गुरु प्रदोष व्रत का महत्व: 28 मई को गुरुवार का दिन होने के कारण इस दिन पड़ने वाले व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती है। इतना ही नहीं, यह व्रत मोक्ष की भी प्राप्ति कराता है।
प्रदोष काल की पूजा: इस व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल के समय की जाती है। इस विशेष मुहूर्त में श्रद्धालु भगवान शिव की पूरे विधि विधान से पूजा करने के बाद कथा का श्रवण करते हैं। प्रदोष काल में की गई यह शिव पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है और इसके नियम पूर्वक पालन से शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
गुरु प्रदोष व्रत मुहूर्त: गुरु प्रदोष व्रत 28 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन गुरु प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम 07:12 बजे से रात 09:15 बजे तक रहेगा, यही दिन का प्रदोष समय भी है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 28 मई 2026 को सुबह 07:56 बजे होगा और इसका समापन 29 मई 2026 को सुबह 09:50 बजे होगा।
प्रातः काल की पूजा विधि: गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें। तदुपरांत भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग पर बेलपत्र, शुद्ध जल, दूध, धूप, दीप और नैवेद्य पूरे भक्तिभाव के साथ अर्पित करें।
संध्या काल की पूजा विधि: सूर्यास्त के समय, यानी प्रदोष काल में फिर से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद विधि विधान से शिव की पूजा करें और साथ ही इस समय गुरु प्रदोष व्रत की कथा भी अवश्य सुनें। शिव जी के मंत्रों का जाप करें, भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं और इसके बाद आरती कर पूजा संपन्न करें।
प्रदोष व्रत के आहार नियम: प्रदोष व्रत में कोई फलाहारी रहता है तो कोई एक समय भोजन करके यह व्रत रखता है। अगर आप फलाहारी व्रत रहते हैं तो दिन भर सिर्फ फल या व्रत वाली चीजों का ही सेवन कर सकते हैं। वहीं अगर आप यह व्रत एक समय भोजन करके रखते हैं तो शाम की पूजा संपन्न होने के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।





































