30 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि शाम 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। शिव योग रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद सिद्ध योग शुरू होगा। शुक्रवार की सुबह 9 बजकर 5 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा और इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र लग जाएगा। इस दिन वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत और नवरात्र के चौथे दिन से संबंधित उल्लेख भी दिए गए हैं। आइए जानते हैं 30 अक्टूबर 2026 का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया और सूर्य-चंद्रमा के उदय-अस्त का समय।
मुख्य पंचांग विवरण
दिन: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत: 1948 (पराभव)
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: हेमंत ऋतु
संक्रांति: उपलब्ध विवरण में उल्लेख नहीं
मास: कार्तिक मास
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: पंचमी तिथि शाम 7:26 बजे तक, इसके बाद षष्ठी तिथि
नक्षत्र: मृगशिरा नक्षत्र सुबह 9:05 बजे तक, इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र
योग: शिव योग रात 8:42 बजे तक, इसके बाद सिद्ध योग
सूर्य राशि: तुला राशि
चंद्र राशि: मिथुन राशि
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:48 बजे से 05:40 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 05:14 बजे से 06:31 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:56 बजे से 02:40 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से 06:03 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 05:38 बजे से 06:55 बजे तक
अमृत काल: रात 09:58 बजे से 11:27 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली): सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 02:51 बजे से शाम 04:14 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 07:55 बजे से 09:18 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा इस दिन घर से पश्चिम दिशा जौ या राई खाकर निकलना शुभ माना जाता है।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्योदय: सुबह 06:31 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:38 बजे
चंद्रोदय: रात 09:23 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन, 31 अक्टूबर को सुबह 10:57 बजे
दिन की चौघड़िया
दिन की अवधि: सुबह 06:31 बजे से शाम 05:38 बजे तक।
1. चर (सामान्य): सुबह 06:31 बजे से 07:54 बजे तक
2. लाभ (शुभ): सुबह 07:54 बजे से 09:18 बजे तक
3. अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 09:18 बजे से 10:41 बजे तक
4. काल (अशुभ): सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
5. शुभ (उत्तम): दोपहर 12:04 बजे से 01:27 बजे तक
6. रोग (अशुभ): दोपहर 01:27 बजे से 02:51 बजे तक
7. उद्वेग (अशुभ): दोपहर 02:51 बजे से शाम 04:14 बजे तक
8. चर (सामान्य): शाम 04:14 बजे से 05:37 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
रात्रि की अवधि: शाम 05:38 बजे से अगले दिन सुबह 06:32 बजे तक।
1. रोग (अशुभ): शाम 05:37 बजे से रात 07:14 बजे तक
2. काल (अशुभ): रात 07:14 बजे से 08:51 बजे तक
3. लाभ (शुभ): रात 08:51 बजे से 10:28 बजे तक
4. उद्वेग (अशुभ): रात 10:28 बजे से मध्यरात्रि 12:04 बजे तक
5. शुभ (उत्तम): मध्यरात्रि 12:04 बजे से देर रात 01:41 बजे तक (31 अक्टूबर)
6. अमृत (सर्वोत्तम): देर रात 01:41 बजे से सुबह 03:18 बजे तक (31 अक्टूबर)
7. चर (सामान्य): सुबह 03:18 बजे से 04:55 बजे तक (31 अक्टूबर)
8. रोग (अशुभ): सुबह 04:55 बजे से 06:32 बजे तक (31 अक्टूबर)
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी/मुख्य केंद्र | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 10:28 बजे से 11:52 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (NCT) | नई दिल्ली | सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर/जम्मू | सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:11 बजे तक |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 10:31 बजे से 11:58 बजे तक |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 09:28 बजे से 10:52 बजे तक |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 09:37 बजे से 11:01 बजे तक |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 10:09 बजे से 11:33 बजे तक |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 10:27 बजे से 11:52 बजे तक |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | सुबह 11:01 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 10:13 बजे से 11:38 बजे तक |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 10:59 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक |
| 18 | मणिपुर | इम्फाल | सुबह 09:27 बजे से 10:51 बजे तक |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 09:39 बजे से 11:03 बजे तक |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 09:29 बजे से 10:53 बजे तक |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 09:25 बजे से 10:49 बजे तक |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 10:11 बजे से 11:36 बजे तक |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 09:51 बजे से 11:15 बजे तक |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 10:31 बजे से 11:59 बजे तक |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 09:34 बजे से 10:58 बजे तक |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 09:55 बजे से 11:19 बजे तक |
30 अक्टूबर 2026 का विशेष ज्योतिषीय महत्व
शुक्रवार को शिव योग और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग रहेगा। सुबह 9:05 बजे के बाद आर्द्रा नक्षत्र का आरंभ होगा, जबकि रात 8:42 बजे के बाद शिव योग समाप्त होकर सिद्ध योग शुरू होगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शिव योग में मंत्र-जप और आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है।
मृगशिरा नक्षत्र का प्रतीक हिरण का सिर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र में जन्मे लोगों को सुंदर व्यक्तित्व, मिलनसार व्यवहार, सामाजिक रुचि और रचनात्मकता से जोड़ा जाता है। इनके स्वभाव में संकोच भी बताया जाता है, जिसके कारण नए लोगों से घुलने-मिलने में समय लग सकता है। मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं और इसका संबंध खैर के पेड़ से बताया गया है, जिसकी लकड़ी से कत्था बनाया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्मे लोगों को खैर के पेड़ की उपासना करनी चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए।
शुक्रवार को पूजा-पाठ, मंत्र-जप और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का चयन करते समय पंचांग में दिए गए समय को ध्यान में रखें। राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल को परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है, जबकि लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया को अनुकूल माना जाता है। किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार समय निर्धारित करना उचित रहता है।














































