सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल पर रविवार को फिर हमला हुआ। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, टर्मिनल पर एक प्रक्षेपास्त्र गिरा और इस ताजा घटना में भी कई लोगों के घायल होने की खबर है। इससे पहले शनिवार को इसी यात्री टर्मिनल पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई और करीब 300 लोग घायल हुए थे। घायलों में शामिल एक भारतीय नागरिक की बाद में मौत हो गई, जिसके बाद शनिवार के हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। हूती विद्रोहियों ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली है। पहले हमले के बाद हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था और रविवार को भी उड़ानें निलंबित रहीं। लगातार हो रही घटनाओं ने सऊदी अरब के प्रमुख नागरिक विमानन केंद्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमलों के कारण यात्रियों की आवाजाही बाधित हुई है और विमानन कंपनियों को भी अपने परिचालन पर पुनर्विचार करना पड़ा है। इन घटनाओं के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और संघर्ष के आगे फैलने की आशंका जताई जा रही है।
हूतियों की चेतावनी से विमानन सेवाओं पर असर: हूती विद्रोहियों ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के दम्माम शहर में स्थित किंग फहद हवाई अड्डे और देश के पूर्वी हिस्से में तेल तथा गैस प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। विद्रोहियों ने विमानन कंपनियों, हवाई अड्डों पर काम करने वाले कर्मचारियों और यात्रियों को सऊदी अरब के हवाई अड्डों तथा हवाई क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि मक्का और मदीना के हवाई अड्डों को हमलों से अलग रखा जाएगा। इन धमकियों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों ने कुछ समय के लिए अपनी उड़ानें रोक दी हैं। इससे क्षेत्र में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय संपर्क पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, दम्माम हवाई अड्डे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले किए जाने के हूतियों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है। इसके बावजूद रियाद में लगातार हुए हमलों और अन्य ठिकानों को लेकर जारी चेतावनियों ने सऊदी अरब के सामने हवाई सुरक्षा मजबूत करने की चुनौती बढ़ा दी है।
ट्रंप के संभावित सैन्य कदम से बढ़ सकती है लड़ाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। उन्होंने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका के शामिल होने की संभावना पर विचार करने की बात भी कही है। सऊदी अरब इस संकट से निपटने के लिए दूसरे देशों से सहायता मांग रहा है। खबरों के मुताबिक, उसने मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली रक्षा प्रणालियों के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से मदद मांगी है। लगातार हो रहे हमलों से सऊदी अरब के मौजूदा मिसाइल रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। यदि अमेरिका सैन्य रूप से इस संघर्ष में शामिल होता है, तो हूतियों और उनके विरोधियों के बीच टकराव और व्यापक हो सकता है। इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और गहरा सकता है। संघर्ष का विस्तार होने की स्थिति में लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
बाब अल-मंदेब समुद्री मार्ग पर खतरे से तेल बाजार चिंतित: सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है। लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित बाब अल-मंदेब समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और इससे बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो तेल और अन्य सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब पहले से ही ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण दबाव में बताया गया है। ऐसे समय में तेल और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के दावे उसकी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन देशों और कारोबारों पर भी पड़ सकता है जो इस क्षेत्र से गुजरने वाले समुद्री व्यापार पर निर्भर हैं। इसी वजह से हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमलों को क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा सम्मेलन और निवेश योजनाओं पर भी मंडराया खतरा: रविवार को रियाद में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन आयोजित हो रहा था और आने वाले दिनों में यहां निवेश से जुड़ा एक बड़ा कार्यक्रम भी होना है। सऊदी अरब दुनिया भर के कारोबारियों और पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास कर रहा है, लेकिन लगातार हो रहे हमले इन योजनाओं के लिए चुनौती बन सकते हैं। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि कोई भी सऊदी अरब को कमजोर नहीं कर सकता और उनका देश कठिनाइयों के बाद दोबारा खड़ा होने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए सऊदी अरब एक नई पाइपलाइन पर काम कर रहा है। पिछले महीने एक पाइपलाइन पर हमले के बाद उसे कई दिनों तक बंद रखना पड़ा था। इस घटना ने ऊर्जा परिवहन के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। नई पाइपलाइन पर काम तेल की आपूर्ति जारी रखने की कोशिश का हिस्सा है, जबकि मौजूदा हमले सऊदी अरब के ऊर्जा क्षेत्र और निवेश संबंधी योजनाओं के सामने सुरक्षा की चुनौती बनाए हुए हैं।
यमन में भी हताहतों का दावा, संघर्ष का पुराना इतिहास: हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि रविवार को सना शहर में एक घर पर हुए संदिग्ध सऊदी हवाई हमले में एक बच्चे की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए। मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों में यमन में 91 लोगों की जान गई है, जिनमें 60 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे बताए गए हैं। इन दावों पर सऊदी अधिकारियों की तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई वर्ष 2015 में शुरू हुई थी। उस समय सऊदी अरब ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में युद्ध में हिस्सा लिया था। वर्ष 2022 में संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए शांति बनी, लेकिन बाद में तनाव फिर बढ़ने लगा। रियाद हवाई अड्डे पर शनिवार के हमले में मारे गए लोगों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी नागरिक और अमेरिका, मिस्र, फिलिस्तीन, जॉर्डन, सीरिया तथा सूडान के एक-एक नागरिक शामिल थे। मृतकों में मिस्र की विमान परिचारिका अज़्ज़ा रमज़ी और सीरिया की बुथैना अहमद ओवैदा भी थीं। ओवैदा चार बच्चों की मां थीं और पांच वर्षों से सऊदी अरब में रह रही थीं। यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि सऊदी हवाई अड्डों और तेल ठिकानों पर हमले हूतियों के लिए उलटे पड़ सकते हैं, क्योंकि इनके बाद सऊदी अरब अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है।














































