1 नवंबर 2026 के पंचांग और ग्रहों की स्थिति के अनुसार इस दिन साध्य योग, शुभ योग, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। इसके साथ ही सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग तथा चंद्रमा और मंगल की युति से चंद्र-मंगल योग भी प्रभावी हैं। वहीं, 3 नवंबर को बुध ग्रह वक्री अवस्था में राहु के स्वाति नक्षत्र में दोबारा प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध के इस नक्षत्र परिवर्तन से मिथुन, कन्या, धनु और मकर राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे हैं।
साध्य योग
समय: 31 अक्टूबर 2026 को शाम 5:32 बजे से 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:39 बजे तक।
कैसे बन रहा है: वैदिक पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की निरयन स्थिति के आधार पर 27 नित्य योगों की गणना की जाती है। इस गणना के अनुसार 1 नवंबर को दोपहर 2:39 बजे तक साध्य योग रहेगा। इसके बाद शुभ योग शुरू होगा।
प्रभाव: साध्य योग को कार्य सिद्धि और प्रयासों को परिणाम तक पहुंचाने वाला योग माना जाता है। इस दौरान योजनाओं को व्यवस्थित करना, जरूरी काम पूरे करना, शिक्षा, लेखन और व्यावसायिक बातचीत जैसे काम अनुकूल माने जाते हैं। हालांकि, इसे हर प्रकार के नए या बड़े काम के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त नहीं माना जाता।
उपाय: भगवान विष्णु का स्मरण करें और पीले फूल अर्पित करें। जरूरतमंद व्यक्ति को पीली दाल या भोजन दान करें। किसी काम में जल्दबाजी करने के बजाय पूरी योजना के साथ आगे बढ़ें।
शुभ योग
समय: 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:39 बजे से 2 नवंबर 2026 को दोपहर 12:07 बजे तक।
कैसे बन रहा है: साध्य योग की समाप्ति के बाद सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त निरयन स्थिति के आधार पर शुभ योग बनता है। लखनऊ की पंचांग गणना के अनुसार इसका आरंभ 1 नवंबर को दोपहर 2:39 बजे और समाप्ति 2 नवंबर को दोपहर 12:07 बजे होगी।
प्रभाव: शुभ योग को मांगलिक कार्यों, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, अध्ययन और सकारात्मक प्रयासों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस अवधि में शुरू किए गए कामों में अनुशासन और स्पष्ट उद्देश्य रखने पर अच्छे परिणाम पाने की मान्यता है।
उपाय: भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें। किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। नए काम की शुरुआत से पहले अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
रवि पुष्य योग
समय: 1 नवंबर 2026 को सुबह 6:16 बजे से 2 नवंबर 2026 को सुबह 4:30 बजे तक। यह समय लखनऊ के स्थानीय पंचांग के अनुसार है।
कैसे बन रहा है: रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य योग बनता है। 1 नवंबर को रविवार है और पुष्य नक्षत्र अगले दिन सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। इसी कारण इस अवधि में रवि पुष्य योग प्रभावी रहेगा।
प्रभाव: रवि पुष्य योग को खरीदारी, धन-संपत्ति से जुड़े कार्यों, व्यापारिक योजनाओं, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। पुष्य नक्षत्र को समृद्धि और स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, विवाह जैसे कुछ मांगलिक कार्यों के लिए अलग मुहूर्त देखना जरूरी होता है।
उपाय: भगवान सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या पीली वस्तुओं का दान करें।
सर्वार्थ सिद्धि योग
समय: 1 नवंबर 2026 को सुबह 6:16 बजे से 2 नवंबर 2026 को सुबह 4:30 बजे तक। यह समय लखनऊ के स्थानीय पंचांग के अनुसार है।
कैसे बन रहा है: रविवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस दिन सूर्योदय के समय पुष्य नक्षत्र प्रभावी है और यह 2 नवंबर की सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। इसलिए इस अवधि में सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बना रहेगा।
प्रभाव: सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता, नई योजनाओं की शुरुआत, व्यापारिक गतिविधियों, खरीदारी और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस योग में किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाने और लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है। फिर भी किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए संबंधित मुहूर्त की अलग से जांच करनी चाहिए।
उपाय: भगवान गणेश और भगवान विष्णु की पूजा करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं और जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न का दान करें। किसी नए काम की शुरुआत से पहले अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
बुधादित्य योग
समय: यह योग 18 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक तुला राशि में प्रभावी रहेगा। 1 नवंबर को भी यह योग बन रहा है। इस योग की शुरुआत और समाप्ति का सटीक घंटा-मिनट उपलब्ध गणना में स्पष्ट नहीं है।
कैसे बन रहा है: सूर्य और बुध दोनों तुला राशि में स्थित हैं। 1 नवंबर की ग्रह स्थिति के अनुसार सूर्य तुला राशि में लगभग 14° और बुध लगभग 22° पर है। एक ही राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनता है। इस दिन बुध वक्री और अस्त अवस्था में है। इसलिए इस योग के परिणामों में भ्रम, निर्णय लेने में देरी और बातचीत में गलतफहमी जैसी स्थितियां भी जुड़ सकती हैं।
प्रभाव: बुधादित्य योग को बुद्धि, वाणी, शिक्षा, लेखन, प्रशासनिक क्षमता, व्यापारिक समझ और निर्णय लेने की शक्ति से जोड़ा जाता है। इस दौरान बौद्धिक काम, योजना बनाने और संवाद से जुड़े क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ने की मान्यता है। बुध के वक्री और अस्त होने के कारण दस्तावेजों, लेन-देन और महत्वपूर्ण बातचीत में दोबारा जांच जरूरी रहेगी।
उपाय: भगवान गणेश की पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और बुधवार के दिन हरी मूंग का दान करें। महत्वपूर्ण दस्तावेज पढ़कर ही हस्ताक्षर करें और जल्दबाजी में कोई आर्थिक निर्णय न लें।
चंद्र-मंगल योग
समय: 1 नवंबर 2026 को यह योग प्रभावी रहेगा। चंद्रमा 3 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 3:46 बजे कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए चंद्र-मंगल युति का यह संयोग 3 नवंबर की सुबह तक रहेगा।
कैसे बन रहा है: 1 नवंबर को चंद्रमा कर्क राशि में और मंगल भी कर्क राशि में स्थित है। दोनों ग्रहों के एक ही राशि में होने से चंद्र-मंगल युति बनती है। मंगल कर्क राशि में नीच का माना जाता है, इसलिए इस योग के प्रभाव में आर्थिक सक्रियता के साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव और जल्दबाजी की प्रवृत्ति भी जुड़ सकती है।
प्रभाव: ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्र-मंगल योग साहस, धन कमाने की इच्छा, व्यापारिक गतिविधियों और संपत्ति से जुड़े मामलों को सक्रिय करता है। मंगल के कर्क राशि में नीच होने के कारण गुस्से में निर्णय लेना, पारिवारिक मामलों में तनाव और धन के लेन-देन में जल्दबाजी नुकसानदेह मानी जाती है।
उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार को मसूर की दाल या लाल वस्त्र का दान करें। क्रोध और आवेश में कोई बड़ा फैसला न लें।
बुध का स्वाति नक्षत्र में गोचर
समय: 3 नवंबर 2026 को सुबह 5:53 बजे बुध ग्रह वक्री अवस्था में राहु के स्वाति नक्षत्र में दोबारा प्रवेश करेंगे। उपलब्ध गणना के अनुसार बुध 25 नवंबर 2026 को दोपहर लगभग 1:41 बजे तक स्वाति नक्षत्र में रहेंगे।
कैसे बन रहा है: बुध इस समय तुला राशि में स्थित हैं और वक्री गति के कारण विशाखा नक्षत्र से वापस स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इसके अधिष्ठाता देवता वायु माने जाते हैं। बुध को बुद्धि, वाणी, लेखन, व्यापार, गणना और संचार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में राहु के स्वामित्व वाले स्वाति नक्षत्र में बुध का प्रवेश इन विषयों को विशेष रूप से सक्रिय करेगा।
प्रभाव: बुध के स्वाति नक्षत्र में गोचर से लेखन, मीडिया, शिक्षा, व्यापार, संचार और बौद्धिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस अवधि में नई योजनाओं पर काम करने, पुराने अधूरे कार्यों को पूरा करने और व्यावसायिक संपर्क मजबूत करने पर जोर रहेगा। बुध वक्री होने के कारण बातचीत, दस्तावेजों, अनुबंधों और आर्थिक लेन-देन में सावधानी रखना जरूरी होगा। इस गोचर से मिथुन, कन्या, धनु और मकर राशि के जातकों को विशेष शुभ परिणाम मिलने की ज्योतिषीय मान्यता है।
मिथुन राशि: बुध आपकी राशि के स्वामी हैं और पंचम भाव में स्थित रहेंगे। स्वाति नक्षत्र में बुध के प्रवेश से आपकी तार्किक क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता मजबूत होगी। कार्यक्षेत्र में काम समय पर पूरे करने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलेंगे। लेखन, कला और मीडिया से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। करियर में तरक्की के रास्ते खुलेंगे।
कन्या राशि: बुध का स्वाति नक्षत्र में गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में होगा। यह भाव धन, बचत और वाणी से संबंधित है। इस गोचर से आय के अतिरिक्त स्रोत बनने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैतृक कारोबार से जुड़े लोगों को मुनाफा मिलेगा। आपकी वाणी में मधुरता बढ़ेगी और सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान प्राप्त होगा।
धनु राशि: बुध आपकी राशि से एकादश भाव में स्थित हैं, जिसे लाभ का भाव माना जाता है। स्वाति नक्षत्र में बुध के प्रवेश से व्यापारियों को कारोबार का विस्तार करने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय में बढ़ोतरी के रास्ते खुलेंगे। नौकरीपेशा लोगों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वरिष्ठ कर्मचारियों और अधिकारियों के मार्गदर्शन से करियर में प्रगति होगी।
मकर राशि: बुध का यह नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए अनुकूल परिणाम लेकर आएगा। जीवन में स्थिरता बढ़ेगी और मेहनत का उचित फल प्राप्त होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। उच्च पद प्राप्त करने के अवसर बनेंगे। काम के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभदायक रहेंगी।
उपाय: भगवान गणेश की पूजा करें और बुधवार को हरी मूंग का दान करें। भगवान विष्णु का स्मरण करें और जरूरतमंद व्यक्ति को हरे रंग के वस्त्र दान करें। महत्वपूर्ण बातचीत और आर्थिक लेन-देन में जल्दबाजी न करें तथा हर दस्तावेज को अच्छी तरह जांचकर ही आगे बढ़ें।
निष्कर्ष: 1 नवंबर 2026 को साध्य और शुभ नित्य योग के साथ रवि पुष्य तथा सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इसके अलावा सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग और चंद्र-मंगल की युति से चंद्र-मंगल योग प्रभावी हैं। 3 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में पुनः प्रवेश भी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। इस गोचर से मिथुन, कन्या, धनु और मकर राशि के जातकों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति, व्यापार और प्रतियोगी गतिविधियों में प्रगति के योग बन रहे हैं। व्यक्तिगत कुंडली, लग्न और दशा के अनुसार परिणाम कम-ज्यादा हो सकते हैं।















































