19 सितंबर 2026 को वैदिक ज्योतिष के अनुसार नौ प्रमुख ग्रहों की स्थिति अलग-अलग राशियों और नक्षत्रों में बनी हुई है। सूर्य कन्या राशि में, चंद्रमा धनु राशि में, मंगल और गुरु कर्क राशि में, बुध कन्या राशि में, शुक्र तुला राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में और केतु सिंह राशि में स्थित हैं। इसी दौरान कुछ ग्रहों के आगामी राशि परिवर्तन की तारीखें भी निर्धारित हैं। ग्रहों की वर्तमान स्थिति के साथ उनके नक्षत्र और आने वाले गोचर को समझना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की चाल का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ता है।
ग्रह गोचर एवं नक्षत्र स्थिति चार्ट (19.09.2026)
| क्रम | ग्रह का नाम | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | आगामी राशि परिवर्तन (कब बदलेंगे राशि) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | कन्या | उत्तरा फाल्गुनी | 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 2 | चंद्रमा | धनु | मूल (दोपहर 12:13 / 01:40 AM तक) | 20 सितंबर 2026 को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 3 | मंगल | कर्क | पुनर्वसु | 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 4 | बुध | कन्या | हस्त | 26 सितंबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 5 | गुरु (बृहस्पति) | कर्क | अश्लेषा | 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 6 | शुक्र | तुला | स्वाति | यह अक्टूबर-नवंबर तक तुला राशि में ही गोचर/वक्री रहेंगे। |
| 7 | शनि | मीन | रेवती | लम्बे समय तक इसी राशि में बने रहेंगे। |
| 8 | राहु | कुंभ | धनिष्ठा | इस वर्ष राशि परिवर्तन नहीं है (मंद गति ग्रह)। |
| 9 | केतु | सिंह | मघा | इस वर्ष राशि परिवर्तन नहीं है (मंद गति ग्रह)। |
चंद्रमा की स्थिति और विशेष योग
19 सितंबर को चंद्रमा धनु राशि में संचरण करेंगे। दिन के शुरुआती हिस्से में मूल नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की स्थिति बनेगी। चंद्रमा की यह स्थिति आज बनने वाले महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योगों में भी भूमिका निभाती है। गुरु और चंद्रमा के बीच षडाष्टक संबंध बनने से कुछ राशियों के जातकों को आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस योग का प्रभाव विशेष रूप से वृषभ, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए ध्यान देने योग्य बताया गया है।
इसी समय कर्क राशि में मंगल और गुरु की युति से नीचभंग राजयोग का प्रभाव बना हुआ है। वहीं कन्या राशि में सूर्य और बुध की युति के कारण बुधादित्य योग सक्रिय है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और भावों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। चंद्रमा के धनु राशि में गोचर के साथ गुरु-चंद्रमा के बीच बनने वाला षडाष्टक योग कुछ लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा कर सकता है।
वृषभ राशि पर षडाष्टक योग का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों को इस अवधि में आर्थिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। धन का लेन-देन करते समय भरोसेमंद व्यक्ति को साथ रखना बेहतर रहेगा और बिना पूरी जानकारी के निवेश करने से बचना चाहिए। गलत संगति या गलत सलाह के कारण धन की बर्बादी की स्थिति बन सकती है, इसलिए आर्थिक फैसलों में जल्दबाजी न करें। पारिवारिक जीवन में बड़े-बुजुर्गों के साथ बातचीत करते समय शब्दों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी होगा, क्योंकि छोटी बात विवाद का रूप ले सकती है। इस दौरान माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ उपाय माना गया है।
मंगल गोचर से वृषभ को लाभ
वहीं मंगल का कर्क राशि में गोचर वृषभ राशि के तीसरे भाव में होगा। ज्योतिष में तीसरा भाव साहस, पराक्रम, छोटे भाई-बहनों और यश से संबंधित माना जाता है। मंगल की इस स्थिति से आत्मविश्वास और काम करने की ऊर्जा बढ़ सकती है। लंबे समय से रुके हुए कामों को फिर से गति देने का उत्साह मिलेगा। भाई-बहनों से सहयोग प्राप्त हो सकता है और व्यापार करने वालों की नए लोगों से पहचान बनने के संकेत हैं। नौकरीपेशा जातकों को अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिल सकता है। ससुराल पक्ष से आर्थिक लाभ की संभावना भी बन सकती है, लेकिन इस दौरान कर्ज लेने से बचना बेहतर रहेगा।
उपाय: मंगलवार को मंदिर में चना और गुड़ का दान करें। विवादों से दूरी बनाए रखें। साथ ही षडाष्टक योग के दौरान माता लक्ष्मी की आराधना करना भी लाभकारी माना गया है।
तुला राशि पर षडाष्टक योग का प्रभाव
तुला राशि के जातकों को 20 सितंबर तक आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। बड़ी रकम का निवेश करने में जल्दबाजी न करें। कार्यक्षेत्र में प्रत्येक काम को पूरी सतर्कता के साथ करना जरूरी रहेगा, क्योंकि लापरवाही के कारण आपके काम पर सवाल उठ सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी आवश्यक है और बाहर का तला-भुना भोजन करने से बचना बेहतर रहेगा। आर्थिक या कार्यक्षेत्र से जुड़ा कोई भी फैसला सोच-विचार के बाद ही लें। शिवलिंग पर जल अर्पित करना इस अवधि में उपाय के रूप में किया जा सकता है।
मंगल गोचर से तुला को लाभ
मंगल तुला राशि के दसवें भाव में गोचर करेंगे। दसवां भाव कर्म, करियर और प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस गोचर के दौरान काम के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा मजबूत हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और वरिष्ठ अधिकारी उनके प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे लोगों को नए विकल्प मिलने की संभावना है। पैतृक पक्ष से सकारात्मक समाचार मिलने के संकेत हैं। अचल संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ की संभावना बन सकती है। हालांकि कार्यस्थल पर अनावश्यक विवाद से बचना जरूरी रहेगा।
उपाय: दूध उबालते समय ध्यान रखें कि वह बर्तन से बाहर न गिरे। कार्यस्थल पर बेवजह के विवादों से दूर रहें। षडाष्टक योग के प्रभाव को देखते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करना भी शुभ रहेगा।
मकर राशि पर षडाष्टक योग का प्रभाव
मकर राशि के जातकों के लिए षडाष्टक योग आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला हो सकता है। धन से जुड़ी परेशानियों के कारण कुछ लोगों को मानसिक तनाव भी महसूस हो सकता है। ऐसे समय में योग और ध्यान के माध्यम से मन को शांत रखने की कोशिश करें। नया काम बिना उचित सलाह के शुरू करने से बचें। यदि किसी से कर्ज लिया हुआ है तो उसे चुकाने का दबाव बढ़ सकता है और लेनदारों की ओर से परेशानी सामने आ सकती है। बैंकिंग और बिक्री से जुड़े लोगों को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए और किसी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अपनी मेहनत और प्रयास दोनों बढ़ाने होंगे।
उपाय: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करना भी मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
मंगल गोचर का प्रभाव
ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मविश्वास का कारक ग्रह माना जाता है। 18 सितंबर की शाम 4 बजकर 34 मिनट पर मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और 12 नवंबर की रात 8 बजकर 16 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। कर्क राशि मंगल की नीच राशि मानी जाती है, हालांकि कुंडली के अलग-अलग भावों में मंगल की स्थिति के अनुसार परिणाम बदल सकते हैं। इसी कारण एक ही गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर समान नहीं माना जाता।
कन्या और कुंभ राशि के लिए भी मंगल का गोचर महत्वपूर्ण रहेगा। इन दोनों राशियों के जातकों के लिए मंगल की स्थिति से जुड़े अलग-अलग सकारात्मक अवसर सामने आ सकते हैं।
कन्या राशि पर मंगल गोचर का प्रभाव
कन्या राशि के जातकों के ग्यारहवें भाव में मंगल की स्थिति बनेगी। ग्यारहवां भाव आय, लाभ और संपर्कों से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं। काम के सिलसिले में नए लोगों से संपर्क बनेगा और ये संपर्क आगे चलकर लाभ पहुंचा सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और कारोबार में लाभ बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और किसी खास इच्छा के पूरी होने की संभावना भी बन सकती है। आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुचि बढ़ने के संकेत हैं।
उपाय: जरूरतमंद व्यक्ति को वस्त्र दान करें। केवल तत्काल मिलने वाले लाभ के पीछे भागने के बजाय भविष्य के लक्ष्यों और योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
कुंभ राशि पर मंगल गोचर का प्रभाव
कुंभ राशि के छठे भाव में मंगल का गोचर होगा। छठा भाव प्रतियोगिता, ऋण, शत्रु और चुनौतियों से संबंधित माना जाता है। मंगल की यह स्थिति कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ा सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के सामने नए अवसर आ सकते हैं। समाज में प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ने के संकेत हैं, जो भविष्य में उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि मंगल की ऊर्जा के कारण आग से संबंधित मामलों में सावधानी बरतना जरूरी होगा।
उपाय: मंगलवार को भाई को कोई उपहार दें। अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और उपयोगी कामों में लगाएं तथा बेवजह के विवादों से दूर रहें।
ग्रहों की आगामी चाल का महत्व
आने वाले दिनों में भी कई प्रमुख ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। सूर्य 17 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे, बुध 26 सितंबर को तुला राशि में जाएंगे, गुरु 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और मंगल 12 नवंबर को सिंह राशि में पहुंचेंगे। चंद्रमा 20 सितंबर को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। दूसरी ओर शुक्र तुला राशि में अक्टूबर-नवंबर तक गोचर या वक्री अवस्था में बने रहेंगे। शनि मीन राशि में लंबे समय तक रहेंगे, जबकि राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में इस वर्ष राशि परिवर्तन नहीं करेंगे। इन ग्रहों की चाल में होने वाले बदलावों को ज्योतिष में अलग-अलग राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।












































