तिब्बत-नेपाल सीमा के पास स्थित ताल के दोबारा अचानक फूट जाने के कारण चीनी अधिकारियों ने तिब्बत में जारी बचाव अभियान को पूरी तरह रोक दिया है। चीन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा करते हुए तिब्बत के Kerung इलाके में चल रहे सभी राहत और बचाव कार्यों को तुरंत प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही चीन सरकार ने घटनास्थल पर मौजूद अपनी सभी रेस्क्यू टीमों को प्रभावित क्षेत्र से कम से कम एक किलोमीटर दूर जाने के स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। दोबारा जलप्रलय की आशंका को देखते हुए सभी बचावकर्मियों की सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
नेपाल प्रशासन का अलर्ट: इस भीषण आपदा के बीच नेपाल पुलिस ने भी आम जनता के लिए आपातकालीन चेतावनी जारी की है कि तिब्बत क्षेत्र में दोबारा Water Dam फट चुका है। नेपाल पुलिस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश पोस्ट करते हुए क्षेत्र में मौजूद सभी लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। पुलिस ने अपनी पोस्ट में कहा कि तिब्बत की तरफ पानी का डैम फिर से टूट जाने की प्रामाणिक जानकारी मिली है। इसीलिए राहत और बचाव में लगे सभी सुरक्षाकर्मियों, बचावकर्मियों तथा आम नागरिकों से अनुरोध है कि वे तुरंत पूरी तरह सतर्क रहें और सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।
ऊंचाई वाले इलाकों की शरण: नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत की ओर से पानी का तेज बहाव फिर से शुरू होने की सूचना के बाद व्यापक एहतियात बरती जा रही है। राहत एवं बचाव कार्यों में तैनात सभी जवानों, राहत कर्मियों और स्थानीय नागरिकों से किसी भी आपात स्थिति के लिए तुरंत अलर्ट रहने की अपील की गई है। प्रशासन ने सभी लोगों से जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने और अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी तुरंत देने का आग्रह किया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों को निचले स्थानों से हटकर किसी ऊंची जगह पर जाने को कहा गया है।
नदी में बर्फ का टुकड़ा: वैज्ञानिकों और जांच टीमों की शुरुआती जांच के अनुसार यह भयानक तबाही लेंडे नदी में बर्फ का एक बहुत बड़ा टुकड़ा अचानक गिर जाने से शुरू हुई थी। नदी के पानी में विशाल बर्फ का टुकड़ा गिर जाने के कारण पानी का सामान्य बहाव रुक गया और वहां एक अस्थाई जल बांध बन गया था। कुछ समय तक तो यह प्राकृतिक पानी रुक रहा, परंतु पीछे से जमा हो रहे पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ने के बाद यह बर्फ का टुकड़ा अचानक ध्वस्त हो गया। इसके बाद अत्यधिक मात्रा में पानी और भारी बर्फ के टुकड़े भयंकर गति के साथ नीचे बहने लगे।
विनाशकारी मलबे का असर: नदी के तेज बहाव के साथ पानी ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में मलबा और विशालकाय पत्थर भी नीचे की बस्तियों की ओर तेजी से बहने लगे। नदी के साथ बहकर आए इन्हीं बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे ने नेपाल के इलाकों में भारी तबाही मचाई और मकानों को नष्ट कर दिया। इस दुखद और दर्दनाक घटना में अब तक करीब 500 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। तबाही के बाद पूरे इलाके में तबाही का मंजर छाया हुआ है और मलबे के नीचे कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है।
राहत कार्यों में रुकावट: प्रभावित स्थानों पर रेस्क्यू ऑपरेशन का काम अभी पूरा नहीं हो पाया था कि दोबारा डैम टूटने की इस घटना ने संकट को और बढ़ा दिया है। मलबे के विशाल ढेरों के नीचे दबे हुए असहाय लोगों की तलाश के लिए खोज अभियान लगातार जारी रखा गया था। लेकिन सीमा पार से दोबारा पानी छोड़े जाने और बाढ़ का खतरा मंडराने के कारण इस पूरे खोज अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा है। सुरक्षाबल अब सबसे पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं ताकि मौतों का यह आंकड़ा और अधिक बढ़ने से रोका जा सके।














































