते हुए वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। इसी वजह से पोलैंड अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों की सैन्य मौजूदगी को मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। स्थायी अमेरिकी सैन्य अड्डे की मांग भी इसी व्यापक सुरक्षा नीति का हिस्सा रही है। ट्रंप की ताजा घोषणा के बाद इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है, हालांकि अभी स्थान और औपचारिक मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
टस्क ने रूस के संभावित हाइब्रिड हमले की चेतावनी दी अमेरिकी सैन्य अड्डे की चर्चा के साथ ही पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने रूस की संभावित गतिविधियों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। टस्क ने पोलिश संसद में कहा कि खुफिया आकलनों के अनुसार रूस यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों, जिनमें पोलैंड भी शामिल है, के खिलाफ ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हाइब्रिड हमले की योजना बना सकता है। उन्होंने विशेष रूप से यह आशंका जताई कि रूस किसी घटना के बाद उसे दुर्घटना बताकर नाटो की सामूहिक प्रतिक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है। टस्क के अनुसार, नाटो के पूर्वी हिस्से में किसी सदस्य देश की सीमा में ड्रोन या अन्य हथियार पहुंचने और नुकसान होने के बाद रूस इसे अनजाने में हुई घटना बताने का प्रयास कर सकता है। उनका दावा है कि इससे गठबंधन की एकजुटता पर दबाव डालने की कोशिश हो सकती है।
सीमा पार मार्गों और ड्रोन तकनीक पर भी चिंता टस्क के अनुसार, रूस तेजी से जेट इंजन वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे ड्रोन अधिक ऊंचाई और अधिक गति से उड़ सकते हैं, जिससे वायु रक्षा प्रणालियों के लिए उन्हें समय रहते पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस यूक्रेन और उसके यूरोपीय पड़ोसी देशों के बीच मौजूद सीमा पार मार्गों को निशाना बनाने पर ध्यान दे रहा है। टस्क के मुताबिक, पिछले सप्ताह पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर चार घटनाएं हुईं और यूक्रेन-मोल्दोवा सीमा क्षेत्र में भी पिछले कुछ सप्ताह के दौरान कई घटनाएं सामने आईं। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य यूक्रेन तक पहुंचने वाली सैन्य और अन्य जरूरी सहायता की आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करना हो सकता है। टस्क ने आने वाली सर्दी को भी यूक्रेन के लिए बेहद कठिन बताया और कहा कि रूस यूक्रेन की अर्थव्यवस्था तथा रसद व्यवस्था को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।
अमेरिका और पोलैंड के सैन्य सहयोग का अगला चरण पोलैंड में अभी अमेरिकी सैनिक रोटेशन के आधार पर मौजूद हैं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिकों की तैनाती रही है। मई में कुछ अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पोलैंड और उसके यूरोपीय सहयोगियों में चिंता बढ़ी थी, हालांकि दोनों देशों ने बाद में इसे अस्थायी बदलाव बताया था। अब ट्रंप की ओर से स्थायी अमेरिकी सेना के अड्डे की दिशा में बड़ी प्रगति की जानकारी दिए जाने से यह मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। दूसरी ओर, पोलैंड के प्रधानमंत्री रूस की संभावित गतिविधियों और नाटो की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। इस तरह एक तरफ पोलैंड अपनी रक्षा क्षमता और सहयोगी देशों की सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ स्थायी सैन्य व्यवस्था को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि प्रस्तावित अड्डे का स्थान और अंतिम मंजूरी अभी बाकी है, लेकिन ट्रंप की घोषणा ने अमेरिका-पोलैंड सैन्य सहयोग के अगले चरण को लेकर चर्चा तेज कर दी है।












































